Bihar News: हिंदी के साथ साथ सरकारी दफ्तरों उर्दू भाषा का भी होगा इस्तेमाल! उर्दू प्रेमी भरेंगे हुंकार, जानिए
Bihar News: बिहार अंजुमन तरक्की-ए-उर्दू के बेगूसराय जिला कमिटी की गुरुवार को बैठक हुई। पोखड़िया, न्यू कॉलोनी स्थित दार-ए-अरकम पब्लिक स्कूल में आयोजित बैठक की अध्यक्षता उपाध्यक्ष मौलाना परवेज आलम मुजाहिरि ने की एवं संचालन जिला सचिव व मुंगेर विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य मो. रुहुल्ल्लाह ने किया।
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बैठक में यह फ़ैसला लिया गया कि राज्य में उर्दू के भाषा की उन्नति के लि उर्दू बेटारी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया जाएगा। 30 नवंबर 2024 को बेगूसराय में जिला स्तर पर उर्दू बेदारी कांफ्रेंस का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम में बौतर मुख्यातिथि बिहार राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और बिहार अंजुमन तरक्की ए उर्दू के राज्य सचिव अब्दुल कय्यूम अंसारी शिरकत करेंगे।

वन इंडिया हिंदी से बात करते हुए जिला सचिव और मुंगेर विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य हाफिज मो.रुहुल्लाह ने बताया कि कई बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हस्तक्षेप पर बिहार के अपर मुख्य सचिव द्वारा राज्य में हिंदी के साथ-साथ उर्दू को राज्य की द्वितीय भाषा के रूप में सरकारी दफ्तरों में इस्तेमाल पत्र जारी किया गया।
संकेत पट्ट, पदाधिकारियों के नेमप्लेट, सरकारी योजनाओं के बैनर, उद्घाटन शिलापट्ट, होर्डिंग, सड़क, सार्वजनिक भवनों के नाम आदि में प्रदर्शित करने और सरकारी निमंत्रण पत्रों पर भी हिन्दी के साथ-साथ उर्दू में प्रदर्शित करने के संबंध में पत्र जारी किया गया था।
संबंधित प्रतिलिपि सभी जिला पदाधिकारी, जिला उर्दू भाषा कोषांग, सभी अनुमंडल और प्रखंड विकास पदाधिकारी, सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी को भेजा गया था। पत्र में कहा गया है कि राज्य सरकार हिंदी के साथ-साथ द्वितीय राजभाषा उर्दू के सफल कार्यन्वयन, प्रचार प्रसार और प्रगति को ध्यान रखते हुए, विभागीय अधिसूचना 17 अप्रैल 1981 के तहत संकेत पट्ट व नाम पट्ट को उर्दू में भी प्रदर्शित किया जाना है।
इस संबंध में विभाग द्वारा समय समय पर आपको अवगत करवाया जाता रहा है। इसलिए सभी से अनुरोध करते हुए कहा गया है कि सभी सरकारी कार्यो में जैसे पदाधिकारियों के नेमप्लेट से लेकर उद्धघाटन शिलापट्ट निमंत्रण पत्र आदि में उर्दू को स्थान देना ज़रूरी है।
इस संबंध में सभी विभागों के प्रधान को उक्त जानकारी देते हुए, इसपर जल्द से जल्द जवाब मांगा गया था। इसके बावजूद आदेश को पुख्ता तौर पर लागू नहीं किया गया। इसी परिपेक्ष में सरकार के आदेश को धरातल पर लाने के लिए जिले में इतिहासिक उर्दू बेदारी कांफ्रेंस का आयोजन किया जाएगा।












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