भोपाल के स्पर्श भवन में दूषित भोजन से 15 बच्चे बीमार — परिवारों को सूचना तक नहीं, लापरवाही पर उठे बड़े सवाल
Bhopal Food Poisoning: मध्य प्रदेश की राजधानी में विकलांग बच्चों की देखभाल करने वाले सरकारी संस्थान स्पर्श भवन (मुख बधिर एवं दृष्टिबाधित बच्चों का छात्रावास) में एक बार फिर लापरवाही की शिकायत सामने आई है। 15 फरवरी 2026 की शाम को छात्रावास में दिए गए दूषित भोजन से कम से कम 15 बच्चे बीमार पड़ गए।
बच्चों की हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उनके परिवारजनों को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई। मंगलवार को जब बच्चे अस्पताल से छुट्टी लेकर वापस लौटे, तब भी विभाग के किसी अधिकारी ने न तो अस्पताल में जाकर बच्चों का हाल जाना और न ही छात्रावास में जाकर घटना की जांच की।

क्या हुआ था 15 फरवरी को?
स्पर्श भवन ईदगाह हिल्स क्षेत्र में स्थित है। यहां मुख बधिर (बहरे) और दृष्टिबाधित (अंधे) बच्चे रहते हैं। 15 फरवरी की शाम को इन बच्चों को नियमित भोजन दिया गया। खाने के कुछ घंटे बाद ही बच्चों में उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार के लक्षण दिखने लगे।
छात्रावास के कर्मचारियों ने तुरंत बच्चों को हमीदिया अस्पताल ले जाया, जहां उन्हें इमरजेंसी वार्ड में भर्ती किया गया। डॉक्टरों ने प्रारंभिक जांच में दूषित भोजन से फूड पॉइजनिंग होने की पुष्टि की।
परिवारजनों का आरोप है कि बच्चों को अस्पताल भर्ती किए जाने के बावजूद सामाजिक न्याय विभाग के किसी अधिकारी ने उन्हें फोन तक नहीं किया। एक मां ने गुस्से में कहा, "मेरा बेटा अस्पताल में जीवन-मरण की लड़ाई लड़ रहा था और मुझे पता तक नहीं चला। अगर कुछ हो जाता तो हम कैसे जान पाते?"
विभाग की लापरवाही पर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब स्पर्श भवन में ऐसी घटना हुई है। 20 जनवरी 2026 को छात्रावास में ही एक बच्चे के साथ दूसरे बच्चे द्वारा अनैतिक कृत्य (यौन शोषण) की घटना सामने आई थी। पीड़ित बच्चे की मां ने विभाग में बार-बार शिकायत की, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। महिला ने कहा, "मेरा बच्चा आज भी ट्रॉमा से गुजर रहा है। विभाग में कोई सहानुभूति नहीं दिखाता, न कोई जांच करता है।"
मामले की गंभीरता को देखते हुए कई सवाल उठ रहे हैं:
दूषित भोजन कैसे तैयार हुआ? रसोई की सफाई और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच कौन करता है?
बच्चों को अस्पताल भर्ती किए जाने की सूचना परिवार को क्यों नहीं दी गई?
घटना के बाद विभाग के अधिकारी छात्रावास क्यों नहीं पहुंचे?
अगर बच्चों की जान चली जाती तो जिम्मेदार कौन होता?
सामाजिक न्याय विभाग पर उठे सवाल
स्पर्श भवन सामाजिक न्याय विभाग के अधीन आता है। विभाग के अधिकारी इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। जब मीडिया ने संपर्क किया तो एक अधिकारी ने सिर्फ इतना कहा, "जांच की जा रही है।" लेकिन स्थानीय लोगों और पीड़ित परिवारों का कहना है कि यह "जांच की जा रही है" वाला जवाब अब रट गया है। आए दिन यहां घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन सख्त कार्रवाई कभी नहीं होती।
आदिवासी और विकलांग कल्याण संगठनों ने इस घटना की निंदा की है। एक संगठन के नेता ने कहा, "ये बच्चे पहले से ही दिव्यांग हैं। सरकार इन्हें संरक्षण देने का दावा करती है, लेकिन हकीकत में इनकी सुरक्षा और देखभाल की जिम्मेदारी पूरी तरह से निभाई नहीं जा रही है।"
परिवारों की मांग
पीड़ित परिवारों ने तीन मांगें रखी हैं:
- स्पर्श भवन में हुई पूरी घटना की निष्पक्ष जांच हो और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
- बच्चों को बेहतर चिकित्सा सुविधा और मनोवैज्ञानिक सहायता दी जाए।
इस घटना ने एक बार फिर सवाल उठा दिया है कि क्या विकलांग बच्चों की देखभाल के लिए बने सरकारी संस्थानों में वाकई बच्चों की सुरक्षा है? या ये संस्थान सिर्फ कागजों में चल रहे हैं? अगर विभाग समय रहते सख्त कदम नहीं उठाता, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
मामले पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और सामाजिक न्याय मंत्री से जवाब की मांग की जा रही है। भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता और मीडिया अब इस मामले को लगातार उठा रहे हैं, ताकि मासूम बच्चों के साथ न्याय हो सके।
क्या विभाग अब जागेगा? या फिर "जांच चल रही है" का राग अलापता रहेगा?
यह सवाल हर उस मां के मन में है, जिसका बच्चा स्पर्श भवन जैसे संस्थानों में रहता है।












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