Bihar By Election Result: कमल खिलेगा या तेज़ होगी लालटेन की रोशनी, क्या कहते हैं आंकड़े ?

By Election Result: 2020 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की तस्वीर अलग थी, वहीं उपचुनाव में तो समीकरण ही पूरी तरह बदल चुके हैं। मोकामा विधानसभा सीट पर मतदान के बाद के आकड़े से तो यही लग रहा है कि अनंत सिंह का वर्चस्व...

Bihar By Election Result: बिहार में तख्ता पलट होने के बाद दो विधानसभा सीटों पर गुरुवार को मतदान हुई। गोपालगंज में 51.48 फीसद मतदान हुआ तो वहीं मोकामा में 53.48 फीसद मतदान हुआ है। उपचुनाव में मतदान के संपन्न होने के साथ ही प्रत्याशियों की क़िस्मत ईवीएम में क़ैद हो गई। अब सभी दलों के उम्मीदवारों को 6 नवंबर का इंतज़ार है। मतगणना के साथ ही पता चल जाएगा की कमल खिला या लालटेन की रोशनी तेज़ हुई या दूसरे दलों के प्रत्याशियों ने बाज़ी मारी। वहीं सियासी समीकरण देखते हुए राजद और भाजपा के बीच ही टक्कर देखने को मिल रही है।

खिलेगा कमल या जलेगा लालटेन ?

खिलेगा कमल या जलेगा लालटेन ?

2020 के विधानसभा चुनाव में प्रदेश की तस्वीर अलग थी, वहीं उपचुनाव में तो समीकरण ही पूरी तरह बदल चुके हैं। मोकामा विधानसभा सीट पर मतदान के बाद के आकड़े से तो यही लग रहा है कि अनंत सिंह का वर्चस्व बरक़रार रहने वाला है। वहीं गोपालगंज विधानसभा सीट पर फिर से भाजपा का ही क़ब्ज़ा होता हुआ नज़र आ रहा है। मोकामा विधानसभा सीट पर अनंत सिंह का झंडा बुलंद रहा है, तो वहीं गोपालगंज विधानसभा सीट पर भाजपा जीत का परचम लहराती रही है।

गोपालगंज सीट पर रहा है भाजपा का क़ब्ज़ा

गोपालगंज सीट पर रहा है भाजपा का क़ब्ज़ा

बिहार के सियासी समीकरणों की बात करें तो भाजपा और राजद के बीच ही क्लोज़ फ़ाइट है। उपचुनाव में राजद प्रत्याशी को महागठबंधन में शामिल दलों का समर्थन है तो वहीं भाजपा ने अकेले ही चुनावी मोर्चा के दंगल संभाला है। आइए अब दोनो विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव के समीकरणों पर बात करते हैं। गोपालगंज विधानसभा सीट के समीकरण की बात करें तो, यह सीट भाजपा के कब्जे में थी। सुभाष सिंह के निधन के बाद यह सीट खाली हुई थी। वहीं भाजपा ने मास्टर स्ट्रोक लगाते हुए कुसुम देवी (सुभाष सिंह की पत्नी) को टिकट देकर चुनावी दंगल में उतारा। कुसुम देवी (भाजपा प्रत्याशी) के खिलाफ़ राजद ने मोहन प्रसाद गुप्ता को टिकट दिया।

9 उम्मीदवारों ने खेला चुनावी दांव

9 उम्मीदवारों ने खेला चुनावी दांव

गोपालगंज विधानसभा सीट पर उपचुनाव में 9 उम्मीदवारों ने चुनावी दांव खेला है। जिसमें भाजपा और राजद के बाद मुख्य चेहरा इंदिरा यादव (साधू यादव ने अपनी पत्नी) बसपा से चुनावी मैदान में उतरी। वहीं एआईएमआईएम की टिकट पर अब्दुल सलाम ने चुनावी बिगुल फूंका है। बसपा और एआईएमआईएम के प्रत्याशियों से भाजपा को ज्यादा फ़र्क नहीं पड़ा लेकिन राजद के समीकरण ज़रूर प्रभावित हुए हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि 2020 के विधानसभा चुनाव में गोपालगंज सीट से साधू यादव ने खुद किस्मत आज़माई थी और वह दूसरे नंबर पर रहे थे। इस बार उनकी पत्नी इंदिरा यादव ने चुनावी मैदान में हैं, साधू यादव के नाम पर उनके पक्ष में काफी मतदान हुए। जो कि तेजस्वी यादव (राजद) के वोट बैंक के लिए नुकसानदेह रहा।

भाजपा उम्मीदवार की हो सकती है जीत

भाजपा उम्मीदवार की हो सकती है जीत

गोपालगंज के 47 हज़ार यादव मतदाताओं के वोट बैंक में साधू यादव की सेंधमारी हुई जिससे सीधा फायदा भाजपा को पहुंचा है। इसके अलावा गोपालगंज में 65 हज़ार मुस्लिम मतदाताओं की तादाद है। जो कि विनिंग फैक्टर माने जाते हैं। एआईएमआईएम ने मुस्लिम मतदाताओं के वोट बैंक का ध्रुवीकरण किया है।एआईएमआईएम प्रत्याशी अब्दुल सलाम मुखिया रहे चुके हैं, इसके साथ ही ग्राउंड लेवल पर उनकी पकड़ अच्छी है। जिस वजह से राजद के जातीय और धार्मिक समीकरण भी गोपालगंज में फेल होते हुए नज़र आ रहे हैं। इन सबके अलावा राजद प्रत्याशी मोहन प्रसाद गुप्ता की क्षेत्र में शराब माफिया की छवि रही है। वहीं भाजपा प्रत्याशी कुसुम देवी को सहानुभूति के नाम पर भी वोट मिला है। पूरे आंकड़ों की बात करें तो राजद के वोटों का ध्रुवीकरण हुआ है, वहीं भाजपा का पक्ष मजबूत नज़र आ रहा है। इसलिए गोपालगंज सीट पर भाजपा के जीत दर्ज करने की संभावनाएं ज्यादा दिख रही हैं।

अनंत सिंह का रहा है वर्चस्व

अनंत सिंह का रहा है वर्चस्व

गोपालगंज के सियासी समीकरण के बाद अब मोकामा विधानसभा सीट के समीकरण की भी आपको जानकारी दे रहे हैं। मोकामा का सियासी इतिहास रहा है कि यहा दल कोई भी हो प्रत्याशी भूमिहार ही जीत दर्ज करता रहा है। यहां मतदाताओं की कुल तादाद 2,70,755 है, यहां सिर्फ़ भूमिहारों का ही वर्चस्व रहा है। इसके अलावा कोई और विनिंग फ़ैक्टर है ही नहीं। वैसे मतदातों की बात करें तो यहां भूमिहार समुदाय के अलावा ब्राह्मण, कुर्मी, यादव, पासवान, राजपूत और रविदास समुदाय भी है। अभी तक की तस्वीर से यही दिखा है कि सवर्ण वोट जिस प्रत्याशी को मिलता है वहीं यहां से जीत दर्ज करता है। यही वजह है कि मोकामा सीट से अनंत सिंह चार बार से झंडा बुलंद करते आ हे हैं। सज़ायाफ्ता होने की वजह से उनकी सदस्यता ख़त्म हो गई जिस वजह से यहां उपचुनाव हुआ।

राजद और भाजपा उम्मीदवार के बीच टक्कर

राजद और भाजपा उम्मीदवार के बीच टक्कर

अनंत सिंह की सदस्यता जाने की वजह से खाली हुई मोकामा सीट पर राजद ने मास्टर स्ट्रोक खेलते हुए नीलम देवी (अनंत सिंह की पत्नी) को चुनावी दंगल में उतारा। वहीं भाजपा ने सोनम देवी (ललन सिंह की पत्नी) को टिकट दिया। अनंत सिंह के बाद मोकामा में ललन सिंह का दबदबा माना जाता रहा है, वह कई बार मोकामा विधानसभा सीट से दांव आजमा चुके हैं लेकिन कभी कामयाबी हासिल नहीं हुई है। मोकामा विधानसभा सीट पर हुए उप चुनाव में छह उम्मीदवारों ने चुनावी दांव खेला है लेकिन टक्कर राजद और भाजपा उम्मीदवार के बीच ही है।

राजद उम्मीदवार की हो सकती है जीत

राजद उम्मीदवार की हो सकती है जीत

राजद की तरफ से नीलम देवी (अनंत सिंह की पत्नी) और भाजपा की तरफ से सोनम देवी (ललन सिंह की पत्नी) दोनों ही भूमिहार समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। भाजपा ने 27 साल बाद मोकामा सीट पर सोनम देवी के नाम पर चुनावी चाल चली है। इससे पहले एनडीए गठबंधन की तरफ से जदयू और लोजपा के उम्मीदवार चुनावी बिगुल फूंकते रहे हें। भाजपा ने मोकामा सीट पर जीत दर्ज करने के लिए पूरी ताक़त झोंक दी लेकिन मतदान के बाद के आंकड़े अनंत सिंह के फेवर में जाता दिख रहा है। अनंत सिंह सिंह फैक्टर और यादव वोटर के समीकरण ने नीलम देवी के लिए फायदेमंद साबित हुआ है। भाजपा उम्मीदवार सोनम देवी और राजद उम्मीदवार नीलम देवी के बीच क्लोज़ फाइट हुई है लेकिन जीत राजद उम्मीदवार की मानी जा रही है।

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