MP News: सिवनी-नागपुर हाईवे पर इंसानियत कैसे हुई शर्मसार, जानिए , पत्नी को बाइक पर बांधकर ले गया पति
मर चुकी है इंसानियत..." यह पुरानी कहावत मध्यप्रदेश के सिवनी-नागपुर नेशनल हाईवे पर हुई एक दर्दनाक घटना ने सच साबित कर दी। 9 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन हुए एक सड़क हादसे ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर कर दिया।
इस हादसे में अपनी पत्नी को खोने वाला एक पति, मदद की आस में चीखता रहा, लेकिन न कोई गाड़ी रुकी, न कोई हाथ आगे बढ़ा। आखिरकार, मजबूरी में उसने अपनी पत्नी के शव को बाइक पर बांधकर 80 किलोमीटर तक का सफर तय किया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे देश में हंगामा मच गया है।

हादसे की दर्दनाक कहानी
नागपुर के लोनारा निवासी 40 वर्षीय अमित यादव अपनी 36 वर्षीय पत्नी ज्ञारसी यादव के साथ रक्षाबंधन के दिन मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के धूमा थाना क्षेत्र में करनपुर गांव जा रहे थे। उनकी बाइक को नागपुर-जबलपुर नेशनल हाईवे पर महाराष्ट्र के देवलापार थाना क्षेत्र में मोरफाटा दरगाह के पास एक तेज रफ्तार लाल रंग के आयशर ट्रक ने टक्कर मार दी। हादसे में अमित तो बाइक से गिरकर गड्ढे में जा गिरे, लेकिन ज्ञारसी ट्रक के पहियों के नीचे आ गईं और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद अमित ने सड़क पर खड़े होकर राहगीरों से मदद की गुहार लगाई। उसने आधे घंटे तक चीख-चीखकर लोगों से सहायता मांगी, लेकिन आसपास मौजूद लोग तमाशबीन बने रहे। कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। निराश और टूटे हुए अमित ने आखिरकार अपनी पत्नी के शव को बाइक की पिछली सीट पर बांधा और नागपुर में अपने घर की ओर चल पड़ा। इस दौरान का एक वीडियो, जिसे बाद में पुलिस ने बनाया, सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में अमित तेजी से बाइक चलाते हुए दिख रहे हैं, और पीछे उनकी पत्नी का शव कपड़े में लिपटा हुआ बंधा है।
पुलिस की कार्रवाई और जांच
हाईवे पर पुलिस ने अमित को मोरफाटा इलाके में रोका और ज्ञारसी के शव को पोस्टमार्टम के लिए नागपुर के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज भेजा। सिवनी जिले के एसडीओपी अपूर्व भलावी ने बताया कि हादसा रविवार दोपहर करीब 3:15 बजे हुआ और यह महाराष्ट्र की सीमा में हुआ था, इसलिए कार्रवाई महाराष्ट्र पुलिस को करनी है। महाराष्ट्र पुलिस ने अमित के बयान दर्ज किए और ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। पुलिस ने बताया कि ट्रक चालक हादसे के बाद फरार हो गया, और उसकी तलाश के लिए सीसीटीवी फुटेज और टोल प्लाजा की रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है।
अमित का दर्द और समाज पर सवाल
अमित यादव ने बताया कि वह और उनकी पत्नी पिछले 10 साल से नागपुर के लोनारा में रह रहे थे। उनकी 19 वर्षीय बेटी नीतू 12वीं कक्षा में पढ़ती है, और इस हादसे ने उसके सिर से मां का साया छीन लिया। अमित ने कहा, "मैंने लोगों से इंसानियत का वास्ता दिया, लेकिन कोई नहीं रुका। आधे घंटे तक मदद मांगने के बाद मैंने मजबूरी में अपनी पत्नी के शव को बाइक पर बांधा और घर की ओर चल पड़ा।" इस हादसे ने अमित को न केवल अपनी पत्नी की मौत का दर्द दिया, बल्कि समाज की संवेदनहीनता ने उन्हें और गहरे सदमे में डाल दिया।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो ने लोगों में गुस्सा और दुख दोनों पैदा किया। कई यूजर्स ने इसे इंसानियत पर सवाल उठाने वाली घटना बताया। एक यूजर ने लिखा, "सड़क पर लोगों की भीड़ थी, लेकिन इंसान कहां थे?" एक अन्य यूजर ने लिखा, "यह घटना देश में इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं की हकीकत को उजागर करती है।"
हाईवे पर इमरजेंसी सेवाओं की कमी
यह घटना नेशनल हाईवे पर इमरजेंसी मेडिकल सेवाओं की कमी को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि नागपुर-जबलपुर हाईवे जैसे व्यस्त मार्गों पर नियमित अंतराल पर एम्बुलेंस, प्रशिक्षित फर्स्ट रिस्पॉन्डर, और ट्रॉमा केयर यूनिट्स की जरूरत है। भारत में गुड सेमेरिटन लॉ के तहत हादसे में मदद करने वालों को कानूनी संरक्षण दिया जाता है, फिर भी लोग पुलिस पूछताछ और कोर्ट-कचहरी के डर से पीड़ितों की मदद से कतराते हैं। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस कानून के बारे में जागरूकता बढ़ाने की मांग की है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
इस घटना ने मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र में सामाजिक और राजनीतिक हलचल मचा दी है। विपक्षी नेताओं ने इसे सड़क सुरक्षा और इमरजेंसी सेवाओं की नाकामी का उदाहरण बताया। कांग्रेस ने ट्वीट किया, "यह घटना दर्शाती है कि हमारी सड़कें और समाज कितने असंवेदनशील हो चुके हैं। सरकार को हाईवे पर एम्बुलेंस और मेडिकल सेवाएं सुनिश्चित करनी चाहिए।" दूसरी ओर, बीजेपी ने कहा कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और ट्रक चालक की तलाश जारी है।\












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