Banana Man Bihar: कौन हैं रामेश्वर सिंह जिन्हें मिली ये उपाधि, कृषि पद्धति के कायल हैं लोग
Banana Man Bihar रामेश्वर सिंह ने शुरुआत में कम जगह में जैविक खेती का प्रयोग किया, रिजल्ट अच्छा मिलने पर उनका मनोबल बढ़ा और वह जैविक खेती पर ही ज़ोर देने लगे जिससे केला उत्पादन के साथ-साथ क्वालिटि भी अच्छी होती चली गई।
Banana Man Bihar: बेरोज़गारी की समस्या से देश के ज़्यादातर लोग जूझ रहे हैं, वहीं कुछ लोग नौकरी छोड़ कर खेती की तरफ़ रुख कर रहे हैं। इतना ही नहीं खेती कर उन्हें लाखों रुपये का मुनाफा भी हो रहा है। हम बात कर रहे हैं 'बनाना मैन बिहार' रामेश्वर सिंह के बारे में जिन्होंने नौकरी को छोड़ कर केले की खेती करने का फ़ैसला लिया। इस फ़ैसले उन्हें मुनाफा तो हुआ साथ 'बनाना मैन बिहार' के नाम से उनकी पहचान भी बन गई। छठ महापर्व की शुरुआत हो चुकी है, इस पर्व में केले की अहमियत और ज्यादा बढ़ जाती है। इसलिए आज हम आपको'बनाना मैन बिहार' के बारे में बताने जा रहे हैं।

केला की खेती के मुरीद हुए लोग
रामेश्वर सिंह ने जैविक खेती कर लोगों को अपना मुरीद बना लिया है। वह अपनी कृषि तकनीक के ज़रिए केले की खेती में महारत हासिल कर चुके हैं। इनके केले की बाज़ार में डिमांड काफी है, इसकी सबसे बड़ी वजह जैविक खेती है। क्योंकि फर्टिलाइजर से तैयार किये गए केले पांच दिनों मे ही खराब होने लगते हैं। वहीं जैविक पद्धति से तैयार किए गए केले 2 सप्ताह से ज्यादा दिनों तक अच्छे रहते हैं। सारण (छपरा) निवासी रामेश्वर सिंह के खेती को देखने के लिए कृषि विशेषज्ञ भी जाते हैं। लोकल मार्केट में रामेश्वर सिंह की अलग ही पहचान बन गई है।

300 रुपये प्रति घवद बिक रहा केला
रामेश्वर सिंह की मानें तो करीब 800 केले के घवद (घौर) दुर्गापूजा से लेकर छठ तक काटे जा चुके हैं। 1 हज़ार घवद (घौर) खेत में लगे हुए हैं, जिनक कटाई विभिन्न अवसरों पर होगी। दुर्गा पूजा औऱ दिवाली के मौक़े पर 250 रुपये प्रति घवद केले की बिक्री हुई तो वहीं छठ पूजा के मौक़े पर 300 रुपये प्रति घवद की बिक्री हो रही है। इन त्यौहारों के दौरान करीब 2.50 लाख रुपये के केले की बिक्री हुई है। यह तो हुई रामेश्वर सिंह के केले के कारोबार की बात अह हम आपको उनके संघर्ष की कहानी बताने जा रहे हैं।

नौकरी छोड़ कर शुरू की खेती
रामेश्वर सिंह पेट्रोलियम विभाग में काम करते थे, लेकिन उन्होंने खेती की वजह से नौकरी छोड़ दी। गांव पहुंचकर उन्होंने जैविक विधि के जरिए केले की खेती शुरू की जिससे ने उन्हें मुनाफा हुआ। एक साल में वह केले की खेती से 10 लाख रुपये तक कमाने लगे। इसी से उन्हें लोग 'बनाना मैन बिहार' से जानने लगे। रामेश्वर सिंह ने जब नौकरी छोड़ कर खेती शुरू की थी तो लोग उनका मज़ाक बनाते थे। ताना मारते हुए कहते थे कि शहर की नौकरी छोड़कर गांव में खेती कर रहा है। रामेश्वर सिंह ने सबकी बातों को अनसुना करते हुए पारंपरिक खेती को बदलते हुए जैविक खेती पर ध्यान दिया।

केले की खेती से हो रहा लाखों का मुनाफ़ा
रामेश्वर सिंह ने शुरुआत में कम जगह में जैविक खेती का प्रयोग किया, रिजल्ट अच्छा मिलने पर उनका मनोबल बढ़ा और वह जैविक खेती पर ही ज़ोर देने लगे जिससे केला उत्पादन के साथ-साथ क्वालिटि भी अच्छी होती चली गई। आपको बता दें पारंपरिक खेती से साल में एकी ही बार केले का उत्पादन कर सकते हैं, लेकिन जैविक खेती के ज़रिए रामेश्वर साल में दो बार केले की उपज का फायदा उठाते थे। साधारण तौर पर केले की खेती 6 फीट की दूरी पर की जाती है। वहीं जैविक खेती में 3 फीट की दूरी पर फसल उगाया जा सकता है। ऐसा करने के लिए खास रिसर्च के बाद 3 फीट पर केले की बुआई की जाती है। ऐसा करने से साल में दो बार केले की उपज होती है।
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