Success Story: कभी अंग्रेजी के लिए क्लास में उड़ता था मजाक, IAS बन सुरभि ने बंद की बोलती
सतना 11, जुलाई। किसी भी युवा के लिए कंपटीशन एग्जाम क्लियर करना आसान नहीं होता है। इसके लिए उन्हें वर्षों की कड़ी मेहनत के साथ कई त्याग भी करने पड़ते हैं। वहीं, अगर आप UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आपकी मेहनत और समस्या दोगुनी हो जाती है। गांव घर में रहकर इस परीक्षा की तैयारी करना और इसको क्रैक करने की उम्मीद करना भी मुश्किल है। लेकिन इन उम्मीदों से एक कदम आगे बढ़कर गांव-देहात परिवेश की एक लड़की ने UPSC परीक्षा को क्रैक कर इस परीक्षा के बारे में पहले से तय सभी मापदंड़ों को तोड़ दिया। इस लड़की ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से इस बात को साबित कर दिया कि, अगर आप एक बार ठान लें, तो आप अपने सपने को पूरा कर सकते हो।
हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश सतना जिले की रहने वाली सुरभि गौतम की। जिसने विषम परिस्थितियों को पार कर वर्ष 2016 में सिविल सर्विसेज में ऑल इंडिया 50वीं रैंक हासिल करके देश का नाम रोशन किया है।

जानें सुरभि गौतम के बारे में
सतना जिले के मैहर विकासखंड अंतर्गत आने वाले एक छोटे से गांव अमदरा में एक वकील-शिक्षिका परिवार के यहां सुरभि ने जन्म लिया। शुरुआती शिक्षा के लिए परिवार के अन्य बच्चों की तरह सुरभि का एडमिशन भी गांव के सरकारी स्कूल में हुआ। यह हिंदी मीडियम स्कूल था। सुरभि बचपन से ही पढ़ने में काफी होशियार थी, लेकिन परिवार के ज्यादातर सदस्यों के लिए यह कोई बड़ी बात नहीं थी। मध्य प्रदेश के स्कूलों में उस समय पांचवीं में भी बोर्ड परीक्षा होती थी।
जब 5वीं का रिजल्ट आया तो स्कूल के शिक्षकों ने सुरभि को बुलाया और पीठ थपथपाते हुए कहा, 'आपको गणित में शत-प्रतिशत नंबर मिले हैं। मैंने बोर्ड परीक्षा में आज तक किसी को 100 में 100 लाते नहीं देखा। आगे आप बहुत अच्छा करोगी।' सुरभि के लिए ये जादुई शब्द थे, जो जिंदगी भर के लिए दिमाग में बस गए। इसके बाद सुरभि पढ़ाई और भी लगन से करने लगी। इसी बीच उनके जोड़ों में कभी-कभी दर्द उठने लगता था, पर वह उसे नजरअंदाज करती रहीं। धीरे-धीरे दर्द पूरे शरीर में फैल गया, और एक दिन वह बिस्तर ले ली।

रूमैटिक फीवर से करना पड़ा मुकाबला
सुरभि के शरीर में जब लगातार दर्द रहने लगा तो उनके माता-पिता सुरभि को लेकर जबलपुर अस्पताल ले गए। वहां के स्पेशलिस्ट डॉक्टर ने कहा, सुरभि को 'रूमैटिक फीवर' है। यह बीमारी हृदय को नुकसान पहुंचाती है और कुछ मामलों में मौत भी हो जाती है। यह सुनकर माता-पिता होश उड़ गए थे। डॉक्टर ने सुरभि को हर 15 दिन पर पेनिसिलिन का सिरिंज लगाने की सलाह दी। गांव में कुशल डॉक्टर था नहीं, इसलिए हर 15वें दिन पर सुरभि को जबलपुर अस्पताल जाना पड़ता। पर कमजोर शरीर , अभावों के बीच भी सुरभि ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी।
इस दौरान सुरभि गौतम ने एक साथ कई कई तरह की अपनी लड़ाई लड़ी। सुरभि को 10वीं बोर्ड में गणित के साथ विज्ञान में भी 100% नंबर मिले। उन्हें मध्य प्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में गिना गया। उस समय मीडिया में जो खबर छपी उसमें लिखा गया कि सुरभि कलेक्टर बनना चाहती हैं, जबकि सुरभि के दिमाग में उस समय तक ऐसा कोई ख्याल नहीं था। हालांकि इन न्यूजओं के कारण उनका झुकाव UPSC की तरफ हो गया।

इंग्लिश बनी सबसे बड़ी मुश्किल
12वीं में भी अच्छे नंबर आने के बाद उन्होंने एक स्टेट इंजीनियरिंग एंट्रेंस परीक्षा क्लियर की और भोपाल के एक इंजीनियरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन्स में प्रवेश लिया। सरकारी स्कूल में पढ़ाई के दौरान वह अपने स्कूल की सबसे बेस्ट विद्यार्थी थीं। सुरभि जब स्कूल से निकलकर कॉलेज पहुंची तो वहां उनकी दुनिया बिल्कुल बदली हुई थी। वह एक हिंदी मीडियम की छात्रा रही थीं और यहां आने वाले ज्यादातर स्टूडेंट इंग्लिश मीडियम से थे।
ऐसे में वहां वहां जाकर स्टार्टिंग में वह हीन भावना की शिकार हो गईं। कल तक जो लड़की अपने स्कूल में पहली कुर्सी पर बैठती थी। अब वह पीछे बैठने लगी थी। उसे इस बात का बुरा लग रहा था कि, कोई उस पर ध्यान भी नहीं देता। लेकिन सुरभि ने अपनी हीन-भावना से निकलकर खुद को एक बार फिर स्थापित करने का ठाना। उन्होंने अपनी इंग्लिश पर फोकस करना शुरू किया।

सुरभि सपनों में भी करती थीं इंग्लिश में बात
अंग्रेजी लेवल से परेशान सुरभि ने अपनी अंग्रेजी सुधारने के लिए खुद से इंग्लिश में बात करना शुरू कर दिया। सुरभि प्रतिदिन कम से कम 10 वर्ड मीनिंग याद करती थी। सुरभि दीवारों पर वर्ड मीनिंग लिखती थी और उसे दिन में कई बार दोहराया करती थी। कहीं से भी सुने गए फ्रेज और शब्दों को वह याद करती और अपनी अंग्रेजी इम्प्रूव करने के लिए काम करती थी। सुरभि ने इंग्लिश में सपने देखने शुरू कर दिए। उनके सपने में सब इंग्लिश में बात किया करते थे। इस दौरान उनके दिमाग में अंग्रेजी ने ऐसा असर किया कि वो खुद से अंग्रेजी में ही बात करने लगी।
इसका असर यह रहा कि सुरभि ने अपने ग्रेजुएशन के प्रथम सेमेस्टर में टॉप किया और इसके लिए उन्हें कॉलेज चांसलर अवार्ड भी दिया गया। उन्होंने खुद पर मेहनत करने के दौरान खुद को बाहरी लालच से दूर रखा। उनके दिमाग में हमेशा ये बात रहती थी कि उन्हें अपने सपने पूरे करने हैं। इस दौरान वह अपने अन्य दोस्तों की तरह पिक्चर देखने या घूमने नहीं जाया करती थीं। पूरा समय अपनी पढ़ाई को दिया और मन बनाया कि कुछ बनने के बाद ही वह घूमना-फिरना करेंगी।

सुरभि ने सभी परीक्षाओं को किया क्रैक
कॉलेज में प्लेसमेंट के दौरान सुरभि को टीसीएस कंपनी में नौकरी मिल गई, लेकिन उन्होंने ज्वाइन नहीं किया। इसके बाद उन्होंने लगातार BARC,MPPSC, ISRO, GTE,FCI, SAIL, SSC, और दिल्ली पुलिस जैसे कई कंपटीशन परीक्षाओं में भाग लिया और सभी को क्रैक कर लिया। वही वर्ष 2013 में सुरभि ने IAS की परीक्षा भी पास कर ली। इसमें उनकी ऑल इंडिया फर्स्ट रैंक आई। लेकिन सुरभि ने अपना लक्ष्य आईएएस बनना तय कर रखा था। इसलिए, उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और वर्ष 2016 में देश का सबसे कठिन माने जाने वाले UPSC परीक्षा में सुरभि ने अपने पहले प्रयास में 50वीं रैंक हासिल कर ली। इस परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को जागरूक करते हुए सुरभि कहती हैं कि कोई भाषा बाधा नहीं होती, ठान लीजिए तो वह आपके अधिकार में होगी।












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