Bhopal News: शीतलदास की बगिया में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, झूलेलाल चालिया महोत्सव में विश्व कल्याण की प्रार्थना
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सिंधी समाज का प्रमुख पर्व, झूलेलाल चालिया महोत्सव, 16 जुलाई से 24 अगस्त 2025 तक पूरे धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस 40 दिवसीय महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार, 25 जुलाई 2025 को शीतलदास की बगिया में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा।
सैकड़ों भक्तों ने विधि-विधान से पल्लव धारण कर भगवान झूलेलाल के समक्ष जल की आराधना की और विश्व शांति, सौहार्द और कल्याण की प्रार्थना की। यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि सिंधी समाज की सांस्कृतिक एकता और परंपराओं को भी जीवंत करता रहा।

40 दिन की तपस्या: परंपरा और आस्था का संगम
झूलेलाल चालिया महोत्सव सिंधी समाज का सबसे महत्वपूर्ण और गौरवशाली पर्व है, जो 40 दिनों तक चलता है। इस दौरान भक्त कठोर व्रत, साधना और तपस्या करते हैं। झूलेलाल की फौज के अध्यक्ष पंडित रवि शर्मा ने इस अवसर पर कहा, "हमारे बुजुर्गों ने 40 दिन तक भगवान झूलेलाल की कठोर आराधना कर हिंदू धर्म की रक्षा और आशीर्वाद मांगा था। उसी परंपरा को हम आज भी जीवित रखे हुए हैं। यह तपस्या हमें धैर्य, आस्था और एकता का संदेश देती है।"
महोत्सव के दौरान भक्त अखंड ज्योति की पूजा-अर्चना करते हैं, जो जल और जीवन के प्रतीक भगवान झूलेलाल की भक्ति का केंद्र होती है। मान्यता है कि इन 40 दिनों तक विधिपूर्वक पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सुख-समृद्धि प्राप्त होती है।
विश्व और प्रदेश के कल्याण की प्रार्थना
शीतलदास की बगिया में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने पल्लव पहनकर जल के समक्ष भगवान झूलेलाल से विश्व शांति और कल्याण की प्रार्थना की। इस अवसर पर बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. दुर्गेश केसवानी भी उपस्थित थे। उन्होंने बहराना साहब का विसर्जन विधि-विधान से बड़े तालाब में किया और कहा, "हमने जल के समक्ष पल्लव पहनकर प्रार्थना की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पूरी शक्ति के साथ विश्व और मध्य प्रदेश के कल्याण के लिए कार्य करें। भगवान झूलेलाल हमें धर्म, संस्कृति और सद्भाव की राह दिखाते रहें।"

इस आयोजन में घंटों, शंखनाद और झूलेलाल की जय-जयकार से माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने विशेष पूजा-अर्चना की और सामूहिक रूप से विश्व में सुख-शांति की कामना की।
सांस्कृतिक एकता और धार्मिक उत्साह
झूलेलाल चालिया महोत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सिंधी समाज की सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है। शीतलदास की बगिया में उमड़े श्रद्धालुओं में गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम में भजन संध्या, चालीसा पाठ, आरती और अरदास का आयोजन हुआ, जिसमें समाज के हर वर्ग ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
इस महोत्सव का समापन 24 अगस्त 2025 को होगा, जिसमें बहराना साहब का विसर्जन बड़े तालाब में विधि-विधान से किया जाएगा। समापन के दिन विशेष पूजा-अर्चना और भंडारे का आयोजन भी होगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होंगे।
प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर कई प्रमुख हस्तियां और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित थे, जिनमें शामिल थे:
अधिवक्ता सुनील जैन, पंडित करन शर्मा, रवि महाराज, महाराज जीवत राम, राजेश महाराज, विजय महाराज, रोशन लाल उत्तवनी, हरीश उत्तवानी, प्रेम पाहुजा, दिलीप बच्चानी, कुशाग्र शर्मा
ग्रन्थ पाहुजा
महिलाओं में इंदु शर्मा, कविता शर्मा, सिमरन शर्मा, हर्षा शर्मा, जाह्नवी शर्मा, कविता दासवानी, ख्वाहिश दासवानी, अनीता बच्चानी, कविता कोटवानी, दीपा लालवानी, भारती लालवानी, नीता पाहुजा, श्रीमती उत्तवानी, नेहा गिदवानी, और पूजा वाधवानी सहित सैकड़ों लोग शामिल थे।
झूलेलाल चालिया महोत्सव का महत्व
झूलेलाल चालिया महोत्सव सिंधी समाज का सबसे बड़ा और पवित्र पर्व है। यह पर्व भगवान झूलेलाल, जिन्हें हिंदू सिंधी समुदाय वरुण देव का अवतार मानता है, को समर्पित है। मान्यता है कि झूलेलाल ने सिंध प्रांत में मिरखशाह जैसे अत्याचारी शासकों से हिंदू समुदाय की रक्षा की थी। इस पर्व में जल की आराधना का विशेष महत्व है, क्योंकि झूलेलाल को जल और जीवन का देवता माना जाता है।
40 दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में भक्त कठोर नियमों का पालन करते हैं, जिसमें मांसाहार, शराब, और अन्य तामसिक भोजन से परहेज करना शामिल है। कई भक्त इस दौरान विशेष व्रत रखते हैं और अखंड ज्योति की पूजा करते हैं। यह पर्व न केवल आध्यात्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत करता है।












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