Bihar Chunav 2025: 'सरकार में आए तो शराबबंदी फौरन हटेगी', ऐसा कहने वालों को खान सर ने दिया करार जवाब
Bihar Chunav 2025: बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी कानून एक बार फिर सियासी बहस के केंद्र में है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एक बार फिर राज्य में शराबबंदी कानून को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। जन सुराज पार्टी के प्रमुख और चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर, भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह और लोकप्रिय शिक्षक खान सर के बयानों ने इस बहस को और गर्म कर दिया है।
प्रशांत किशोर ने हाल ही में दावा किया था कि अगर उनकी सरकार बिहार में आई तो वो एक घंटे में शराबबंदी खत्म करवा देंगे। वहीं भोजपुरी के पावर स्टार पवन सिंह ने बिहार में शराबबंदी को फेल बताया था और कहा था कि ये फैसला सही नहीं है। इतना ही नहीं HAM पार्टी के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने भी एनडीए में रहते हुए कई बार शराबबंदी को लेकर सवाल उठा चुके हैं। कुछ मौके पर वो कह चुके हैं कि थोड़ी-थोड़ी पिया करो। अब ऐसी बात करने वालों को खान सर ने करारा जवाब दिया है।

खान सर बोले- 'शराब बांटने की बात बेशर्मी है'
प्रशांत किशोर और पवन सिंह के बयानों पर मशहूर शिक्षक खान सर ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने शराबबंदी हटाने की मांग को "बेशर्मी भरी बात" करार दिया। दैनिक भास्कर के मुताबिक खान सर ने कहा, "बिहार में एक नया ट्रेंड चल पड़ा है कि सत्ता में आए तो शराबबंदी खत्म कर देंगे। ये बहुत ही शर्मनाक सोच है।''
खान सर ने शराबबंदी की तुलना एक शिक्षक की जिम्मेदारी से करते हुए कहा, "अगर मैं पढ़ाते हुए कहूं कि कल से क्लास में शराब बांटूंगा, तो क्या यह सही होगा? जैसे शिक्षक अपनी क्लास के लिए जवाबदेह होता है, वैसे ही मुख्यमंत्री अपने राज्य के लिए।" उन्होंने यह भी कहा कि, "अगर शराबबंदी हटाने की इतनी जल्दी है, तो पहले अपने बेटे को शराब पिलाकर दिखाइए।"
प्रशांत किशोर ने किया था दावा: सरकार बनी तो एक घंटे में हटेगा शराबबंदी कानून
प्रशांत किशोर ने अपनी पार्टी की ओर से राज्य की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा करते हुए दावा किया था कि 'अगर जन सुराज की सरकार बनी, तो सत्ता में आने के एक घंटे के भीतर शराबबंदी कानून हटा दिया जाएगा।'
प्रशांत किशोर ने तर्क दिया था कि बिहार में शराबबंदी केवल कागजों पर है। जमीनी हकीकत यह है कि शराब की होम डिलीवरी आम बात हो गई है। प्रशांत किशोर का कहना है कि 100 रुपये की शराब बिहार में 300 रुपये में बिक रही है, और इसके पीछे अवैध तंत्र सक्रिय है। वे इसे अपराध में बढ़ोतरी का कारण भी मानते हैं।
पवन सिंह ने शराबबंदी को लेकर क्या कहा था?
पवन सिंह ने भी हाल ही में एक इंटरव्यू में शराबबंदी पर सवाल उठाते हुए कहा कि "राज्य में पूरी तरह शराबबंदी करना सही फैसला नहीं था। इसकी एक सीमा तय करनी चाहिए थी। जो व्यक्ति उस सीमा को लांघता, उसके खिलाफ सख्त कानून होना चाहिए था।" उन्होंने शराबबंदी को व्यावहारिक न मानते हुए, इसके नुकसान की ओर भी इशारा किया था।
बिहार में शराबबंदी क्या इस बार चुनावी मुद्दा बनेगा?
बिहार में 2016 से लागू शराबबंदी का राजनीतिक असर गहरा रहा है। एक पक्ष इसे सामाजिक सुधार मानता है, तो दूसरा पक्ष इसे व्यावहारिक विफलता। प्रशांत किशोर जहां इस मुद्दे को चुनावी वादा बना रहे हैं, वहीं पवन सिंह इसे संस्कृति से जोड़कर देख रहे हैं। खान सर, जो युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं, इसे नैतिक जिम्मेदारी का सवाल मानते हैं।
जैसे-जैसे 2025 के विधानसभा चुनाव करीब आ रहे हैं, इस कानून को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। सवाल उठ रहा है-क्या शराबबंदी इस बार चुनाव का बड़ा मुद्दा बनेगा?
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 2016 में बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी। इसका मकसद महिलाओं और समाज के कमजोर वर्गों को शराब के दुष्प्रभावों से बचाना था। शुरुआत में महिलाओं और सामाजिक संगठनों से इसे व्यापक समर्थन भी मिला। लेकिन समय के साथ इसके क्रियान्वयन पर सवाल उठने लगे।
अब जमीनी सच्चाई और चुनौतियां ये हैं कि अवैध शराब का कारोबार तेजी से बढ़ा है। होम डिलीवरी जैसे ट्रेंड्स ने कानून को मजाक बना दिया है। पुलिस और प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। लेकिन महिलाएं, खासकर ग्रामीण इलाकों में, अब भी शराबबंदी की मजबूत समर्थक हैं। घरेलू हिंसा, आर्थिक बर्बादी और नशे की लत से काफी हद तक राहत मिली है, ऐसा महिलाओं का अनुभव है। समाज सुधार की दिशा में इसे साहसिक कदम माना जाता है।
महागठबंधन के लिए शराबबंदी एक संवेदनशील मुद्दा है। एनडीए इसका बचाव करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण से जोड़ सकता है।
नए दल और चेहरे, जैसे प्रशांत किशोर, इसे प्रचार अभियान का हथियार बना रहे हैं। इससे यह स्पष्ट है कि चाहे सीधा मुद्दा न बने, लेकिन शराबबंदी इस बार चुनावी विमर्श में जरूर हावी रहेगी।












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