इंदौर में रिटायर्ड आबकारी अधिकारी की काली कमाई का खुलासा, लोकायुक्त छापे में 25 करोड़ की संपत्ति जब्त
मध्य प्रदेश के इंदौर में रिटायर्ड आबकारी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह भदौरिया की आय से अधिक संपत्ति का मामला दिन-ब-दिन बड़ा होता जा रहा है। लोकायुक्त पुलिस की टीम ने शुक्रवार को बैंक ऑफ बड़ौदा में भदौरिया, उनकी पत्नी सीमा और बेटे सूर्यांश के लॉकर खुलवाए, जहां से 886 ग्राम सोना बरामद हुआ।
इसकी अनुमानित कीमत 79 लाख 23 हजार रुपये है। अब तक की जांच में जब्त चल-अचल संपत्ति का कुल मूल्य 24 करोड़ 97 लाख 26 हजार 859 रुपये पहुंच गया है, जो 25 करोड़ के करीब है। लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय ने बताया कि जांच अभी जारी है और आंकड़ा और बढ़ सकता है। यह मामला आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है, जहां एक रिटायर्ड अधिकारी की 'काली कमाई' ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह छापेमारी गोपनीय शिकायत के आधार पर बुधवार से शुरू हुई थी, जो अब तीसरे दिन भी जारी है। लोकायुक्त की टीम ने इंदौर और ग्वालियर में कुल 8 ठिकानों पर दबिश दी, जहां से नकदी, सोना, लग्जरी वाहन, महंगी साड़ियां और निवेश के दस्तावेज मिले हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला मध्य प्रदेश में आबकारी विभाग के भ्रष्टाचार का एक बड़ा उदाहरण है, जहां शराब ठेकों की नीलामी और लाइसेंसिंग में करोड़ों की कमाई होती है।
लोकायुक्त की सर्जिकल स्ट्राइक: तीन दिनों में खुली काली कमाई की पोल
छापेमारी की शुरुआत बुधवार सुबह हुई, जब लोकायुक्त डीएसपी सुनील तालान के नेतृत्व वाली टीम ने इंदौर के पलासिया स्थित कैलाश कुंज निवास पर दबिश दी। यहां से 75 लाख रुपये नकद, सोने की ईंटें, जूलरी और लग्जरी कारें बरामद हुईं। गुरुवार को जांच का दायरा ग्वालियर के इंद्रमणि नगर स्थित घर और इंदौर के अन्य ठिकानों तक फैला। शुक्रवार को बैंक ऑफ बड़ौदा की पलासिया शाखा में लॉकर खोले गए, जहां से 886 ग्राम सोना मिला।
लोकायुक्त एसपी राजेश सहाय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया, "आरोपी और उनके परिवार के बैंक खातों में 1.26 करोड़ रुपये जमा हैं, जो फ्रीज कर दिए गए हैं। इसके अलावा 21 बीमा पॉलिसियों में 13.90 लाख रुपये की किस्तें भरी गई हैं। कुल चार लॉकर मिले हैं, जिनमें से एक इटावा (उत्तर प्रदेश) में है, जिसे फ्रीज किया गया है। जांच में प्रिंस स्काई पार्क स्थित फ्लैट के दस्तावेज, जेसी वेंचर्स में 27.5 लाख रुपये के निवेश के पेपर भी मिले हैं।" उन्होंने कहा कि संपत्ति का मूल्यांकन पीडब्ल्यूडी और अन्य विभागों से कराया जा रहा है, जिससे आंकड़ा बढ़ सकता है।
जब्त संपत्ति की विस्तृत सूची: सोने से लेकर लग्जरी बंगला तक
जांच में अब तक जब्त संपत्ति का कुल मूल्य 24 करोड़ 97 लाख 26 हजार 859 रुपये पहुंच गया है। इसमें नकदी, जूलरी, वाहन, संपत्ति और निवेश शामिल हैं। लोकायुक्त टीम ने महंगी साड़ियां, यूरो करेंसी और अन्य लग्जरी आइटम्स भी बरामद किए हैं।
श्रेणी,विवरण,मात्रा/संख्या,अनुमानित मूल्य (रुपये)
- नकदी,घरों से बरामद कैश,1 करोड़ 5 लाख (आरंभिक),"1,05,00,000"
- सोना,लॉकर से बरामद,886 ग्राम,"79,23,000"
- बैंक खाते,परिवार के खाते,-,"1,26,31,013"
- बीमा पॉलिसी,विभिन्न पॉलिसियां,21,"13,90,648"
- संपत्ति,प्रिंस स्काई पार्क फ्लैट और अन्य,-,"3,36,73,000 (गाइडलाइन)"
- निवेश,जेसी वेंचर्स,-,"27,50,000"
- फ्रेंचाइजी,शिवा चाइनीज वॉक (40% हिस्सा),अन्नपूर्णा और विजयनगर शॉप्स,"25,00,000 (भुगतान)"
- उधार,जितेंद्र चौधरी को दिया,-,"2,75,00,000"
- बंगला निर्माण,निजी टाउनशिप में,इटालियन स्टाइल,"10,00,00,000 (लागत)"
- अन्य,"लग्जरी कारें, टू-व्हीलर, साड़ियां",-,"5,00,00,000 (अनुमानित)"
- कुल,-,-,"24,97,26,859"
परिवार की भूमिका: बेटे-बेटी की निवेश और साझेदारी उजागर
जांच में भदौरिया का पूरा परिवार संदेह के घेरे में है। पत्नी सीमा के नाम पर बैंक लॉकर और संपत्ति मिली है। बेटे सूर्यांश ने विशाल पंवार के साथ शिवा चाइनीज वॉक फ्रेंचाइजी में साझेदारी की है, जिसमें अन्नपूर्णा और विजयनगर की दुकानों में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी ली गई। इसके बदले 25 लाख रुपये का भुगतान किया गया। सूर्यांश और बेटी ने जितेंद्र चौधरी को 2.75 करोड़ रुपये उधार दिए हैं।
इसके अलावा, सूर्यांश के नाम पर निजी टाउनशिप में प्लॉट पर 10 करोड़ की लागत से इटालियन स्टाइल बंगला बन रहा है। जांच में फिल्मों में निवेश के सबूत भी मिले हैं। लोकायुक्त टीम ने मानपुर स्थित फार्महाउस की भी जांच की, जो किसी रिश्तेदार के नाम पर है और वहां शराब कंपनी का ऑफिस चलता है।
अधिकारी का विवादित इतिहास: निलंबन से लेकर होटल कांड तक
धर्मेंद्र सिंह भदौरिया 1987 बैच के अधिकारी हैं, जो 31 अगस्त 2025 को रिटायर हुए। उनके सेवाकाल में कुल वैध आय लगभग 2 करोड़ रुपये थी, लेकिन संपत्ति इससे कई गुना अधिक है। 2020 में शराब ठेकों की नीलामी में लापरवाही के कारण निलंबित हुए थे। तीन साल पहले इंदौर के एक फाइव स्टार होटल में 50 लोगों की पार्टी दी थी, जहां बिल 2 लाख रुपये का बना। पैसे न देने पर बेटे ने चाकू लेकर स्टाफ से मारपीट की। जांच में दोषी पाए गए।
मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के बढ़ते मामले: लोकायुक्त की भूमिका
यह मामला मध्य प्रदेश में भ्रष्ट अधिकारियों पर लोकायुक्त की सख्ती को दर्शाता है। 2024-25 में लोकायुक्त ने 238 ट्रैप और छापे मारे, लेकिन गिरफ्तारी कम हुईं। हाल ही में एक अन्य मामले में 17 टन शहद, 36 लाख नकदी और 2.6 किलो सोना बरामद हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि आबकारी विभाग में शराब लाइसेंस और ठेकों से करोड़ों की कमाई होती है, जो भ्रष्टाचार का बड़ा स्रोत है।
लोकायुक्त के पूर्व अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "ऐसे मामलों में परिवार की संपत्ति को ट्रेस करना चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन डिजिटल ट्रेल से सबूत मिल जाते हैं।" राजनीतिक दलों ने इस पर प्रतिक्रिया दी है-कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा, जबकि भाजपा ने लोकायुक्त की निष्पक्षता का दावा किया।
आगे क्या? जांच जारी, गिरफ्तारी की संभावना
लोकायुक्त टीम ने कहा कि दीपावली के बाद शेष लॉकर खोले जाएंगे। इटावा लॉकर फ्रीज है। आरोपी भदौरिया को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। यदि संपत्ति वैध आय से अधिक साबित हुई, तो गिरफ्तारी और मुकदमा चलेगा। यह मामला अन्य अधिकारियों के लिए सबक है। इंदौर में अब भ्रष्टाचार पर नजर रखी जा रही है-क्या और बड़े खुलासे होंगे? जांच जारी है।












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