Murder Mystery: पूर्व विधायक के बेटे की हत्या का 'Love Connection', अलग-अलग बातें कर रहे हैं ग्रामीण

Aurangabad EX-MLA Son Murder: शुक्रवार की रात पूर्व विधायक रविंद्र सिंह के बेटे दिवाकर की हत्या कर दी गई थी। प्रेम प्रसंग की वजह से हत्या की भी बात कही जा रही है।

Aurangabad Arwal Ex MLA Ravindra Singh Son Diwakar Murder Case Twist News In Hindi

Aurangabad Love Crime: रविंद्र सिंह (पूर्व विधायक, अरवल) के बेट की हत्या के बाद तरह-तरह की बातें हो रही हैं। वहीं उषा शरण (दिवाकर की मां) ने दिवाकर के प्रेम प्रसंग का खुलासा किया है। इस वजह से भी हत्या की आशंका जताई जा रही है।

उषा शरण ने बताया कि दिवाकर का एक लड़की के साथ प्रेम प्रसंग चल रहा था। वह उस लड़की से शादी भी करना चाहता था। लड़की के परिजन भी तैयार थे। हिच्छा बिगहा गांव में ही लड़की का ननिहाल है। एक बात को लेकर विवाद हो गया।

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    लड़की के परिजनों ने दिवाकर के पिता से शर्त रखी थी कि शादी के पटना में ज़मीन खरीद कर दोनों को वहीं रखेंगे। इस पर रविंद्र सिंह (पूर्व विधायक, अरवल) ने पैसे नहीं होने की बात कह कर बात टाल दी। इसी बात के बाद दोनों के बीच विवाद हो गया। इसके बाद वह बेटे को लड़की से दूरी बनाने की हिदायत दी थी।

    विवाद बढ़ने के बाद रविंद्र सिंह ने अपने बेटे की शादी से इनकार कर दिया था। अरवल विधानसभा क्षेत्र पूर्व विधायक रविन्द्र सिंह का जनता ने विरोध किया, जिसके बाद राजद से 2020 के चुनाव में उसे टिकट नहीं मिला। पिता को टिकट नहीं मिलने पर बेटे दिवाकर ने निर्दलीय चुनावी ताल ठोकी, लेकिन हार गए।

    चुनाव में हारने के बाद दिवाकर गांव में ही रहकर खेतीबाड़ी से ज़िदगी गुज़ार रहा था। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व विधायक अपने घर से मतलब नहीं रखते हैं। वह ज़्यादातर वक्त पटना में ही गुज़ारते हैं। इस वजह से उन्होंने गांव के घर का सही ढंग से निर्माण भी नहीं करवाया।

    गांव आने पर भी वह अपने घर पर नहीं बल्कि दूसरे के घर रुकते हैं। वहीं पूर्व विधायक पर दूसरी महिला से अफेयर का भी आरोप लग चुका है। इसी वजह से वह गांव में अपने घर पर नहीं रुकते हैं। साल 1972 में रविंद्र सिंह की शादी उषा शरण से हुई थी। इन दोनों के दो बेटे शशिकांत प्रभाकर और कुमार गौरव (दिवाकर) था। दिवाकर छोटा बेटा था, उसकी की हत्या हुई है।

    उषा शरण को 1995 में तत्कालीन जनता दल (राष्ट्रीय जनता दल) ने चुनाव लड़ने के लिए टिकट दिया था। उषा शरण ने खुद चुनावी ताल नहीं ठोंकी, बल्कि अपने पति को उम्मीदवार बनाया। रविन्द्र सिंह ने चुनाव लड़ते हुए जीत दर्ज की। 2015 में रविन्द्र सिंह ने दोबारा जीत दर्ज की।

    रविंद्र सिंह की पत्नी उषा शरण की मानें तो वह पहली बार विधायक बनने के बाद से ही रविन्द्र सिंह का उनके प्रति ठीक नहीं था। उषा शरण ने उनके अफेयर का विरोध किया तो तालाक की धमकी दी जाती थी। साल 2000 में इन्हीं सब बातों से परेशान होकर अलग रहने लगी। वहीं उन्होंने कहा की कई बार उनकी हत्या की भी कोशिश की गई। ग्रामीणों की मानें तो प्रेम प्रसंग की वजह से ही उसकी हत्या हुई है।

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