MP News: जानिए IAS संतोष वर्मा को क्यों मिला कारण बताओ नोटिस, जातिगत टिप्पणी पर सात दिनों में जवाब मांगा
MP News: मध्य प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ (AJJAKS) के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष और IAS अधिकारी संतोष वर्मा को उनके कथित विवादास्पद जातिगत टिप्पणी के लिए कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार को जारी इस नोटिस में वर्मा से सात दिनों के भीतर विस्तृत जवाब मांगा गया है।
नोटिस में कहा गया है कि वर्मा का बयान सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने वाला और सवर्ण समाज के खिलाफ भड़काऊ लगता है, जो एल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1968 की धारा 3(1), 3(2)(b)(i)(ii) का उल्लंघन है। अगर जवाब संतोषजनक न मिला तो एल इंडिया सर्विसेज (डिसिप्लिन एंड अपील) रूल्स, 1969 की धारा 10(1)(a) के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

विवाद की शुरुआत: अजाक्स अधिवेशन में दिया बयान
सोमवार को भोपाल के तुलसी नगर स्थित अंबेडकर मैदान में अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन में संतोष वर्मा को प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। भाषण के दौरान आरक्षण पर चर्चा करते हुए वर्मा ने कहा, "आरक्षण तब तक जारी रहे जब तक मेरा बेटा किसी ब्राह्मण परिवार की बेटी से शादी न कर ले या ब्राह्मण अपनी बेटी मेरे बेटे को दान में न दे। अगर आरक्षण आर्थिक आधार पर देना है तो..."। यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। सवर्ण संगठनों ने इसे ब्राह्मण बेटियों का अपमान बताया। ऑल इंडिया ब्राह्मण सोसाइटी के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्रा ने कहा, "यह असभ्य और जातिवादी बयान है। IAS अधिकारी से ऐसी भाषा अपेक्षित नहीं। तत्काल FIR हो।"
वर्मा की सफाई: "व्यंग्य था, गलत संदर्भ में लिया गया"
विवाद बढ़ते ही वर्मा ने मंगलवार को सफाई दी। उन्होंने ANI को बताया, "मेरा उद्देश्य राजनीतिक हंगामा पैदा करना नहीं था। अजाक्स बैठक में आरक्षण को धार्मिक आधार की बजाय आर्थिक आधार पर देने की चर्चा हो रही थी। मैंने कहा था कि अगर मैं आर्थिक रूप से स्वतंत्र हूं और सामाजिक रूप से पिछड़ा नहीं हूं, तो मेरे बच्चों को समाज से 'रोटी-बेटी' का व्यवहार मिलना चाहिए। 'दान' शब्द गलती से आया, जो आज के समय में अपमानजनक लग सकता है। महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था। अगर किसी को चोट पहुंची तो खेद है। लेकिन मेरी बात को सिर्फ एक पंक्ति में काटा गया।"
सवर्ण संगठनों का कड़ा विरोध: FIR और निलंबन की मांग
वर्मा की सफाई के बावजूद सवर्ण समाज में उबाल है। ऑल इंडिया ब्राह्मण सोसाइटी ने कहा, "माफी से अपमान धुलता नहीं। ब्राह्मण बेटियों को 'दान' का शब्द इस्तेमाल करना घोर अपराध है।" मंत्रालय सेवा अधिकारी/कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने इसे "अस्वीकार्य" बताते हुए तत्काल निलंबन की मांग की। पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव ने कहा, "वर्मा चरित्रहीन हैं। सरकार को उनका IAS अवॉर्ड रद्द करना चाहिए।" इंदौर, ग्वालियर और जबलापुर में प्रदर्शन शुरू हो गए। कांग्रेस MLA हेमंत कटारे ने कहा, "ऐसे लोग समाज को बांट रहे हैं। जेल भेजो।"
सरकार का त्वरित एक्शन: कारण बताओ नोटिस
सामान्य प्रशासन विभाग ने बुधवार रात नोटिस जारी किया। डिप्टी सेक्रेटरी प्रदीप कुमार शर्मा ने हस्ताक्षर कर कहा, "वर्मा का बयान सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाता है और जातिगत शत्रुता फैलाता है। यह कंडक्ट रूल्स का उल्लंघन है। सात दिनों में जवाब दें, वरना अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।" सूत्रों के मुताबिक, मुख्य सचिव वीरा राणा ने बैठक बुलाई और नोटिस का ड्राफ्ट तैयार कराया।
वर्मा का पुराना विवादास्पद इतिहास
संतोष वर्मा (2014 बैच) का रिकॉर्ड विवादों से भरा है। 2021 में CBI जज के हस्ताक्षर जालसाजी का आरोप लगा। महिला उत्पीड़न, धमकी और अश्लील सामग्री फैलाने के केस में जेल गए। सितंबर 2025 में निलंबन से बहाली हुई। अजाक्स अध्यक्ष बनने के बाद यह बयान आया। मीडिया की रिपोर्ट्स में पुराने केसों का जिक्र है।
अब आगे क्या?
वर्मा को सात दिन मिले हैं। अगर जवाब संतोषजनक न हुआ तो निलंबन या विभागीय जांच हो सकती है। सवर्ण संगठन धरना-प्रदर्शन की तैयारी में हैं। अजाक्स ने कहा, "हमारे अध्यक्ष ने समानता की बात की, तोड़-मरोड़ पेश की गई।" विपक्ष ने सरकार को घेरा। यह विवाद आरक्षण बहस को जातिगत रंग दे रहा है। वर्मा का बयान व्यंग्य था या जानबूझकर तंज? सरकार का अगला कदम क्या? इंतजार है।












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