अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव में मधुरेंद्र ने रेत पर बनायी भारत की सबसे बड़ी रबड़ डैम, खूब हो रही तारीफ़
Sand Artist Madhurendra News: अंतर्राष्ट्रीय ज्ञान, मोक्ष और ज्ञान के धरती से प्रसिद्ध गया जिले के बोधगया में शुक्रवार को कालचक्र मैदान में तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव का शानदार आगाज हुआ। वहीं हर खास अवसरों पर अपनी कला प्रदर्शन करने को लेकर पूरे दुनियांभर में सुर्खियां बटोरने वाले मधुरेंद्र ने एक बार फिर अपना जलवा बिखेरा
बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले के घोड़ासहन बनकटवा प्रखंड के बिजबनी गांव निवासी विश्वविख्यात युवा रेत कलाकार मधुरेंद्र कुमार ने बेहतरीन कला का जौहर बिखेरा। उन्होंने देश विदेश तथा कई प्रदेशों से आने वाली सैलानियों के स्वागत में अपनी कलाकृति बनाई।

सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र ने दो दिनों के कठिन मेहनत के बाद भारत की सबसे बड़ी गयाजी रबड़ डैम को 10 फिट ऊंची बालू पर भव्य तस्वीर बनाकर, लिखा हर घर गंगा का जल। यह कलाकृति आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। लोग अपने अंदाज में सेल्फी लेते नजर आ रहें है।
बता दें कि सैंड आर्टिस्ट मधुरेंद्र महत्वपूर्ण तिथियों, देश तथा विदेशों में हुए प्राकृतिक घटनाओं व जवलंत विषयों पर तुरंत अपनी कला प्रदर्शन कर समाज को एक नया संदेश देते रहते हैं। वह अपनी रेत कला के बदौलत राज्य के हर बड़े समारोह से लेकर विदेशों में भी पहचान स्थापीत करने में कामयाबी हासिल कर बिहार का नाम अंतराष्ट्रीय फलक पर रौशन की हैं।
गौरतलब हो की पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने भी वर्ष 2012 में मधुरेंद्र की कलाकृति की सराहना की थी। इसके अलावा निर्वाचन आयोग और स्वच्छ सर्वेक्षण के ब्रांड अम्बेसडर रह चुके सैंड आर्टिस्ट मधुरेन्द्र कुमार को इंटरनेशनल सैंड आर्ट फेस्टिवल अवार्ड, मगध रत्न, युथ आईकॉन अवार्ड, बिहार गौरव, चंपापरण रत्न, वैशाली गणराज्य सम्मान, आम्रपाली पुरस्कार, समेत सैकड़ो राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार से सम्मानित भी किया जा चुका है।
मौके पर उपस्थित जिले के प्रभारी सह सूचना प्रौद्योगिकी के मंत्री मो इसराइल मंसूरी, कृषि मंत्री कुमार सर्वजीत, सहकारिता मंत्री सुरेंद्र प्रसाद यादव, गया सांसद विजय कुमार, पूर्व सीएम सह इमामगंज विधायक जीतन राम मांझी, नगर विधायक डॉ प्रेम कुमार, गया आईजी छत्रनील सिंह, पर्यटन विभाग के सचिव अभय कुमार सिंह, जिलाधिकारी डॉ त्याग राजन, एसपी आशीष भारती समेत अन्य देशों में श्रीलंका, म्यांमार, वियतनाम, कामोडिया, इंडोनेशिया, जापान व नेपाल आये बौद्धिस्ट मेहमानों समेत सैकड़ों स्थानीय आम लोगों ने भी मधुरेन्द्र की कलाकृति की सराहना करते बधाई दी।












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