ओडिशा सरकार ने की बंदरगाह विधेयक के मसौदे में बदलाव की मांग
ओडिशा सरकार ने भारतीय बंदरगाह विधेयक 2021 के मसौदे में संशोधन की मांग की है, जो छोटे बंदरगाहों के प्रबंधन से संबंधित है।
भुवनेश्वर, 30 जून। ओडिशा सरकार ने भारतीय बंदरगाह विधेयक 2021 के मसौदे में संशोधन की मांग की है, जो छोटे बंदरगाहों के प्रबंधन से संबंधित है। वाणिज्य और परिवहन मंत्री पद्मनाभ बेहरा ने इस बाबत केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया को पत्र लिखकर कहा कि तटीय राज्यों की चिंताओं को दूर किया जाए। इस मसौदे को बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने छोटे बंदरगाहों के मौजूदा प्रबंधन मॉडल को संशोधित करने के लिए तैयार किया है।

पद्मनाभ बेहरा ने कहा कि ओडिशा 'ओडिशा राज्य समुद्री बोर्ड' का गठन करने की प्रक्रिया में है। फरवरी 2021 में ओडिशा विधान सभा द्वारा पारित होने के बाद यह विधेयक अब गृह मंत्रालय, भारत सरकार के पास राष्ट्रपति की सहमति की प्रतीक्षा कर रहा है। भारतीय बंदरगाह विधेयक 2021 में राज्य समुद्री बोर्ड को शामिल करने का कोई प्रावधान नहीं है जिसे एक राज्य अधिनियम द्वारा बाद की तारीख में गठित किया जाता है। इसके लिए एक प्रावधान करने की आवश्यकता है।
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मौजूदा भारतीय बंदरगाह अधिनियम, 1908 के अनुसार, तटीय क्षेत्रों की राज्य सरकारों को छोटे बंदरगाहों की योजना बनाने, उन्हें विकसित करने, रेग्यूलेट करने और नियंत्रित करने का अधिकार है। विधेयक के नवीनतम मसौदे में इन शक्तियों को समुद्री राज्य विकास परिषद को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव है, जो 1997 से एक सलाहकार निकाय है, और इसे वैधानिक दर्जा देता है।
बेहरा ने कहा कि केंद्र सरकार समुद्री राज्य विकास परिषद के माध्यम से प्रस्तावित विधेयक के माध्यम से राज्य के इस अधिकार को उपयुक्त बनाना चाहती है। हम केंद्र सरकार द्वारा राज्य प्राधिकरण के इस प्रस्तावित स्वायत्तीकरण का विरोध करते हैं। प्राधिकरण के अपने केंद्रीकरण के माध्यम से भारत को एक मजबूत समुद्री राष्ट्र बनाने के बजाय प्रस्तावित प्रावधान, राष्ट्र में बंदरगाह आधारित विकास के को रोक देगा। साथ ही, यह प्रस्ताव सहकारी संघवाद की भावना और राज्यों के अधिकारिता के विरुद्ध है












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