जहरीले सिरप से अब तक 14 मासूमों की मौत, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप, सीएम मोहन यादव आज जाएंगे परासिया
मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में खांसी के सिरप 'कोल्ड्रिफ' के सेवन से 14 बच्चों की दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर दिया है। यह महज एक चिकित्सकीय दुर्घटना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की गहरी लापरवाही का आईना है। जांच रिपोर्टों में सिरप में घातक रसायन डायएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) की मौजूदगी पाई गई, जो किडनी फेलियर का कारण बनी।
लेकिन सवाल उठता है कि रिपोर्ट आने तक यह जानलेवा सिरप क्यों नहीं बैन किया गया? सरकार ने जांच के नाम पर समय बर्बाद किया, तो विपक्ष ने भी राजनीतिक फायदे के चक्कर में मासूमों के परिवारों को अकेला छोड़ दिया। आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव छिंदवाड़ा पहुंच रहे हैं, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी प्रदर्शन की तैयारी में जुटे हैं।

इस बीच, स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला पर क्लीन चिट देने के आरोप लगे हैं, और कमल नाथ जैसे दिग्गज नेता आज तक पीड़ित परिवारों से मिलने नहीं पहुंचे।
सिरप से मौतों का सिलसिला
छिंदवाड़ा के परासिया क्षेत्र में अगस्त से शुरू हुई यह त्रासदी अब 14 मौतों तक पहुंच चुकी है। जांच में पाया गया कि कोल्ड्रिफ सिरप में 48.6 प्रतिशत डायएथिलीन ग्लाइकॉल मौजूद था, जो वाहन उद्योग में इस्तेमाल होने वाला विषैला पदार्थ है। यह रसायन किडनी और दिमाग को नष्ट कर देता है। शुरुआत में 6 मौतें हुईं, लेकिन देरी से कार्रवाई के कारण संख्या बढ़ती गई। बैतूल में भी दो और मौतें हुईं, जबकि राजस्थान के भरतपुर और सीकर में तीन बच्चे शिकार बने। कुल मिलाकर 19 मासूमों की जान जा चुकी है।
पीड़ित परिवारों की आपबीती दिल दहला देने वाली है। एक मां ने बताया, "दवाई देते ही बच्चे को उल्टी शुरू हो गई। खाना-पीना छोड़ दिया, फिर किडनी फेल हो गई। नागपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।" कई बच्चे अभी भी वेंटिलेटर पर हैं, लेकिन सरकारी सहायता का अभाव है।
प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया, लेकिन उपचार खर्च परिवार खुद उठा रहे हैं। एक बच्ची का शव तक कब्र से निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया गया।
डॉक्टर प्रवीण सोनी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिन पर बच्चों को यह सिरप प्रेस्क्राइब करने का आरोप है। श्रीसन फार्मास्यूटिकल्स कंपनी (तमिलनाडु) के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई, और विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर दिया गया। लेकिन सवाल वही: मौतों के बाद ही जागने वाली व्यवस्था?
सरकार का ढीला रवैया: रिपोर्ट के खेल में डूबी रही व्यवस्था
मध्य प्रदेश सरकार पर सबसे बड़ा आरोप लापरवाही का है। पहली मौत अगस्त में हुई, लेकिन सिरप बैन सितंबर के अंत तक नहीं हुआ। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने रिपोर्ट आने से पहले ही कंपनी को क्लीन चिट दे दी। उन्होंने कहा, "सिरप से मौतें नहीं हुईं, यह अफवाह है।" लेकिन बाद में जांच में ही खामी मिली-सैंपल में विषैला पदार्थ पाया गया। सैंपल जांच में 72 घंटे का प्रोटोकॉल था, लेकिन रिपोर्ट में 6 दिन लग गए। इस देरी ने और मौतों को न्योता दिया।
राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल पर भी झूठ बोलने के आरोप हैं। परिवारों के फोन पर उन्होंने कहा, "मैं क्षेत्र में हूं, कल देखते हैं।" लेकिन वे भोपाल में थे। ड्रग कंट्रोलर दिनेश मौर्य पर कोई कार्रवाई न करने का इल्जाम लगा। तमिलनाडु सरकार ने महीनों पहले चेतावनी दी थी, लेकिन मध्य प्रदेश में अनदेखी हुई। केंद्र सरकार ने भी 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न देने की सलाह दी थी, लेकिन अमल नहीं हुआ।
आज मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव छिंदवाड़ा पहुंच रहे हैं। उनका दौरा पीड़ित परिवारों से मिलने और हालात का जायजा लेने के लिए है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि यह महज दिखावा है। सरकार ने अब सिरप पर बैन लगाया, लेकिन पहले क्यों नहीं? सीएजी रिपोर्ट में भी दवाओं की खरीद-बिक्री में भ्रष्टाचार उजागर हुआ-263 दवाएं एक्सपायर हो गईं।
कमल नाथ का 'परिवार' आज भी गायब
विपक्ष पर भी उंगलियां उठ रही हैं। कांग्रेस के दिग्गज कमल नाथ, जो छिंदवाड़ा को "मेरा परिवार" कहते हैं और जहां की जनता ने उन्हें 45 साल तक जिताया, आज तक पीड़ित परिवारों से नहीं मिले। उनके बेटे और पूर्व सांसद नकुल नाथ भी गायब हैं। कमल नाथ ने ट्वीट कर मुआवजा और इलाज का खर्च उठाने की मांग की, लेकिन जमीन पर कोई कदम नहीं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को आज अचानक "याद" आ गई। वे छिंदवाड़ा में प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं। भोपाल और जयपुर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किए, लेकिन देरी से। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार आज प्रेस वार्ता करेंगे। उन्होंने मांग की है-न्यायिक जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई, और दवा गुणवत्ता जांच। सिंघार ने कहा, "यह भ्रष्ट सिस्टम का नतीजा है। अस्पतालों में चूहे काटते हैं, दवाएं नकली मिलती हैं।"
कांग्रेस नेता कमलेश्वर पटेल ने ट्वीट कर कहा, "भाजपा सरकार की लापरवाही से 16 बच्चे शिकार बने। स्वास्थ्य मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।" लेकिन सवाल यह कि विपक्ष ने विधानसभा में 139 अमानक दवाओं पर कार्रवाई क्यों नहीं कराई? जबलपुर हाईकोर्ट में जनहित याचिका लंबित है, लेकिन चुप्पी साधे हैं।
व्यापक संकट: दवा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलती है। सरदार वल्लभभाई पटेल निशुल्क औषधि योजना के तहत दवाओं की खरीद में टेंडर एक साल से ज्यादा लेट हुए। अप्रैल 2021 से जून 2025 तक 229 सैंपलों में 138 अमानक पाए गए। इंदौर में नकली लाइफ-सेविंग ड्रग्स मिलीं, लेकिन कार्रवाई नहीं। विशेषज्ञों का कहना है कि ड्रग कंट्रोल लैब्स को मजबूत करने की जरूरत है।
कांग्रेस की मांग है-मृतकों को 50 लाख मुआवजा, बीमार बच्चों का इलाज सरकारी खर्च पर, और न्यायिक जांच। भाजपा का कहना है कि एसआईटी जांच करेगी, लेकिन जनता का गुस्सा भड़क रहा है।
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