बिहार: छोटा सा दुकान चलाकर पिता करते हैं ज़िंदगी बसर, बेटे ने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर किया देश का नाम रोशन
अररिया के छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले गुफरान ने एथलेटिक्स इंटरनेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपने देश ही नहीं बल्की गांव को भी अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई है।
अररिया, 31 अगस्त 2022। बिहार के लाल अकसर ही देश और प्रदेश का नाम अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करते नज़र आ जाते हैं। बिहार की धरती से कई आईएएस, आईपीएस और विभिन्न क्षेत्रों में लालों ने योगदान दिया है। वहीं अब छोटे से गांव के खिलाड़ी भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश के नाम गोल्ड मेडल ला रहे हैं। आज हम आपको बताने जा रहे हैं अररिया ज़िले के सिकटी के रहने वाले युवक गुफरान के बारे में, जो कि 10वीं के छात्र हैं। उके गांव में आज भी स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी है। इसके बावजूद 18 वर्षीय गुफरान ने एथलेटिक्स इंटरनेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल हासिल कर देश का नाम रोशन किया है।

400 मीटर मैराथन में जीता गोल्ड मेडल
अररिया के छोटे से गांव से ताल्लुक रखने वाले गुफरान ने एथलेटिक्स इंटरनेशनल चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर अपने देश ही नहीं बल्की गांव को भी अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई है। आपको बता दें कि नेपाल के पोखरा में 19 अगस्त को एथलेटिक्स इंटरनेशनल चैंपियनशिप का आयोजन हुआ था। जिसमें गुफरान ने 400 मीटर मैराथन में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। ग़ौरतलब है कि गुफरान पहले भी 400 मीटर मैराथन में गोल्ड मेडल जीत चुका है। एथलेटिक्स नेशनल चैंपियनशिप में जुलाई 2022 में नई दिल्ली में आयोजित चैंपियनशिप में गोल्ड जीता था। फिर गुफरान ने अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा की तैयारी में जुट गया और उसकी मेहनत रंग लाई।

छोटा सा दुकान चलाते हैं गुफरान के पिता
गुफरान अररिया के मोमिन टोला गांव (खोरागाछ वार्ड नंबर 12, सिकटी प्रखंड) के निवासी हैं। इस गांव में आज भी लोग मौलिक सुविधाओं से दूर हैं। गुफरान के परिवार की बात की जाए तो उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं है, पिता सिराज अंसारी घर पर ही छोटा सा दुकान चलाकर ज़िदगी गुज़र बसर करते हैं। वहीं मां सबरुन खातुन गृहिणी हैं। परिवार के सदस्यों की बात की जाए तो गुफरान के आठ भाई हैं, जिसमें वह (गुफरान) चौथे नंबर पर हैं।

'पढ़ाई के साथ-साथ खेलकूद में भी थी दिलचस्पी'
गोल्ड मेडल विजेता गुफरान के बड़े भाई मुख्तार अंसारी ने बताया बचपन से ही वह काफी ज़हीन था। वह बचपन से ही देश का नाम रोशन करने की बात करता था। धीरे-धीरे वह कामयाबी की बुलंदियों को छू रहा है। गुफरान के बारें में स्थानीय लोग बताते हैं कि वह शुरु से लगनशील रहा है। वह सबसे पहले स्कूल आता रहा है, पढ़ाई के साथ-साथ उसकी खेलकूद में भी काफ़ी दिलचस्पी रही है। गुफरान ने गोल्ड मेडल जीत कर देश का नाम रोशन तो किया ही है, साथ ही समाज को भी गौरवांवित किया है।

इंटरनेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में जीता गोल्ड मेडल
गुफरान की प्रारंभिक शिक्षा मध्य विद्यालय मोमिन टोला खोरागाछ से हुई। अभी वह उच्च विद्यालय बरदाहा से दसवीं बोर्ड की तैयारी कर रहे हैं। जब वह आठवी कक्षा में थे तो आर्मी में जाना के लिए तैयारी कर रहे थे। एक दिन वह अररिया आए को पता कि नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए फॉर्म भरे जा रहे हैं। उन्होंने भी आवेदन जमा किया और दिल्ली में मैराथन की तैयारी करने पहुंच गए। नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल पर क़ब्ज़ा जमाया। इसके बाद उन्होंने इंटरनेशल चैंपियनशिप की तैयारी शरु की और नेपाल के पोखरा शहर में इंटरनेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भाग पहुंचे। यहां भी उन्हें कामयाबी मिली और देश के नाम गोल्ड मेडल किया।
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