‘मैं नीतीश को ही बनाऊंगा मुख्यमंत्री’, चिराग पासवान ने तोड़ी चुप्पी, बताया कैसी है नीतीश की तबीयत?
Bihar Election 2025 (Chirag Paswan): बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक गलियारों में गठबंधन की मजबूती और नेतृत्व पर चर्चाएं तेज हैं। इन सबके बीच एलजेपी (रामविलास) प्रमुख चिराग पासवान ने अपने ताजा बयान से सियासत में हलचल मचा दी है। उन्होंने साफ कहा है कि चाहे NDA की औपचारिक घोषणा हो या न हो, उनके विधायक फिर से नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री के रूप में चुनेंगे।
पटना में दैनिक भास्कर से खास बातचीत में चिराग पासवान ने न सिर्फ नीतीश कुमार की तबीयत पर उठ रहे सवालों को "विपक्ष का नैरेटिव" बताया, बल्कि अपनी राजनीतिक स्थिति पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि "मैं NDA की सभी पार्टियों की तरफ से नहीं, लेकिन अपने दल की ओर से भरोसा दिला सकता हूं कि हमारे विधायक नीतीश जी के नाम पर एकजुट हैं।"

🔹 'नीतीश जी बिल्कुल फिट हैं, विपक्ष बस भ्रम फैला रहा है'
बीते कुछ हफ्तों से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेहत को लेकर कई तरह की चर्चाएं चल रही थीं। विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा था कि क्या वे चुनाव प्रचार और भविष्य की जिम्मेदारी निभाने के लिए फिट हैं। इस पर चिराग ने कहा कि यह सब विपक्ष की रणनीति है, जो मुद्दों पर बहस करने से बचना चाहता है।
उन्होंने कहा, "बिहार जैसे राज्य का नेतृत्व करना कोई आसान बात नहीं। नीतीश जी पूरी तरह सक्षम हैं और आज भी राज्य के हर कोने में सक्रिय हैं। जब महागठबंधन अपने भीतर सीट बंटवारे पर उलझा रहा, तब नीतीश जी लगातार जनता के बीच काम और संवाद में जुटे थे।"
🔹 '2020 की गलतफहमियां खत्म, अब गठबंधन पहले से मजबूत'
चिराग पासवान ने यह भी माना कि 2020 के विधानसभा चुनाव में उनके और जेडीयू के बीच जो तल्खियां थीं, वे अब अतीत बन चुकी हैं। उन्होंने कहा, "अब पांच साल बीत चुके हैं। उस वक्त जो मतभेद थे, वो स्वाभाविक थे। राजनीति में मतभेद होते हैं, लेकिन उद्देश्य बड़ा होना चाहिए। आज हम सब एक साथ हैं क्योंकि बिहार का भविष्य किसी एक दल से बड़ा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि इस बार NDA पहले से ज्यादा संगठित है, "पांच दलों का गठबंधन आज एक विनर कॉम्बिनेशन है। 2020 में हम बंटे हुए थे, फिर भी सरकार बनी। इस बार हम एकजुट हैं, तो जीत निश्चित है।"
🔹 'डिप्टी सीएम पद की चर्चा बस अफवाह थी'
हाल में ऐसी खबरें आईं कि सीट बंटवारे के वक्त चिराग पासवान ने डिप्टी सीएम पद की मांग की थी, लेकिन उन्होंने इस पर पूरी तरह विराम लगा दिया। उन्होंने साफ कहा, "न तो मैंने ऐसी कोई मांग रखी, न ही किसी ने मुझसे ऐसा वादा किया। अभी मेरी प्राथमिकता गठबंधन को बड़ी जीत दिलाना है। जो भी योग्य होगा, उसे उसका हक बाद में मिलेगा।" उन्होंने यह भी कहा कि उनके लिए राजनीति "वर्तमान की जिम्मेदारी" है, न कि भविष्य के पदों की दौड़।
🔹 'मुस्लिमों को टिकट देने पर BJP से तुलना गलत'
जब उनसे पूछा गया कि उनकी पार्टी ने सिर्फ एक मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट क्यों दिया, तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी का फोकस "काबिलियत" पर है, धर्म पर नहीं। साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि "BJP ने तो एक भी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया। इसलिए यह सवाल सिर्फ मुझसे पूछना ठीक नहीं है।"
चिराग ने दावा किया कि उनकी पार्टी सभी वर्गों के प्रतिनिधित्व की पक्षधर है, लेकिन टिकट चयन का आधार सिर्फ और सिर्फ क्षमता और स्थानीय लोकप्रियता रही है।
🔹 'कठिन सीटें जीतकर दिखाएंगे असली ताकत'
29 सीटों पर चुनाव लड़ रही LJP (रामविलास) को इस बार कई कठिन मानी जाने वाली सीटें मिली हैं। इस पर चिराग ने कहा कि उन्हें चुनौती से डर नहीं लगता। उन्होंने कहा, "सहयोगी होने के नाते आसान सीट जीतना बड़ी बात नहीं होती। असली राजनीति तब है जब आप कठिन सीटें जीतकर गठबंधन के लिए योगदान दें। हमें जो सीटें मिली हैं, उनमें कुछ मुश्किल जरूर हैं, लेकिन हम उन्हें भी जीतकर दिखाएंगे।"
🔹 नीतीश-चिराग के रिश्तों की नई शुरुआत
2020 के चुनाव के दौरान जब चिराग पासवान ने अलग राह चुनी थी, तब दोनों के बीच दूरी चरम पर थी। लेकिन इस बार तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। हाल ही में छठ पूजा पर नीतीश कुमार चिराग के घर पहुंचे, तो यह मुलाकात न सिर्फ राजनीतिक बल्कि भावनात्मक रूप से भी अहम रही।
चिराग पासवान कहते हैं, "मुख्यमंत्री जी का हमारे घर आना मेरे परिवार के लिए बहुत खुशी की बात थी। छठ जैसे पवित्र पर्व पर उनका आना गठबंधन की मजबूती की खूबसूरत तस्वीर थी। इससे विपक्ष का वह नैरेटिव खत्म हुआ कि हमारे बीच मनमुटाव है।"
इस इंटरव्यू में चिराग पासवान ने कई बार दोहराया कि बिहार का नेतृत्व नीतीश कुमार ही संभालेंगे। उन्होंने महागठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा कि "जब हमारे पास मजबूत नेतृत्व और एकजुट गठबंधन है, तो किसी औपचारिक घोषणा की जरूरत नहीं।" बिहार की राजनीति में चिराग का यह बयान सिर्फ गठबंधन की एकता नहीं दिखाता, बल्कि यह भी संकेत देता है कि NDA का अगला चेहरा कौन होगा।












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