समुद्री लहरों और कटाव को रोकने के लिए ओडिशा में बनेगा 380 किमी लंबा तटबंध, 1944 करोड़ होंगे खर्च

ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में न्यूनतम कटाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, राज्य सरकार ने 380 किलोमीटर के क्षेत्र में तटबंध बनाने का निर्णय लिया है।

भुवनेश्वर, 1 जून। ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में न्यूनतम कटाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से, राज्य सरकार ने 380 किलोमीटर के क्षेत्र में तटबंध बनाने का निर्णय लिया है। ज्वार भाटा के प्रति संवेदनशील ओडिशा के तटों को बचाने के लिए सरकार ने इस तटबंध के निर्माण का फैसला लिया है। सरकार के निर्णय के अनुसार जल संसाधन विभाग 10 जिलों में विशेष तटबंध का निर्माण करेगा।

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जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता ज्योतिर्मय रथ ने एक बैठक में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 380 किलोमीटर लंबे विशेष तटबंधों का निर्माण तार की जाली में पत्थरों को बांधकर किया जाएगा।
तटबंध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। रथ ने कहा कि शुरुआत में समुद्री तटबंध परियोजना पर 1,944 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार ने इस परियोजना पर कुल 6,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया है।

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अधिकारी ने कहा कि यह निर्णय यह देखने के बाद लिया गया है कि पुरी, केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर और गंजम जिलों में बनाए गए 52 किलोमीटर लंबे खारे तटबंधों ने तटीय कटाव को कम किया है। 2013-16 में विश्व बैंक से लिए गए फंड के साथ चार जिलों में तटबंध स्थापित किए गए थे। मालूम हो कि ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पीएम मोदी के साथ शुक्रवार को हुई समीक्षा बैठक के दौरान कहा था कि राज्य की तटरेखा 480 किमी लंबी है जिसका जयादातर हिस्सा तेज ज्वार-भाटा के प्रति संवेदनशील है।

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