Bihar Final Voter List: बिहार के इन 5 जिलों में सबसे ज्यादा वोट कटे, मुस्लिम इलाकों के आंकड़े ने चौंकाया
Bihar Final Voter List 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची में बड़ा बदलाव हुआ है। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) 2025 की फाइनल रिपोर्ट जारी कर दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 69.3 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए, जबकि 21.53 लाख नए वोटर जोड़े गए हैं। यानी कुल मिलाकर करीब 47.77 लाख वोटर अब लिस्ट से बाहर हो गए। जनवरी 2025 तक बिहार में कुल 7.8 करोड़ वोटर थे, जो अब घटकर 7.42 करोड़ रह गए हैं।
यह कटौती कुल मतदाताओं का लगभग 6% है, लेकिन कुछ जिलों में वोट डिलीशन की रफ्तार औसत से कहीं ज्यादा रही है। खासकर गोपालगंज, किशनगंज, पूर्णिया, भागलपुर और मधुबनी जैसे जिलों में वोटर लिस्ट से बड़ी संख्या में नाम गायब हुए हैं।

🔹 गोपालगंज में सबसे ज्यादा कटे नाम, NDA के गढ़ में हिला देने वाला आंकड़ा
गोपालगंज जिले में वोटरों के नाम कटने की दर सबसे अधिक रही है। यहां 2.31 लाख वोटर्स के नाम हटाए गए, जो कुल वोटरों का करीब 11.37% है। जनवरी 2025 में जिले में 20.38 लाख वोटर थे, लेकिन SIR के बाद यह संख्या घटकर 18.06 लाख रह गई।
राजनीतिक रूप से यह इलाका NDA का गढ़ माना जाता है। जिले की 6 विधानसभा सीटें-बैकुंठपुर, बरौली, गोपालगंज, कुचायकोट, भोरे और हथुआ-पिछले चुनाव में पूरी तरह NDA के पास थीं।
🔹 सीमांचल के मुस्लिम इलाकों में भी बड़ी संख्या में नाम हटे
किशनगंज, पूर्णिया, कटिहार और अररिया जैसे सीमांचल के जिलों में वोटर लिस्ट से 6.97 लाख नाम हटाए गए हैं। यह इलाका बिहार में मुस्लिम आबादी का केंद्र माना जाता है।
आंकड़ों के मुताबिक,
- किशनगंज में मुस्लिम आबादी 68%,
- कटिहार में 43%,
- अररिया में 42%,
- पूर्णिया में 38%,
- और दरभंगा में 25% है।
किशनगंज में करीब 1.04 लाख वोटर, जबकि पूर्णिया में 1.59 लाख वोटर हटाए गए हैं। इन दोनों जिलों में 7% से अधिक नाम डिलीट हुए हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि यह बदलाव चुनावी समीकरणों पर बड़ा असर डाल सकता है।
🔹 NDA का तिरहुत गढ़ भी प्रभावित
तिरहुत कमिश्नरी, जो पारंपरिक रूप से NDA का मजबूत इलाका माना जाता है, वहां भी इस बार वोटर लिस्ट में बड़ी कटौती हुई है। आंकड़ों के अनुसार, 5.93 लाख वोटर लिस्ट से बाहर कर दिए गए हैं।
इस क्षेत्र के 6 जिलों में विधानसभा की कुल 49 सीटें आती हैं। 2020 में इनमें से 33 सीटें NDA ने जीती थीं, जबकि महागठबंधन को केवल 16 सीटें मिली थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर इस बार भी वोटर लिस्ट में इसी तरह की गड़बड़ी या असंतुलन देखने को मिला, तो यह नतीजों पर सीधा असर डाल सकता है।
🔹 मिथिलांचल में भी भारी कटौती, मधुबनी में सबसे ज्यादा असर
मिथिलांचल कमिश्नरी यानी दरभंगा, मधुबनी और समस्तीपुर के इलाके में भी वोटरों की संख्या घटी है।
- मधुबनी में 2.27 लाख (6.81%) वोटर हटाए गए हैं।
- दरभंगा में करीब 89,842 (3%) वोटर लिस्ट से बाहर हुए।
- समस्तीपुर में 1.6 लाख (5.2%) नाम हटाए गए।
इन तीनों जिलों में कुल मिलाकर 4.7 लाख वोटर लिस्ट से बाहर हो गए हैं। पिछली बार यहां की 30 में से 22 सीटें NDA के पास गई थीं। अब वोटर लिस्ट में यह कटौती सियासी समीकरण बदल सकती है।
🔹 पटना और मगध कमिश्नरी में कितने कटे वोट?
राजधानी पटना समेत इसके आसपास के जिलों में भी 2% से 4% वोटर लिस्ट से बाहर हुए हैं। यह इलाका महागठबंधन का पारंपरिक गढ़ माना जाता है। वहीं मगध कमिश्नरी, जिसमें गया, औरंगाबाद, जहानाबाद जैसे जिले आते हैं, वहां 4.66% नाम हटाए गए हैं। पिछली बार इन 26 सीटों में से 19 सीटें महागठबंधन के पास गई थीं।
🔹बिहार के 5 जिले जहां सबसे ज्यादा वोट कटे
1. गोपालगंज
- 1 जनवरी 2025 को वोटर: 20,38,218
- SIR के बाद वोटर: 18,06,465
- कुल वोट घटे: 2,31,753
- प्रतिशत कमी: 11.37%
2. किशनगंज
- 1 जनवरी 2025 को वोटर: 12,17,018
- SIR के बाद वोटर: 11,12,530
- कुल वोट घटे: 1,04,488
- प्रतिशत कमी: 7.12%
3. पूर्णिया
- 1 जनवरी 2025 को वोटर: 22,36,829
- SIR के बाद वोटर: 20,77,573
- कुल वोट घटे: 1,59,256
- प्रतिशत कमी: 7.12%
4. भागलपुर
- 1 जनवरी 2025 को वोटर: 23,82,770
- SIR के बाद वोटर: 22,18,149
- कुल वोट घटे: 1,64,278
- प्रतिशत कमी: 6.89%
5. मधुबनी
- 1 जनवरी 2025 को वोटर: 33,37,011
- SIR के बाद वोटर: 31,09,890
- कुल वोट घटे: 2,27,121
- प्रतिशत कमी: 6.81%
🔹 चुनाव से पहले बड़ा सवाल - क्या वोट कटने से बदल जाएगा समीकरण?
वोटर लिस्ट से लाखों नामों का हटना सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। बिहार में वोटिंग पैटर्न जाति और समुदाय आधारित रहा है, ऐसे में सीमांचल या मिथिलांचल में वोटर कटौती के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। NDA और महागठबंधन दोनों ही दल अब इस पर बारीकी से निगरानी रख रहे हैं कि किन वर्गों के वोट घटे हैं और यह बदलाव उनके चुनावी नतीजों को कैसे प्रभावित कर सकता है।












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