Bihar Election: छोटे सरकार से सूरजभान तक, बिहार के 5 बाहुबली नेता किस जाति से, जिनका राजनीति में दबदबा!
Bihar Election 2025: बिहार की राजनीति को समझना हो तो जाति समीकरण को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यहां हर सीट का गणित जाति पर टिका होता है। सत्ता की कुर्सी तक किसकी पहुंच होगी, यह भी अक्सर जातीय आधार पर ही तय होता है। ऐसे में जब बात बाहुबली नेताओं की हो तो यह सवाल और भी अहम हो जाता है कि वे किस जाति से आते हैं और उनकी पकड़ किन इलाकों पर है।
वनइंडिया हिंदी की खास सीरिज "जाति की पाति" में आज जानते हैं बिहार के पांच बड़े बाहुबली नेताओं की जाति और राजनीति में उनकी ताकत के बारे में। इनमें शामिल हैं-अनंत सिंह, सूरजभान सिंह, सुनील पांडे, आनंद मोहन और पप्पू यादव।

🔹 अनंत सिंह - मोकामा के "छोटे सरकार" और भूमिहारों के रॉबिनहुड
Anant Singh caste: मोकामा के बाहुबली अनंत सिंह को लोग "छोटे सरकार" के नाम से जानते हैं। वे भूमिहार जाति से आते हैं। बिहार की कुल आबादी में भूमिहारों की संख्या भले ही करीब 2.86% हो, लेकिन राजनीति में उनकी पकड़ बेहद मजबूत है।
अनंत सिंह की छवि अपनी जाति में "रॉबिनहुड" जैसी रही है। यही वजह है कि जब भी वे चुनावी मैदान में उतरते हैं, भूमिहार वोटर बड़ी संख्या में उनके पीछे खड़े दिखाई देते हैं। आपराधिक मामलों में फंसे रहने के बावजूद उनका दबदबा कम नहीं हुआ। उनकी सीट से उनकी पत्नी नीलम देवी ने आरजेडी के टिकट पर जीत हासिल की थी। अब चर्चा है कि अनंत सिंह खुद जेडीयू के टिकट पर 2025 में चुनाव लड़ सकते हैं।
🔹 सूरजभान सिंह - मोकामा के दूसरे बाहुबली और भूमिहार पावर
Surajbhan Singh caste: सूरजभान सिंह का नाम भी बिहार की बाहुबली राजनीति में बड़ा है। वे भी भूमिहार जाति से आते हैं। 80 और 90 के दशक में उनका अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता गया। हत्या के मामलों से लेकर राजनीति में पैठ जमाने तक, सूरजभान ने अपराध से राजनीति की राह तय की।
साल 2000 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर मोकामा में दिलीप सिंह जैसे बाहुबली को हराया और 2004 में लोकसभा पहुंचे। उनकी पत्नी वीणा देवी भी मुंगेर से सांसद रह चुकी हैं। फिलहाल उनका परिवार चिराग पासवान की एलजेपी (रामविलास) के साथ एनडीए में है। सूरजभान अब खुलकर कहते हैं कि मोकामा से अनंत सिंह को हराना उनका लक्ष्य है।
🔹 सुनील पांडे -भोजपुर के बाहुबली और भूमिहार राजनीति
Sunil Pandey caste: भोजपुर जिले के बाहुबली सुनील पांडे भी भूमिहार जाति से हैं। उनका नाम तब सुर्खियों में आया जब 1998 में मुंगेर के मिर्जापुर गांव से 20 एके-47 बरामद हुए और जांच का धागा पांडे तक पहुंचा। हत्या, अपहरण जैसे कई मामलों ने उनके नाम को बाहुबली की लिस्ट में और पुख्ता किया।
हालांकि राजनीति में उन्हें कई बार हार का सामना भी करना पड़ा। लेकिन अब उनकी विरासत उनके बेटे विशाल प्रशांत ने संभाल ली है। विशाल बीजेपी से विधायक बने और उपचुनाव में जीत दर्ज कर यह साबित किया कि पांडे परिवार की पकड़ अभी भी कायम है।
🔹 आनंद मोहन - मधेपुरा के राजपूत बाहुबली
Anand Mohan caste: बिहार की राजनीति में आनंद मोहन का नाम आज भी गूंजता है। वे राजपूत जाति से आते हैं। कभी बाहुबली छवि के लिए चर्चित रहे आनंद मोहन का परिवार अब अलग-अलग पार्टियों में सत्ता समीकरण साधने में माहिर हो गया है।
उनकी पत्नी लवली आनंद जेडीयू से सांसद हैं और बेटा चेतन आनंद आरजेडी विधायक। दिलचस्प बात यह है कि चेतन ने भी हाल ही में नीतीश सरकार का समर्थन किया। यानी परिवार भले ही अलग-अलग दलों में हो, लेकिन सत्ता के समीकरण में उनकी हिस्सेदारी हमेशा बनी रहती है।
🔹 पप्पू यादव - सीमांचल का यादव फैक्टर
Pappu Yadav caste: पूर्णिया के बाहुबली नेता पप्पू यादव यादव जाति से आते हैं। उनका राजनीतिक सफर हमेशा उतार-चढ़ाव भरा रहा। उन्होंने कभी अपनी पार्टी बनाई, फिर कांग्रेस में विलय किया, बाद में निर्दलीय चुनाव लड़े और जीत भी हासिल की।
उनकी पत्नी रंजीत रंजन कांग्रेस से राज्यसभा सांसद हैं। दोनों मिलकर कांग्रेस के लिए भी सक्रियता दिखा रहे हैं। माना जा रहा है कि 2025 में पप्पू यादव कांग्रेस के साथ तालमेल करके चुनाव लड़ सकते हैं। यादव वोट बैंक में उनकी पकड़ अब भी मज़बूत है, जो महागठबंधन के लिए एक बड़ा सहारा हो सकता है।
🔸 जाति और बाहुबल: बिहार चुनाव का असली समीकरण
इन पांचों नेताओं की कहानी यह साफ करती है कि बिहार में राजनीति सिर्फ दलों की ताकत पर नहीं टिकी है, बल्कि जातीय समीकरण और बाहुबल दोनों का मिला-जुला खेल है। अनंत सिंह और सूरजभान जैसे भूमिहार बाहुबली हों, आनंद मोहन जैसे राजपूत नेता हों या फिर यादवों के बीच पप्पू यादव की पकड़-हर जाति का अपना दबदबा है और चुनावी समीकरण इन्हीं के इर्द-गिर्द घूमते हैं।












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