ढाबा मालिक का कर्ज उतारने के लिए कर्मचारी बने चोर, 37 गाड़ियों का खुलासा,चोरी के रुपयों से करते थे चिकन पार्टी

ढाबा मालिक का कर्ज उतारने के लिए कर्मचारी बने चोर, 37 गाड़ियों का खुलासा,चोरी के रुपयों से करते थे चिकन पार्टी

भोपाल,1 अक्टूबर। देश में कोरोना वायरस ने किसी को लाचार बनाया, तो किसी को बेबस इतना ही नहीं, कुछ को तो चोर भी बना दिया। ऐसा ही एक मामला राजधानी भोपाल से सामने आया है। जहां कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन लगने के वजह ढाबा मालिक पर कर्जा हो गया और उसके कर्मचारी कर्जा उतारने के लिए गाड़ियों की चोरी करने लगे। इसमें भोपाल के अलावा इंदौर से चोरी की गई गाड़ियां भी शामिल हैं। भोपाल के अशोक गार्डन थाना पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 37 चोरी की टू व्हीलर गाड़ियां जब्त की है। आखिर भोपाल पुलिस ने कैसे किया यह खुलासा पढ़िए पूरी खबर।

अशोका गार्डन थाना प्रभारी और एडिशनल सीपी साईं कृष्णा ने दी जानकारी

अशोका गार्डन थाना प्रभारी और एडिशनल सीपी साईं कृष्णा ने दी जानकारी

अशोका गार्डन थाना प्रभारी आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि थाना पुलिस ने टू व्हीलर वाहन चेकिंग पॉइंट बना रखा था। दो बाइक सवारों को संदेह होने पर रोका गया। उनसे पूछताछ की गई तो दोनों गाड़ी के कागज नहीं दिखा पाए इसके बाद उनके पास जो गाड़ी थी वह चोरी की पाई गई। युवकों ने अपनी पहचान अमित राठौर निवासी हरदा व धर्मेंद्र सिंह निवासी खुशीपुरा चांदबाद बजरिया के रूप में बताई। जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो उन्होंने स्वीकार कर लिया कि वह गाड़ी चोरी करके लाए।

रिमांड पर लेने के बाद 37 गाड़ियों का हुआ खुलासा

रिमांड पर लेने के बाद 37 गाड़ियों का हुआ खुलासा

पुलिस द्वारा रिमांड पर लेने के बाद आरोपियों ने खुलासा करते हुए बताया कि उन्होंने अब तक दर्जनों वाहन की चोरी की है। पुलिस ने उनकी निशानदेही पर 17 और दो पहिया वाहन को जप्त कर लिया। इसके बाद पुलिस लगातार उनसे पूछताछ कर रही थी। जिसमें आरोपियों ने बताया कि उन्होंने दीपक रघुवंशी किशन सेन और दिनेश चौरसिया को करीब 20 दोपहिया वाहन बेच दिए थे। इसके बाद पुलिस ने उन सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पांच आरोपियों के पास से कुल 37 चोरी के दो पहिया वाहन बरामद किए गए। जिनकी कीमत करीब 32 लाख रुपए के आसपास बताई जा रही है।

ढाबा मालिक पर कर्जा चढ़ने के कारण बने चोर

ढाबा मालिक पर कर्जा चढ़ने के कारण बने चोर

धर्मेंद्र सिंह इंदौर में ढाबा चलात था। ढाबे पर किशन शराब सप्लाई करता था और अमित वेटर का काम करता था। लेकिन लोग डाउन के दौरान ढाबा ठप हो गया ढाबा संचालक और कर्मचारी कर्जे में डूब गए। इस दौरान धर्मेन 8 महीने तक किसान और अमित का खर्चा उठाते रहे। लेकिन कर्ज बहुत ज्यादा बढ़ गया तो उन्होंने चोरी करके कर्जा उतारने का सोचा। तब से वह लगातार चोरी कर रहे थे। आरोपियों ने पहले इंदौर में एक दो वाहन की चोरी की। उसके बाद धर्मेंद्र और अमित भोपाल के खुशीपुरा में रहने लगे जबकि किशन विदिशा चला गया था

चोरी की गई गाड़ियों को बेचकर शराब व चिकन पार्टी करते थे पार्टी

चोरी की गई गाड़ियों को बेचकर शराब व चिकन पार्टी करते थे पार्टी

विदिशा में किशन ने चोरी की गई गाड़ियों को उसके दोस्त दीपक रघुवंशी के खेत में शबाना शुरू कर दिया था। उसके करने दोस्त दिनेश चौरसिया गांव अमरपुरा थाना सिद्दीक गंज जिला सीहोर में वाहन बेचने में शामिल था। वाहन चोरी करने के बाद आरोपी उसे भेज देते थे। और इससे मिलने वाले पैसे को वह शराब पार्टी और चिकन में खर्च करते थे। और बाकी के पैसे धर्मेंद्र को भेजते थे, जिससे मैं अपना कर्जा उतार सके।

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