Bihar Election 2025: BJP की कमान संभालेंगे धर्मेंद्र प्रधान, क्या है उनका चुनाव जिताने का ट्रैक रिकॉर्ड
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर भले ही अभी तक आधिकारिक तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने अपनी रणनीति पर काम शुरू करते हुए गुरुवार (25 सितंबर 2025) को केंद्रीय शिक्षा मंत्री और वरिष्ठ नेता धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) को बिहार चुनाव का प्रभारी नियुक्त किया है।
वहीं, सीआर पाटिल और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को सह-प्रभारी बनाया गया है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र में कहा गया कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ये नियुक्तियां तत्काल प्रभाव से लागू की हैं।

साथ ही अगले साल होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव को प्रभारी और बिप्लब देब को सह-प्रभारी बनाया गया है।
BJP election strategy: कांग्रेस की रणनीति का काट हैं प्रधान?
दिलचस्प यह है कि महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) ने भी बिहार को अपनी रणनीति का केंद्र बना लिया है। बुधवार को कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक पटना में आयोजित हुई, जो 1944 के बाद पहली बार बिहार में हुई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस बैठक के बाद दावा किया कि "बिहार से नरेंद्र मोदी की बेदखली का आगाज होगा।"
भाजपा ने इस आक्रामक मूड का जवाब देने में देर नहीं की और तुरुप का पत्ता चलते हुए धर्मेंद्र प्रधान को प्रभारी बना दिया। विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने यह जिम्मेदारी ऐसे नेता को दी है, जो कठिन चुनावी परिस्थितियों को भाजपा के पक्ष में मोड़ने की क्षमता रखते हैं।
Dharmendra Pradhan भाजपा के चुनावी 'ट्रबलशूटर'
धर्मेंद्र प्रधान सिर्फ केंद्रीय मंत्री ही नहीं, बल्कि भाजपा के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्हें "मोदी का भरोसेमंद रणनीतिकार" कहा जाता है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों में कई अहम राज्यों में भाजपा को जीत दिलाई है।
उत्तर प्रदेश (2022 विधानसभा चुनाव):
प्रभारी बनाए गए प्रधान ने भाजपा को 403 सीटों में से 255 सीटें दिलाकर पूर्ण बहुमत दिलाया। जातीय समीकरणों को साधने और मोदी-योगी मैजिक को सही ढंग से पेश करने में उनकी बड़ी भूमिका मानी गई।
ओडिशा (2024 लोकसभा और विधानसभा चुनाव):
अपने गृह राज्य ओडिशा में भाजपा की पहली पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने का श्रेय भी उन्हें जाता है। पार्टी ने यहाँ 20 लोकसभा और 78 विधानसभा सीटें जीतीं। उन्हें "ओडिशा विजय का शिल्पकार" कहा गया।
हरियाणा (2024 विधानसभा चुनाव):
यहाँ भी प्रभारी रहते हुए उन्होंने भाजपा को 48 सीटें दिलाकर लगातार तीसरी बार सत्ता दिलाई। जाट-गैर जाट समीकरण को तोड़ने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की रणनीति ने उन्हें विशेष पहचान दिलाई।
बिहार चुनाव में धर्मेंद्र प्रधान की भूमिका
बिहार का राजनीतिक परिदृश्य हमेशा से जटिल रहा है। जातिगत समीकरण, क्षेत्रीय दलों की भूमिका और गठबंधन की मजबूरी यहाँ चुनाव को खास बनाते हैं।
एनडीए की स्थिति:
भाजपा, जदयू और अन्य दलों का गठबंधन सत्ता में है, लेकिन नीतीश कुमार की 'अस्थिर राजनीति' और महागठबंधन की आक्रामक रणनीति चुनौती पेश कर रही है।
महागठबंधन की चुनौती:
आरजेडी-कांग्रेस गठबंधन बेरोजगारी, महंगाई और विकास की धीमी रफ्तार जैसे मुद्दों पर जनता को लामबंद करने की कोशिश कर रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान का टेस्ट:
प्रधान की रणनीति से भाजपा को उम्मीद है कि वे बिहार के सामाजिक-आर्थिक मुद्दों-जैसे रोजगार, विकास और मोदी सरकार की योजनाओं-को केंद्र में लाकर एनडीए की स्थिति मजबूत करेंगे।
BJP Bihar Poll Strategy: चुनावी समीकरण पर असर
धर्मेंद्र प्रधान की पिछली सफलताएँ इस बात का संकेत देती हैं कि वे जातीय और क्षेत्रीय जटिलताओं को साधने में माहिर हैं। भाजपा का लक्ष्य न सिर्फ अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करना है, बल्कि युवा और पहली बार वोट देने वालों को भी अपने पाले में लाना है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि प्रधान यूपी की तरह यहाँ भी जातीय संतुलन साधने और संगठन को धार देने में सफल रहते हैं, तो भाजपा बिहार में महागठबंधन के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। बिहार चुनाव 2025 भाजपा के लिए सिर्फ एक और राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि 2029 लोकसभा चुनाव की दिशा तय करने वाला चुनाव माना जा रहा है।
धर्मेंद्र प्रधान की नियुक्ति ने साफ कर दिया है कि भाजपा कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। अब देखना होगा कि क्या वे बिहार में भी ओडिशा और यूपी जैसी सफलता दोहरा पाते हैं या नहीं।












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