ओडिशा में कोरोना को हुआ एक साल, सबसे पहले राज्य सरकार ने लगाया था लॉकडाउन
भुवनेश्वर। देश में कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर से पिछले साल की तरह आने शुरू हो गए हैं। ओडिशा राज्य भी दोबारा से कोरोना की जद में आता दिख रहा है। दरअसल, ओडिशा में पिछले साल 16 मार्च को कोरोना का पहला केस मिला था और अब एक साल के बाद फिर से कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इस बीच मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने कहा है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अभी कोरोना से बचाव के लिए सावधानी बरतना बहुत जरूरी है। मुख्यमंत्री ने लोगों से पहले के तरह ही सावधानी बरतने की अपील की है।

16 मार्च को ओडिशा में मिला था पहला केस
बता दें कि पिछले साल 16 मार्च को ही ओडिशा में पहला केस मिला था। पहले संक्रमित मरीज को कैपिटल अस्पताल में भर्ती कर इलाज किया गया। पहला मामला पहचान होने के 3 दिन बाद दूसरा मामला सामने आया, जिसका इलाज एम्स अस्पताल में किया गया। उस समय तक महाराष्ट्र, तमिलनाडु, पंजाब एवं केरल में संक्रमण ने अपनी रफ्तार पकड़ ली थी। ऐसे में कोविड से मुकाबला के लिए राज्य सरकार राज्य स्तर पर नियंत्रण कक्ष खोल दिया, 104 सहायता नंबर जारी किया। जनस्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को लेकर कमेटी बनायी गई। स्वाब परीक्षण की व्यवस्था की गई। विशेष कोविड अस्पताल बनाए गए। इलाज के लिए निजी अस्पताल में बेड की व्यवस्था की गई। लगभग 33.3 लाख स्वास्थ्य कर्मचारी आगे रहते हुए कोरोना से मुकाबला के लिए जंग शुरू कर दिए।
ओडिशा में सबसे पहले लगा था लॉकडाउन
आपको बता दें कि ओडिशा में पहला केस 16 मार्च को मिलने के बाद 21 मार्च को ही राज्य सरकार ने लॉकडाउन लगाने का फैसला ले लिया था। इसके बाद केन्द्र सरकार की तरफ से जनता कर्फ्यू एवं लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। ओडिशा में गंभीर रूप से बीमार मरीजों के इलाज के लिए 15 जुलाई को प्लाजमा बैंक बनाए गए। कोरोना से ठीक होने वाले मरीजों ने प्लाजमा दान किया।












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