Bihar Chunav 2025: सीट बंटवारे से नाराज़ LJPR, NDA में ‘CM चेहरे’ की नई चुनौती, क्या बिगड़ेगा सियासी समीकरण?
Bihar Chunav 2025: बिहार की राजनीति हमेशा से समीकरणों और गठबंधन की खींचतान के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सीट बंटवारे का पहला खाका सामने आया है, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने नया राजनीतिक पत्ता खोल दिया है। महज 20 सीटें मिलने के बाद पार्टी ने न सिर्फ असहमति जताई है, बल्कि मुख्यमंत्री पद पर भी दावा ठोंक दिया है।
चिराग पासवान के बहनोई और पार्टी के बिहार प्रभारी अरुण भारती का यह बयान कि "बिहार के अगले मुख्यमंत्री चिराग पासवान होंगे," इस बात का संकेत है कि लोजपा (रामविलास) अब अपनी राजनीतिक हैसियत को और ऊँचाई पर ले जाने की रणनीति बना रही है।

सवाल यह उठता है कि जब कुछ ही दिन पहले तक चिराग नीतीश कुमार के नेतृत्व को स्वीकार कर चुके थे, तो अचानक इस दावेदारी का क्या अर्थ निकाला जाए? दरअसल, यह कदम दोहरे मकसद से जुड़ा दिखता है। पहला, सीट बंटवारे में दबाव की राजनीति। लोजपा (र) ने पहले 43 से 137 सीटों की मांग रखी थी।
केवल 20 सीटें मिलने के बाद उसे अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों को यह संदेश देना ज़रूरी हो गया कि वह समझौता करने वाली पार्टी नहीं है। दूसरा, यह भविष्य की राजनीति के लिए आधार तैयार करने का प्रयास है। चिराग पासवान खुद को लालू यादव और नीतीश कुमार की तरह लंबे समय तक राज्य की राजनीति का नेतृत्व करने योग्य नेता के रूप में स्थापित करना चाहते हैं।
हालांकि, गठबंधन के अन्य दलों ने साफ़ कर दिया है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई भ्रम नहीं है और NDA की ओर से उम्मीदवार केवल नीतीश कुमार ही होंगे। ऐसे में लोजपा का यह रुख गठबंधन के भीतर मतभेद की स्थिति भी पैदा कर सकता है। बिहार की जनता इस घटनाक्रम को ध्यान से देख रही है। क्या चिराग पासवान यह दांव लंबी दूरी की राजनीति के लिए खेल रहे हैं, या यह केवल सीटों की संख्या बढ़ाने का दबाव बनाने का साधन है?
आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा। फिलहाल इतना तय है कि लोजपा (रामविलास) ने NDA की सहज राजनीति को फिर से पेचीदा बना दिया है। असली चुनौती चिराग पासवान के लिए यही होगी कि क्या वे अपनी महत्वाकांक्षा और गठबंधन धर्म के बीच संतुलन बना पाते हैं या यह टकराव उनकी पार्टी को अलग राह पर ले जाएगा।












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