हवा में आलू की खेती! पारंपरिक खेती से अलग खेती कर लाखों का मुनाफा कर सकते हैं किसान
Aeroponic Farming News: Bihar Agriculture University सबौर में आलु की पारंपरिक खेती से हटकर नई विधि से खेती का सफल प्रयोग किया गया है। अब एरोपोनिक विधि के ज़रिए आलू की खेती से किसानों को 10 गुणा ज्यादा आमदनी हो सकती है। किसान नई तकनीक के ज़रिए ना सिर्फ फसल की उत्पादन बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपनी आमदनी में भी इज़ाफ़ा कर सकते हैं।
BAU सबौर में हवा में ही आलू के बीज को तैयार करने का सफल प्रयोग किया गया है। कृषि वैज्ञानिकों की मानें तो इस तकनी की मदद से कम जमीन में भी आलू की खेती कर सकते हैं। बीएयू सबौर में हुए नए प्रयोग से किसानों की तकदीर बदल जाएगी।

रिसर्च टीम रिसर्च टीम में हेड डॉ. रणधीर कुमार ने बतया कि सरकार ने इस तकनीक से खेती की मंज़ूरी दे दी है। इस तकनीक के प्रचार-प्रसार के लिए बीएयू में किसानों के लिए कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाएगा। एरोपोनिक तकनीक की मदद से की जा रही खेती बहुत ही आसान है।
एरोपोनिक तकनीक खेती में आलू की लटकती हुई जड़ों के ज़रिए फसल को तैयार किया जाता है। इस विधि में मिट्टी और जमीन की आवश्यकता नहीं होती है। एक्सपर्ट की मानें तो एरोपोनिक तकनीक से खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा है।
एरोपोनिक तकनीक के ज़रिए खेती में किसान कम पूंजी में फसलों की ज़्यादा पैदावार कर सकते हैं। इससे किसानों को पारंपरिक खेती के मुकाबले आमदनी में भी ज्यादा इजाफ़ा होगा। कृषि वैज्ञानिक डॉ. रणधीर कुमार की मानें तो इस तकनीक के ज़रिए आलू के बीज की पैदावार को काफी ज्यादा बढ़ा सकते हैं।
एग्रीकल्चर एक्सपर्ट की मानें तो इस नई तकनीक से ना सिर्फ़ बिहार के किसानों फायदा होगा, बल्की दूसरे प्रदेशों के किसानों को भी बहुत फायदा होगा। एरोपोनिक तकनीक के ज़रिए आलू के अलावा स्ट्रॉबेरी, पत्तेदार साग, टमाटर, खीरे, और जड़ी-बूटियों की खेती भी की जा रही है।
आपको बता दें कि एरोपोनिक तकनीक के ज़रिए मिट्टी के बना ही हवा में आलू का बीज तैयार हो रहा है। इस विधि से बीज तैयार करने पर आलू में किसी प्रकार की बिमारी नहीं होगी। फसल में बीमारियां और कीट भी ना के बराबर लगते हैं। अन्य बीज के मुकाबले गुणवत्ता भी ज्यादा होती है। आलू के बीज बेचकर भी किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।
एरोपोनिक तकनीक से खेती के लिए सबसे पहेल लैब से आलू को हार्डनिग यूनिट ले जाया जाता है। इसके बाद पौधे की जड़ों को बावस्टीन में भिगोया जाता है। बावस्टीन में डुबोने से आलू के पौधों में फंगस वगैरह नहीं लगते हैं। पौधे को बेड बनाकर उससे कॉकपिट में लगा दिया जाता है। करीब 15 दिनों के बाद पौधों को एरोपोनिक यूनिट के अंदर डाल दिया जाता है।












Click it and Unblock the Notifications