Bihar Chunav: वोट अधिकार यात्रा से महागठबंधन ने पलायन-रोजगार के मुद्दे को कर दिया ठंडा? समझें पूरा गणित

Bihar Chunav 2025: जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव नज़दीक आ रहा है, राजनीतिक दलों की सक्रियता और भी तेज हो गई है। सीट शेयरिंग और प्रचार रणनीति के लिए पटना से लेकर दिल्ली तक बैठकों का दौर जारी है। इस बीच इतना तय हो गया है कि एनडीए (NDA) के लिए मुद्दा, सुशासन, विकास और राष्ट्रवाद रहने वाला है। महागठबंधन वोट अधिकार यात्रा और वोट चोरी को बड़ा मुद्दा बनाने में जुटी है, लेकिन इसकी वजह से विपक्ष के दूसरे मुद्दे पीछे छूटने लगे हैं।

पिछले 3 साल से तेजस्वी यादव लगातार पलायन और रोजगार के मुद्दे पर आक्रामक रहे थे। तेजस्वी यादव खुद अब मुख्य तौर पर वोट चोरी और वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) पर ही हावी नजर आ रहे हैं। इधर प्रशांत किशोर लगातार पलायन और रोजगार को ही प्रमुख मुद्दा बना रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या महागठबंधन ने SIR और वोट चोरी पर अतिरिक्त आक्रामकता दिखाई है?

Bihar Chunav 2025

Bihar Chunav में विपक्ष ने अपने मुद्दों को खुद ही कर दिया पीछे

वोट अधिकार यात्रा का मकसद जनता को अपने अधिकारों और लोकतांत्रिक ताकत का एहसास दिलाना था। हालांकि, इस अभियान के बीच महागठबंधन ने उन मुद्दों को पीछे छोड़ दिया जो सीधे जनता की ज़िंदगी से जुड़े हैं। बिहार जैसे राज्य में पलायन और रोजगार सबसे अहम चुनावी मुद्दे रहे हैं। हालिया राजनीतिक हलचलों के बीच ये सवाल अब ठंडे पड़ते दिख रहे हैं। नौकरी के मुद्दे पर तेजस्वी ने युवा वर्ग के बीच आक्रामक अंदाज में अपनी सक्रियता दिखाई थी, लेकिन पिछले कुछ समय से वह लगातार SIR पर ही बोल रहे हैं। इसकी वजह से अब प्रचार के केंद्र में वोट चोरी का मुद्दा हावी होता जा रहा है, जबकि प्रशांत किशोर अभी भी रोजगार मांगने के सवालों पर ही टिके हुए हैं।

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Mahagathbandhan को करनी होगी जनता से जुड़े मुद्दों पर वापसी

महागठबंधन ने वोट चोरी के मुद्दे को उठाया है और इसके नाम पर अपने मतदाताओं और समर्थकों को एकजुट भी किया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों की राय है कि जनता से जुड़े मुद्दों को उठाना भी मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए जरूरी है। स्वास्थ्यय, रोजगार और पलायन ऐसे मुद्दे हैं जो आज भी बिहार की जनता से सीधे तौर पर जुड़े हैं। वोट चोरी और चुनाव में धांधली जैसे मुद्दों पर पढ़े-लिखे लोगों के बीच जितनी बात हो रही है, जमीन पर उसका प्रभाव कम है। बिहार की राजनीति के जानकारों का कहना है कि आने वाले सप्ताह में तस्वीर ज्यादा साफ हो जाएगी कि महागठबंधन कौन से मुद्दों को अपने प्रचार अभियान में प्रमुखता से जगह देंगे।

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