Bhopal MP News: MPPSC की तैयारी कर रही छात्रा ने की खुदकुशी, 20 वर्षीय डॉली निमोदा ने फांसी लगाकर दी जान
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक ऐसी घटना घटी, जो हर किसी के दिल को छू गई। MPPSC (मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग) की तैयारी कर रही एक 20 वर्षीय मासूम छात्रा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतका का नाम डॉली निमोदा था, जो सीहोर जिले की मूल निवासी थी।
कटारा हिल्स हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अपनी बड़ी बहन प्रियंका निमोदा और चचेरे भाई रोहित के साथ रहने वाली डॉली मिर्गी की बीमारी से जूझ रही थी और दवाओं पर निर्भर थी। परिवार के सदस्य घर लौटे तो खिड़की से उनका लटका शव दिखा।

एक सामान्य शाम जो बनी परिवार का काला अध्याय
यह हादसा 21 सितंबर 2025 की शाम को हुआ। डॉली निमोदा भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में रहती थीं, जो शहर का एक शांतिपूर्ण आवासीय क्षेत्र है। यह कॉलोनी हाउसिंग बोर्ड द्वारा विकसित की गई है, जहां ज्यादातर परिवार और छात्र रहते हैं। डॉली मूल रूप से सीहोर जिले के एक छोटे से गांव की रहने वाली थीं। वे अपनी पढ़ाई के लिए भोपाल आई थीं और MPPSC की तैयारी में जुटी हुई थीं। MPPSC मध्य प्रदेश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है, जिसमें हर साल लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं। डॉली जैसे युवा छात्र अक्सर लंबे समय तक पढ़ाई और कोचिंग के दबाव में रहते हैं।
डॉली की उम्र महज 20 साल थी। वे अपनी बड़ी बहन प्रियंका निमोदा और चचेरे भाई रोहित के साथ एक छोटे से फ्लैट में रहती थीं। प्रियंका एक प्राइवेट जॉब करती हैं, जबकि रोहित भी नौकरीपेशा हैं। परिवार ने बताया कि डॉली बचपन से ही मिर्गी (एपिलेप्सी) की बीमारी से पीड़ित थीं। यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें दौरे पड़ते हैं और व्यक्ति को नियमित दवाइयां लेनी पड़ती हैं। डॉली रोजाना दवाइयां लेती थीं और डॉक्टरों के संपर्क में रहती थीं। परिवार का कहना है कि बीमारी के कारण डॉली कभी-कभी उदास रहती थीं, लेकिन हाल ही में सब ठीक लग रहा था।
शाम के करीब 6 बजे प्रियंका और रोहित काम से लौटे। बाहर से घर में कोई हलचल न दिखी। जब वे अंदर घुसने की कोशिश की, तो दरवाजा अंदर से बंद था। चिंता बढ़ी तो उन्होंने खिड़की से झांका। वहां का नजारा देखकर दोनों का दिल बैठ गया - डॉली का शव कमरे में लगे पंखे से लटका हुआ था। फंदा एक साड़ी या दुपट्टे से बना था। बहन प्रियंका चीख पड़ीं, और रोहित ने तुरंत पड़ोसियों को बुलाया। पड़ोसी इकट्ठा हो गए, लेकिन दरवाजा तोड़ना पड़ा। रोहित ने दरवाजा तोड़ा और अंदर घुसकर डॉली को उतारा, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। डॉली की सांसें थम चुकी थीं।
परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था। प्रियंका ने बताया, "डॉली मेरी छोटी बहन थी, हम दोनों साथ-साथ रहती थीं। वह MPPSC क्रैक करने का सपना देख रही थी। कल ही हमने डिनर प्लान किया था।" रोहित ने कहा, "वह बीमारी से लड़ रही थी, लेकिन कभी शिकायत नहीं करती थी। यह क्या हो गया?" घटना की खबर फैलते ही इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। पड़ोसी और रिश्तेदार अस्पताल पहुंचे।
शव को AIIMS भेजा, कोई सुसाइड नोट नहीं
घटना की सूचना मिलते ही कटारा थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। थाने के प्रभारी अधिकारी ने बताया कि पुलिस ने घर की तलाशी ली, लेकिन कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। कमरे में सब कुछ सामान्य था - किताबें, नोट्स और MPPSC की तैयारी की सामग्री बिखरी हुई थी। डॉली का मोबाइल फोन भी मिला, जिसकी जांच की जा रही है। पुलिस ने परिवार के बयान दर्ज किए। प्रारंभिक जांच में यह आत्महत्या ही लग रही है, लेकिन बीमारी या पढ़ाई के दबाव की वजह हो सकती है।
शव को पोस्टमॉर्टम (पीएम) के लिए भोपाल के AIIMS (अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान) भेज दिया गया। AIIMS भोपाल मध्य प्रदेश का प्रमुख मेडिकल संस्थान है, जहां फॉरेंसिक जांच होती है। पीएम रिपोर्ट आने के बाद मौत का सटीक कारण पता चलेगा। कटारा थाना पुलिस ने IPC की धारा 174 (मर्ग जांच) के तहत मामला दर्ज किया है। जांच अधिकारी ने कहा, "हम परिवार, दोस्तों और कोचिंग से बयान लेंगे। कोई संदिग्ध परिस्थिति नजर नहीं आ रही, लेकिन पूरी पड़ताल करेंगे।" पुलिस ने डॉली के मेडिकल रिकॉर्ड भी मंगवाए हैं, ताकि मिर्गी की दवाओं का असर जांचा जा सके।
एक होनहार छात्रा की अधूरी कहानी
डॉली निमोदा सीहोर जिले के एक साधारण परिवार से थीं। उनके माता-पिता गांव में रहते हैं, जबकि डॉली भोपाल में पढ़ाई के लिए आई थीं। वे स्नातक पूरी कर चुकी थीं और MPPSC की तैयारी में लगी हुई थीं। कटारा हिल्स में कई कोचिंग सेंटर हैं, जहां डॉली नियमित जाती थीं। दोस्तों ने बताया कि वह मेहनती थी, लेकिन कभी उदासी की बात नहीं करती थी। एक सहपाठी ने कहा, "डॉली क्लास में हमेशा टॉप करती थी। कल ही हमने नोट्स शेयर किए थे। यह जानकर सदमा लग रहा है।"
मिर्गी की बीमारी ने डॉली की जिंदगी को प्रभावित किया था। यह बीमारी युवाओं में आम है, लेकिन सही इलाज से नियंत्रित हो सकती है। भारत में हर साल हजारों युवा डिप्रेशन या बीमारी के कारण आत्महत्या करते हैं। एनसीआरबी के 2024 डेटा के अनुसार, मध्य प्रदेश में 10,000 से ज्यादा सुसाइड केस दर्ज हुए, जिनमें छात्रों का बड़ा हिस्सा है। MPPSC जैसी परीक्षाओं का दबाव अक्सर छात्रों को तोड़ देता है। परिवार ने बताया कि डॉली का अंतिम संस्कार सोमवार को होगा। सीहोर से माता-पिता भोपाल पहुंच चुके हैं।
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