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Vidisha News: दीपावली पर विदिशा में कार्बाइड गन से 5 बच्चों की आंखें खतरे में, SP रोहित काशवानी ने की ये अपील

MP News: दीपावली का उत्सव जहां पूरे देश में रोशनी, मिठास और खुशियों का संदेश लेकर आया है, वहीं मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में यह त्योहार एक गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय बन गया है। शहर और ग्रामीण इलाकों में बिक रही 'कार्बाइड गन'-एक सस्ते और खतरनाक खिलौने-के कारण हाल ही में 5 बच्चों को गंभीर आंखों की चोटें लगी हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

पुलिस अधीक्षक (एसपी) रोहित काशवानी ने आमजन से सख्त अपील जारी की है कि इन गन से सावधान रहें, क्योंकि इनके उपयोग से बच्चों को स्थायी नेत्र विकलांगता तक हो सकती है। विदिशा पुलिस ने विक्रेताओं के खिलाफ तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी है, जिसमें जब्ती और एफआईआर शामिल हैं।

SP Rohit Kashwani appeal 5 children to put their eyes at risk due to carbide gun Vidisha on Diwali

यह घटना न केवल अभिभावकों को सतर्क कर रही है, बल्कि पूरे प्रदेश में पटाखों और खिलौनों की बिक्री पर सवाल खड़े कर रही है। आइए, इस मुद्दे की गहराई में उतरें-जिसमें खतरे की पूरी तस्वीर, पुलिस की कार्रवाई और रोकथाम के उपाय शामिल हैं।

कार्बाइड गन का खौफ: सस्ता खिलौना, महंगा नुकसान

कार्बाइड गन, जिसे स्थानीय भाषा में 'कार्बाइड पटाखा' या 'मिनी रॉकेट गन' भी कहा जाता है, एक प्लास्टिक या धातु का छोटा उपकरण है जिसमें कैल्शियम कार्बाइड पाउडर भरा होता है। बच्चे इसे पानी डालकर फायर करते हैं, जो तेज धमाके के साथ गोले की तरह उड़ता है। दीपावली के मौसम में सड़कों, बाजारों और गांवों में 20-50 रुपये में आसानी से उपलब्ध यह खिलौना रोमांच तो देता है, लेकिन इसके धुएं और विस्फोट से आंखों को भारी नुकसान पहुंचता है। एसपी रोहित काशवानी ने बताया, "ये गन बिना किसी लाइसेंस के बिक रही हैं, जो विस्फोटक अधिनियम 1884 का उल्लंघन है। हाल के प्रकरणों में बच्चों की आंखों में जलन, सूजन और दृष्टि हानि देखी गई है। हमने 5 बच्चों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि देर होने पर स्थायी अंधापन हो सकता है।"

पिछले 48 घंटों में विदिशा शहर के वार्ड नंबर 12 और ग्रामीण क्षेत्रों जैसे गुना रोड व सिरोंज तहसील में ऐसे 3 मामले दर्ज हुए। एक 8 वर्षीय बालक को गंभीर चोट लगी, जिसकी आंख में कार्बाइड का कण फंस गया। अभिभावक रमेश शर्मा ने कहा, "बच्चा उत्सव में खेल रहा था, लेकिन अब अस्पताल में है। ये गन इतनी आसानी से बिक रही हैं कि रोकना मुश्किल हो गया।" विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बाइड रासायनिक प्रतिक्रिया से एसिटिलीन गैस पैदा करता है, जो आंखों की झिल्ली को जला देता है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत यह खिलौना बच्चों के लिए प्रतिबंधित श्रेणी में आता है, लेकिन अवैध बिक्री जारी है।

एसपी रोहित काशवानी की अपील: सावधानी बरतें, बच्चों को बचाएं

एसपी रोहित काशवानी, जो हाल ही में विदिशा पहुंचे हैं, ने सोमवार शाम को सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया के माध्यम से अपील जारी की। उन्होंने कहा, "विदिशा पुलिस आमजन से अपील करती है कि शहर एवं देहात क्षेत्रों में बेची जा रही कार्बाइड गन से सावधान रहें। इनके उपयोग से बच्चों को आंखों संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। हाल ही में ऐसे कुछ प्रकरण सामने आए और 5 बच्चे अस्पताल में भर्ती हुए हैं।" काशवानी ने अभिभावकों से विशेष अनुरोध किया कि बच्चों को इनसे दूर रखें और पड़ोसियों को भी जागरूक करें।

उनकी अपील में जोर दिया गया है: "सुरक्षित रहें, अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। यदि कोई विक्रेता दिखे, तो तुरंत 100 डायल करें।" एसपी ने बताया कि पुलिस ने विशेष स्क्वॉड गठित किए हैं, जो बाजारों और गांवों में घूम रहे हैं। दीपावली से पहले ही 20 से अधिक दुकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें 500 से ज्यादा गन जब्त हुईं। एक विक्रेता पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। काशवानी ने कहा, "हमारी प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा है। त्योहार खुशियों का है, हादसों का नहीं।"

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: छापेमारी, जागरूकता अभियान और कानूनी कदम

विदिशा पुलिस ने इस खतरे को गंभीरता से लिया है। एसपी के निर्देश पर थाना प्रभारियों को अलर्ट किया गया, और सोमवार को ही संयुक्त अभियान चलाया गया। शहर के मुख्य बाजार जैसे नरसिंह बाजार और ग्रामीण हाटों में पुलिस टीमों ने सघन जांच की। एक प्रकरण में, सिरोंज के एक दुकानदार को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास 200 कार्बाइड गन बरामद हुईं। पुलिस ने विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की।

जिला कलेक्टर ने भी प्रशासनिक आदेश जारी कर बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया।

जागरूकता के लिए पुलिस ने स्कूलों और मोहल्ला समितियों के साथ मिलकर पोस्टर वितरण और व्हाट्सएप ग्रुप्स पर संदेश भेजे। एनएसएस वॉलंटियर्स ने गांवों में नुक्कड़ नाटक किए, जहां कार्बाइड गन के खतरों को दर्शाया गया। एक अधिकारी ने बताया, "हमने 50 से अधिक अभिभावकों को काउंसलिंग दी। अगले 24 घंटों में और छापे होंगे।" मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने भी सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि पटाखों पर निगरानी बढ़ाएं, खासकर बच्चों के खिलौनों पर।

दीपावली का संदर्भ: उत्सव में सुरक्षा पहले

यह अपील दीपावली के ठीक बीच आ रही है, जब बाजारों में पटाखों की बिक्री चरम पर है। मध्य प्रदेश में पिछले वर्ष 2024 में पटाखों से 150 से अधिक हादसे हुए थे, जिसमें 20 बच्चों को चोट लगी। विदिशा जैसे कृषि-प्रधान जिले में ग्रामीण बच्चे इन गनों को 'खेल' समझकर खरीद लेते हैं। विशेषज्ञ डॉ. अनिल वर्मा, नेत्र रोग विशेषज्ञ ने कहा, "कार्बाइड से लगी चोटें 70% मामलों में स्थायी होती हैं। अभिभावक सुपरविजन रखें और सुरक्षित विकल्प जैसे LED लाइट्स चुनें।"

रोकथाम के उपाय: क्या करें अभिभावक और समाज?

  • बच्चों को समझाएं: त्योहार में रोमांच ठीक है, लेकिन खतरनाक खिलौनों से दूर रहें। सुरक्षित पटाखे जैसे अनार या फुलझड़ियां चुनें।
  • रिपोर्ट करें: विक्रेता दिखने पर फोटो लें और पुलिस को सूचित करें।
  • चिकित्सा सहायता: चोट लगने पर तुरंत आंख धोएं और अस्पताल जाएं। जिला अस्पताल में विशेष नेत्र कैंप लगाए गए हैं।
  • समाज की भूमिका: मोहल्ला कमेटियां बनाएं और जागरूकता फैलाएं।

एसपी काशवानी ने अंत में कहा, "दीपावली रोशनी का त्योहार है, अंधेरे का नहीं। मिलकर इसे सुरक्षित बनाएं।" यह अपील न केवल विदिशा, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक सबक है। क्या आप भी अपने बच्चों को बचा लेंगे?

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