ओडिशा मिसाल है और देश उससे सीख सकता है
ओडिशा को कई लोग देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक मानते हैं, लेकिन इसने राष्ट्र के सामने एक उदाहण पेश किया है।
भुवनेश्वर, 13 अगस्त: ओडिशा को कई लोग देश के सबसे गरीब राज्यों में से एक मानते हैं, लेकिन इसने राष्ट्र के सामने एक उदाहण पेश किया है। चाहे "नल से जल पियो मिशन" के तहत पुरी का देश के नल से स्वच्छ पेयजल प्राप्त करने वाला पहला शहर बनने का मामला हो या फिर राजधानी में प्रवासी कामगारों और भिखारियों को पहली खुराक देने के साथ भुवनेश्वर के कोविड-19 वैक्सीनेशन कवरेज में 100% सफलता हासिल करने का मामला हो।

इनके अलावा, ओडिशा ने अब पूरे देश और प्रवासियों से भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीमों के टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के लिए बहुत प्रशंसा पाई है, जिसमें पहले ने 40 से भी ज्यादा साल बाद पदक जीता है। यह देश का पहला राज्य है, जिसने 2018 से ही आधिकारिक तौर पर दोनों टीमों को प्रायोजित किया है और प्रशिक्षण के उद्देश्य से इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध कराने, टूर्नामेंट आयोजित करने आदि पर अबतक करीब 150 करोड़ रुपये का निवेश किया है। सच तो यह है कि सुंदरगढ़ जिले में भारत का सबसे बड़ा हॉकी स्टेडियम निर्माण की प्रक्रिया में है, जिस जिले ने देश के कुछ सबसे प्रसिद्ध हॉकी खिलाड़ियों को जन्म दिया है। यही नहीं, इस जिले के हर ब्लॉक में खिलाड़ियों को खेल की परिस्थितियों के अनुकूल बनाने के लिए जल्द ही एस्ट्रो-टर्फ उपलब्ध होंगे। इससे भी ज्यादा तारीफ की बात यह है कि जब राष्ट्र की सरकार या दुनिया की शीर्ष फॉर्च्यून 500 कंपनियों में गिने जाने वाले बड़े कॉरपोरेट्स उन्हें प्रायोजित करने में नाकाम रहे, तो एक राज्य सरकार का नेतृत्व करने वाले नवीन पटनायक ने कदम बढ़ाया।
ओडिशा में मौजूदा मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाली सरकार 1999 में राज्य को तबाह करने वाले भयानक चक्रवात के विनाशकारी प्रभावों के बाद सत्ता में आई थी। नवनिर्वाचित सरकार ने उस मौके से शुरुआत की और इस तरह से ओडिशा में बदलाव शुरू हुआ जहां वह आज है। इन्हें अब प्राकृतिक आपदा प्रबंधन के आधार पर त्रुटिहीन तैयारियों और राहत उपायों के अगुवा के रूप में जाना जाता है।
राजनेताओं के सर्वोत्कृष्ट शख्सियत के उलट, ओडिशा के मुख्यमंत्री एक शांत और आडंबर विहीन परफॉर्मर रहे हैं। उन्होंने कल्याणकारी राज्य सुनिश्चित करने के प्रयास किए हैं, चाहे वह किसानों के लिए कालिया योजना के रोल आउट के जरिए हो, गवर्निंग बॉडीज में पर्याप्त महिला प्रतिनिधित्व के लिए मुखरता हो,और चाहे महिला स्वयं सहायता समूहों को संगठित और सशक्त बनाना हो। ओडिशा, जो कभी देश का 'डिजास्टर कैपिटल' था, उसके दो तटीय गांवों को अब यूनेस्को की ओर से 'सुनामी के लिए तैयार' के तौर में मान्यता दी गई है। इससे हिंद महासागर क्षेत्र में हम सामुदायिक स्तर पर आपदा तैयारियों में इतने उच्च स्तर का प्रदर्शन करने वाला पहला देश बन गए हैं।
जब देश कोविड -19 की दूसरी लहर के दौरान भारी संकट का सामना कर रहा था, तब ऑक्सीजन की कमी वाले 19 राज्यों को लगभग 19,000 मीट्रिक टन लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन वितरित करने की दिशा में सीएम की कार्रवाई को सहकारी संघवाद की सच्ची भावना के प्रदर्शन के लिए सराहा गया है। राज्य की कुछ अन्य असाधारण उपलब्धियों में भूमिहीन किसानों को ज्वाइंट लायबिलिटी ग्रुप के नए इंस्टीट्यूशनल मेकेनिज्म के जरिए से लोन उपलब्ध कराना, बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना के माध्यम से महिलाओं को खास तबज्जो देते हुए एक विश्वास-आधारित (बीमा-आधारित के विपरीत) यूनिवर्सिल हेल्थ कवरेज प्रदान करना, शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए आदर्श विद्यालय शुरू करना और राज्य में विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूहों के लिए विशेष पैकेजों की घोषणा करना, कुछ योजनाओं के नाम में शामिल हैं।
उपलब्धि तब मालूम पड़ती है, जब बुनियादी जरूरतें पूरी हो जाती हैं: मशहूर मनोवैज्ञानिक अब्राहम मास्लो 'हाइरार्की ऑफ नीड्स' मॉडल के प्रचारक थे, जिसे इंसान के भोजन, कपड़े और आवास की बहुत ही बुनियादी आवश्यकताओं से शुरू करके बढ़ती हुई आकांक्षात्मक और खुद की जरूरतों के हिसाब से रैंक किया गया था। ओडिशा सरकार ने सुनिश्चित किया है कि ढेरों सामाजिक-आर्थिक कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अपने लोगों की बुनियादी जरूरतों का ख्याल रखा जाए। इससे उनकी क्षमताओं में वृद्धि हुई और उनमें नए अवसरों की तलाश और उन्हें प्राप्त करने की आकांक्षा के कारण 'हाइरार्की ऑफ नीड्स' की सीढ़ी पर आगे बढ़ने की इच्छा पैदा हुई। ऊंचाई की आकांक्षाओं को प्राप्त करने पर फोकस धीमा है, लेकिन निश्चित रूप से यह राज्य और उसके लोगों की वास्तविक क्षमता को उजागर करने में मदद कर रहा है। ओडिशा का विकास भी अपने लोगों को कुशल बनाने के इर्द-गिर्द बुना गया है। इसे यूरोप इंडिया फाउंडेशन फॉर एक्सीलेंस की ओर से 2019 में "बेस्ट स्टेट इन रूरल स्किल डेवलपमेंट" के रूप में मान्यता दी गई थी। राज्य में शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र भी तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं। आगे की योजना ओडिशा को देश का शिक्षा और स्वास्थ्य केंद्र बनाने की है।
ओडिशा ने यह उपलब्धि कैसे हासिल की? 5टी फ्रेमवर्क (यह पहले इस्तेमाल होने वाले 3टी फ्रेमवर्क का ही विस्तार है) राज्य में शासन की विशेषता है: टेक्नोलॉजी और इसका लाभ उठाना, ट्रांसपरेंसी इन गवर्नेंस, विभिन्न शामिल स्टेकहोल्डर्स के साथ टीम वर्क, टाइम-बाउंड आधार पर लक्ष्य हासिल करना; और जो ट्रांसफॉर्मेशन की ओर ले जाता है। सरकार का यही नजरिया राज्य को अब तक प्राप्त विभिन्न प्रशंसाओं का कारण है। मुख्यमंत्री ने न सिर्फ ओडिशा खाद्य सुरक्षा योजना (एसएफएसएस) और बीजू पक्का घर योजना के माध्यम से बुनियादी जरूरतों को पूरा किया है, बल्कि सीमित संसाधनों के बावजूद इसे एक महत्वाकांक्षी राज्य बनाने में मीलों आगे बढ़ गए हैं। कभी संकटग्रसत पिछड़ा क्षेत्र माना जाने वाला ओडिशा अब पंचायती राज संस्थाओं के साथ साझेदारी के तहत प्रभावी शासन करता है और प्राकृतिक आपदाओं से लेकर कोविड-19 महामारी जैसी जारी हेल्थ इमरजेंसी तक संकटों से निपटने के लिए सामुदायिक आधार पर बनाई गई रणनीति का इस्तेमाल करता है। इन सभी तरह के पहलों में जो बात सबसे अलग है, वह है सामुदायिक-स्तर पर लचीलापन और विकास को आगे बढ़ाने की क्षमता हासिल करने के लिए लोगों की भागीदारी।
आज नवीन पटनायक के शासन की सराहना, यहां तक कि उनके सबसे कटू आलोचकों की ओर से भी, इस तथ्य की मान्यता है कि मुख्यमंत्री को आधुनिक ओडिशा के निर्माण में प्रमुख नेता के रूप में लंबे समय तक स्वीकार किया जाएगा। भारत को राज्य से सीखना चाहिए कि कैसे अपने उपलब्ध संसाधनों का अधिकतम लाभ उठाया जाए और असंभव को हासिल करने का साहस दिखाया जाए।
(लेखक मनोज मिश्रा- सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड आईटी और साइंस एंड टेक्नोलॉजी हैं। ये ओडिशा के मुख्यमंत्री के ओएसडी हैं। इनसे [email protected] पर संपर्क किया जा सकता है)
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