व्यापम घोटाला : पुलिस आरक्षक भर्ती 2013 मामले में 4 आरोपियों को मिली 7 साल की सजा
भोपाल में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा मामले में 4 आरोपियों को राजधानी के विशेष अपर सत्र न्यायाधीश नीतीश राज सिंह सिसोदिया (CBI) ने 7-7 साल कैद की सजा सुनाई है।
भोपाल,30 सितंबर। मध्यप्रदेश में 2013 में हुई पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा मामले में 4 आरोपियों को राजधानी के विशेष अपर सत्र न्यायाधीश नीतीश राज सिंह सिसोदिया (CBI) ने 7-7 साल कैद की सजा सुनाई है। इसके अलावा उन पर ₹10-10 हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। आरोपित अभ्यार्थी कमल किशोर अमर सिंह नागेंद्र सिंह सुरेश सिंह पृथ्वी रूपक रवि कुमार राजपूत को एसटीएफ ने 2013 की परीक्षा में गड़बड़ी करने को लेकर गिरफ्तार किया था। साल 2015 में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर सीबीआई ने अग्रिम विवेचना कर पूरक अभियोग पत्र अदालत में पेश किए थे।

इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक अधिकारी मनोज उपाध्याय ने पैरवी की। फूफा जी ने बताया कि व्यापम द्वारा 7 अप्रैल 2013 को मध्यप्रदेश पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी इसमें चार अभ्यार्थी कमल किशोर नागेंद्र सिंह अमर सिंह और सुरेश सिंह ने अपने स्थान पर किसी अन्य व्यक्ति को परीक्षा में बैठाकर लिखित परीक्षा पास कराने के लिए बिचौलियों से मिलीभगत कर परीक्षा पास की थी। आरोपी नागेंद्र सिंह के स्थान पर पृथ्वी रूपक रवि कुमार राजपूत ने परीक्षा दी थी परिणाम के बाद यह चारों पास हो गए थे प्रकरण में अभियोजन पक्ष ने अदालत में कुल 32 गवाहों के साथ 220 दस्तावेज और 19 आर्टिकल अदालत में पेश किए।
बता दे 2013 में व्यापम ने पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा में इन आरोपियों अपनी जगह किसी और को बैठाकर लिखित परीक्षा पास की थी। लेकिन फोटो अलग-अलग होने से इस मामले का खुलासा हुआ था। 9 साल के चलने के बाद 29 सितंबर को कोर्ट ने सजा सुनाते हुए सभी को 7-7 साल की कैद की सजा सुनाई है।
बता दे जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश में व्यवसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापम ने 2004 से 2014 के बीच करीब 79 परीक्षाएं आयोजित करवाई थी। लेकिन 2013 में व्यापम के घोटाले का सिलसिला शुरू हुआ। तब पहली बार इंदौर पुलिस ने इस घोटाले में शामिल 20 पूर्णा भाइयों को गिरफ्तार किया था। ये सभी मूल परीक्षार्थी की जगह खुद परीक्षा देने आए थे।












Click it and Unblock the Notifications