राजस्थान से कोरोना वैक्सीन चोरी होने के बाद अब मध्य प्रदेश से ग्रिल काटकर 853 रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराए
राजस्थान से कोरोना वैक्सीन चोरी होने के बाद अब मध्य प्रदेश से ग्रिल काटकर 853 रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराए
भोपाल, 17 अप्रैल। कोरोना वायरस का संक्रमण बेकाबू हो चुका है। रोजाना हजारों लोगों को कोविड-19 पॉजीटिव हो रहे हैं और दर्जनों मरीजों की मौत भी हो रही हैं। अस्पतालों और श्मशानों में जगह कम पड़ रही है। कोरोना संकट के दौर में इंसानियत की भी मौत हो रही है। राजस्थान की राजधानी जयपुर के कावंटिया अस्पताल से कोरोना के टीके चोरी होने का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि अब मध्य प्रदेश से रेमडेसिविर इंजेक्शन की चोरी का मामला सामने आया है।

हेलिकॉप्टर से पहुंचाए थे रेमडेसिविर इंजेक्शन
रेमडेसिविर इंजेक्शन की चोरी का यह मामला मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित हमीदिया अस्पताल का है। यहां से चोरों ने सेंट्रल स्टोर की ग्रिल काट कर 853 रेमडेसिविर इंजेक्शन चुराए हैं। मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में हेलिकॉप्टर से ये इंजेक्शन पहुंचाए थे। हमीदिया अस्पताल के मरीजों के लिए सरकार ने 853 रेमडेसिविर इंजेक्शन भेजे थे। शुक्रवार को ये इंजेक्शन अस्पताल पहुंचे थे और शनिवार को इन्हें मरीजों काे लगाया जाना था।

ब्लैक में बीस हजार रुपए में बिक रहा रेमडेसिविर इंजेक्शन
बता दें कि रेमडेसिविर इंजेक्शन ब्लैक में बेचे जाने की भी खबरें सामने आ रही है। एक इंजेक्शन बीस हजार रुपए तक में बिक रहा है। देशभर में रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए मारा मारी मची हुई है। मध्य प्रदेश में रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर हुई मारा-मारी के बीच सरकार ने इसकी आपूर्ति के लिए नई गाइडलाइन जारी की थी। केंद्र सरकार ने कुछ दिन पहले ही रेमडेसिविर के निर्यात पर रोक लगाई थी। इसे बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीजों का भी निर्यात नहीं हो सकेगा।

जानिए क्या है रेमडेसिविर इंजेक्शन?
बता दें कि रेमडेसिविर एक एंटी-वायरल दवा है, जो कथित तौर पर वायरस के बढ़ने को रोकती है। वर्ष 2009 में अमेरिका के गिलीड साइंसेस ने हेपेटाइटिस सी का इलाज करने के लिए इसे बनाया था। 2014 तक इस पर रिसर्च चला और तब इबोला के इलाज में इसका इस्तेमाल हुआ। रेमडेसिविर का इस्तेमाल उसके बाद कोरोना वायरस फैमिली के मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (मर्स या MERS) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (सार्स या SARS) के इलाज में किया गया है।












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