Bhopal News: चेकिंग के दौरान महिला से मारपीट, पुलिस की कार्यशैली पर फिर उठा सवाल, दो प्रधान आरक्षक लाइन हाजिर
Bhopal News: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर पुलिस की कार्यशैली को लेकर सवालों के घेरे में आ गई है। अवधपुरी थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ हुई कथित मारपीट और अभद्रता की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
पुलिस की कथित बर्बरता का यह मामला ना सिर्फ वायरल वीडियो के चलते सुर्खियों में है, बल्कि इसने आम लोगों के मन में पुलिस के प्रति अविश्वास भी पैदा कर दिया है।

क्या है मामला?
17 अप्रैल की दोपहर, 33 वर्षीय महिला स्कूटी से बाजार जा रही थी। रास्ते में अवधपुरी इलाके में लगे चेकिंग पॉइंट पर पुलिस ने उसे बिना हेलमेट पकड़ा। महिला ने चालान भरने से इनकार किया और इस पर बहस शुरू हो गई। इसी दौरान प्रधान आरक्षक अतुल चौकसे ने महिला के साथ झूमाझटकी की और कथित तौर पर एक जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। महिला के मुताबिक, इस झटके से उसका संतुलन बिगड़ गया और उसके कान व मुंह से खून निकलने लगा।
घटना के समय मौजूद दूसरा प्रधान आरक्षक जीतेंद्र न सिर्फ मूकदर्शक बना रहा, बल्कि उसने मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो भी बना लिया। पीड़िता का आरोप है कि वह भी अभद्र भाषा का प्रयोग कर रहा था।
थाने से लेकर सीनियर अफसरों तक दौड़ी पीड़िता
परेशान महिला जब न्याय की उम्मीद लेकर अवधपुरी थाने पहुंची, तो वहां उसकी शिकायत सुनने के बजाय उल्टा उसके खिलाफ ही शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की एफआईआर दर्ज कर दी गई। यह कदम पीड़िता के लिए दूसरा बड़ा झटका था। लेकिन उसने हार नहीं मानी और वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया। डीसीपी श्रद्धा तिवारी के हस्तक्षेप के बाद महिला थाना पुलिस ने घटना की जांच शुरू की।
Bhopal News: एफआईआर और कार्रवाई, लेकिन अभी भी अधूरा इंसाफ
20 अप्रैल को महिला थाना ने प्रधान आरक्षक अतुल चौकसे के खिलाफ IPC की धारा 323, 506 और 294 के तहत एफआईआर दर्ज की। साथ ही डीसीपी ने तत्काल प्रभाव से अतुल और जीतेंद्र - दोनों प्रधान आरक्षकों को लाइन अटैच कर दिया है। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक, घटना के बाद से दोनों पुलिसकर्मी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
टीआई अंजना दुबे ने बताया कि जीतेंद्र की भूमिका को लेकर अभी जांच चल रही है। उसके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है, यदि साक्ष्य उसके खिलाफ जाते हैं।
Bhopal News: पुलिस के भीतर की सड़ांध या सिस्टम का ढीलापन?
इस पूरी घटना ने पुलिस की जवाबदेही, संवेदनशीलता और आम जनता के साथ व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस विभाग से सुरक्षा की उम्मीद होती है, अगर वही अन्याय करे तो जनता कहां जाएगी? एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता रीना शर्मा कहती हैं, "ये घटना एक महिला की नहीं, पूरे सिस्टम की असफलता की कहानी है। अगर वीडियो ना बना होता, तो क्या यह मामला भी दबा दिया जाता?"
क्या यह isolated मामला है? या एक बड़ा संकेत?
भोपाल में महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े पहले ही चिंताजनक हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में औसतन हर दिन एक बलात्कार और दो छेड़छाड़ की घटनाएं दर्ज की गईं। ऐसे में पुलिस का खुद पीड़ितों के साथ ऐसा बर्ताव करना केवल स्थिति को और बदतर बना रहा है।
प्रशासन का दावा, सुधार के लिए उठाए जाएंगे कदम
डीसीपी श्रद्धा तिवारी ने भरोसा दिलाया है कि इस मामले में निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होगी। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही, उन्होंने पुलिसकर्मियों के लिए "संवेदनशीलता प्रशिक्षण" शुरू करने की बात भी कही है।
पुलिस ने जनता से भी अपील की है कि यदि किसी के पास घटना से जुड़ा कोई वीडियो या साक्ष्य हो, तो वह आगे आकर मदद करें।
ये सिर्फ थप्पड़ नहीं था, एक सिस्टम पर तमाचा था
यह घटना सिर्फ एक थप्पड़ की नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था पर एक तमाचा है। यह तमाचा उस विश्वास पर है, जो आम आदमी पुलिस पर करता है। यह सिर्फ एक महिला की लड़ाई नहीं है, बल्कि उस हर व्यक्ति की है जो सिस्टम से न्याय की उम्मीद करता है। अब देखना यह है कि क्या यह मामला एक मिसाल बनेगा या फिर अन्याय की एक और फाइल बनकर बंद हो जाएगा।












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