चौबे गए छब्बे बनने....बिहार में मुकेश सहनी के साथ हो गया खेला, मांझी को भी झटका! नया समीकरण समझिए
पटना, 23 मार्च: बिहार में भारतीय जनता पार्टी ने वीआईपी के नेता और नीतीश सरकार में मंत्री मुकेश सहनी के साथ खेला कर दिया है। उनकी पार्टी के विधानसभा में तीन ही विधायक बचे हुए हुए थे और वे भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। इन्हीं विधायकों के दम पर सहनी लगातार सरकार को परेशानी में डालने वाले संकेत दे रहे थे। खासकर नीतीश सरकार की बड़ी सहयोगी बीजेपी से उनकी तल्खी काफी बढ़ चुकी थी। वह यूपी चुनाव तक में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवारों के खिलाफ प्रत्याशी उतार आए थे और बिहार में एमएलसी चुनाव में भी ऐसा ही कर रहे थे। बिहार में बोचहां विधानसभा उपचुनाव में जिस तरह से बीजेपी ने भी अपने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया, तभी लग गया था कि सहनी गठबंधन में ज्यादा दिन तक नहीं टिक पाएंगे। लेकिन, वीआईपी विधायकों के बीजेपी में शामिल होने से न केवल राज्य में सत्ता का गणित बदल गया है, बल्कि जीतन राम मांझी को भी राजनीतिक करंट लग चुका है।

बिहार में मुकेश सहनी के साथ हो गया खेला
खुद को 'सन ऑफ मल्लाह' कहने वाले विकासशील इंसान पार्टी सुप्रीमो मुकेश सहनी का बिहार एनडीए में भविष्य वैसे भी 16 अप्रैल को तय होने वाला था, लेकिन उससे पहले ही उनके पार्टी के बाकी बचे तीनों विधायकों ने भारतीय जनता पार्टी का कमल थाम लिया है। दरअसल, 12 अप्रैल को मुजफ्फरपुर जिले की बोचहां विधानसभा का उपचुनाव होना है, जहां बीजेपी और वीआईपी दोनों ने उम्मीदवार खड़े किए हैं। यह सीट वीआईपी के मुसाफिर पासवान के निधन से खाली हुई है। 2020 के विधानसभा चुनाव में वीआईपी चार सीटों पर चुनाव जीती थी और इसी के दम पर सहनी नीतीश सरकार में मंत्री बने। अबतक नीतीश की अगुवाई वाली जेडीयू और बीजेपी गठबंधन की सरकार में सहनी के विधायकों के समर्थन की बहुत दरकार थी। लेकिन, हाल में सहनी भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से भी 'वीवीआईपी' वाले अंदाज में बात करने लगे थे।

मुकेश सहनी के साथ खेला होने के 5 कारण
पहला कारण तो यह है कि मुकेश सहनी की लगातार आरजेडी से सेटिंग होने की खबरें आ रही थीं। उन्होंने यहां तक कहा था कि लालू यादव की बात मान लिए होते तो अच्छा होता। वह डिप्टी सीएम बनने का भी ख्वाब शुरू से जताते रहे हैं। विपक्ष के पास 115 विधायकों का समर्थन है। और तो विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी कई बार राज्य में सत्ता की कहानी पलटने का दम भरते रहे हैं। दूसरा कारण ये है कि सहनी एमएलसी चुनाव में भी भाजपा के आधिकारिक प्रत्याशियों के खिलाफ चुनौती पेश करने की स्थिति पैदा कर रहे थे। तीसरा, उन्होंने हाल में संपन्न हुए यूपी विधानसभा चुनाव में भी अपने 57 उम्मदीवार उतार दिए थे और यूपी के निषाद समाज में अपनी जमीन तैयार करने की कोशिश में थे। चौथा, यूपी में अपना जनाधार बढ़ाने के चक्कर में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला करना नहीं छोड़ा। पांचवां, उन्होंने यूपी की योगी सरकार को भी निशाने पर रखा।

जीतन राम मांझी को भी लगा झटका!
मुकेश सहनी के बहाने भारतीय जनता पार्टी ने हिंदुस्तान आवाम मोर्चा के चीफ और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी को भी झटका दे दिया है। नीतीश सरकार अबतक इन दोनों दलों के सहयोग के दम पर ही सत्ता में टिकी रही है। लेकिन, वीआईपी विधायकों को मिलाकर भाजपा ने गठबंधन की ताकत बढ़ा ली है। सहनी वाली घटना के बाद एनडीए सरकार में मांझी का बार्गेनिंग पॉवर कम हुआ है। बदला हुआ सियासी समीकरण आगे समझते हैं।

बिहार में सत्ता का नया समीकरण
अब हम आपको बिहार विधानसभा का मौजूदा समीकरण बता दें। 243 विधायकों वाली बिहार विधानसभा में अभी बोचहां सीट (सुरक्षित) वीआईपी के विधायक के निधन की वजह से खाली है। सामान्य बहुमत के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार को 122 विधायकों का समर्थन चाहिए। जबकि सत्ताधारी गठबंधन के पास बीजेपी-74, जेडीयू-43, एलजेपी-1 (जदयू में शामिल), जीतन राम मांझी के हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा-4 और निर्दलीय-1 का समर्थन हासिल है। वीआईपी के 3 विधायक भी सरकार में शामिल हैं। यानी ये तीनों बीजेपी में शामिल हुए हैं तो भाजपा विधायकों की संख्या- 77 हो गई है। इस तरह से बीजेपी-77,जेडीयू-43+1+1 (निर्दलीय)=122 यानी (जादुई) आंकड़े इतने में ही पूरे हो जाते हैं। मांझी के 4 विधायक अब अतिरिक्त हो चुके हैं। वैसे सरकार को कम से कम 127 विधायकों का समर्थन प्राप्त है।












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