शादी के बाद ही टूट गया था परिवार, 15 सालों से थी पति को पाने की आस, कोर्ट में चली 11 साल लड़ाई
साल 2008 में दहेज़ उत्पीड़न, घरेलु हिंसा और बच्चा नुकसान कराने की शिकायत शिकारपुर थाने में दर्ज की गई। इस मामले में सभी आरोपियों को जेल की हवा भी खानी पड़ी।

Bettiah News: प्रेम प्रसंग और प्रेम विवाह की आपने कई खबरें पढ़ीं होंगी। आज हम आपको एक ऐसी खबर से रूबरू करवा रहे हैं, जिसे पढ़कर आप भी कहेंगे की क्या कोई इतने सालों तक इंतज़ार कर सकता है। बिहार के बेतिया निवासी माला कुमारी ने अपने पति को पाने के लिए 15 सालों तक इतज़ार किया। इतन ही नहीं 11 सालों तक कोर्ट में लड़ाई भी लड़ी। शादी के 1 साल भी पूरे नहीं हुए थे, कि माला पर उसका पति ज्यादती करना शुरू कर दिया। शादी के करीब 1 साल पूरे हुए तो उसे घर से निकाल दिया। माला 15 सालों से पति के नाम का सिंदूर मांग में भरते हुए पति के वापस आने का इंतज़ार कर रही थी।

अदालत में 11 साल लगातार लड़ाई लड़ने के बाद आखिर उसे इंसाफ़ मिल ही गया। परिवार न्यायालय के फैसले ने सुजीत (माला का पति) की शादी शुन्य करने के परिवाद को खारिज कर दिया है। प्रधना न्यायाधीश ने माला के हक में फ़ैसला सुनाया है। कोर्ट के फ़ैसले के बाद माला को उम्मीद है कि अब उसे अपने पति का साथ मिलेगा। पहले की तरह उसके साथ ज्यादती नहीं की जाएगी। आपको बता दें कि 25 जून 2007 को माला कुमारी (बड़गो, रामनगर थाना क्षेत्र निवासी) की शादी बृजकिशोर मिश्र (हरपुर बड़निहार, नरकटियागंज थाना क्षेत्र निवासी) के बेटे सुजीत कुमार मिश्र के साथ हुई थी। सुजीत पेश से शिक्षक है। शादी के कुछ दिनों तक तो सबकुछ सही चला लेकिन बाद में ससुराल वालों ने माला को प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

शादी के 1 साल बाद माला को उन लोगों ने घर से निकाल दिया। जिसके बाद माला के घर वालों ने सुजीत (माला का पति) के परिजनों को समझाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नहीं मानें। साल 2008 में दहेज़ उत्पीड़न, घरेलु हिंसा और बच्चा नुकसान कराने की शिकायत शिकारपुर थाने में दर्ज की गई। इस मामले में सभी आरोपियों को जेल की हवा भी खानी पड़ी। बेल मिलने के बाद वह लोग स्थानीय न्यायालय से केस जीत गए। इसके बाद लड़की पक्ष ने हाईकोर्ट में अपील की। 2009 में मेंटेनेंस केस भी किया।
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मेंटेनेंस केस करने के बाद न्यायालय ने आरोपी को 6 हजार रुपये हर महीना लड़की को देने का आदेश सुनाया। अदालत के फ़ैसले पर लड़का पक्ष ने परिवार न्यायालय में मैरेज डिनाईवाद/ शादी शून्य करने का एक वाद दायर किया। इस मामले पर सुनवाई करते हुए अदालत ने लड़का पक्ष के परिवाद को खारिज कर दिया। व्यवहार न्यायालय के वरीय अधिवक्ताओं ने बताया कि दहेज प्रताड़ना और मेंटेनेंस केस होने के बाद लड़का पक्ष परिवार न्यायालय में विदागरी वाद (मेट्रो मोनियल) दायर करता है। इसी शादी शुन्य करने को डिनाई वाद भी कहते हैं।
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