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MP News: नवंबर में बरसात-ठंड का डबल डोज, पहले हफ्ते में इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट, जानें पूर्वानुमान

MP News: मध्य प्रदेश में नवंबर महीने की शुरुआत ही बारिश और ठंड के अनोखे संयोग से हो रही है। पिछले 10 सालों से चला आ रहा यह ट्रेंड इस बार भी जारी है-पहले हफ्ते में चक्रवाती सिस्टम 'मोंथा' के अवशेषों और पश्चिमी विक्षोभ के असर से जोरदार बरसात, उसके बाद उत्तरी हवाओं से ठिठुरन बढ़ेगी।

मौसम विभाग (IMD) ने शनिवार को रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर और बड़वानी में 4.5 इंच तक तेज बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं, 15 जिलों में हल्की से मध्यम वर्षा का येलो अलर्ट है।

Rainy and cold weather in November rain alert in Vidisha Indore-Jabalpur Chhindwara districts

अक्टूबर का महीना भी अप्रत्याशित रहा-सामान्य से 121% ज्यादा 2.8 इंच बारिश हुई, और भोपाल में 30 अक्टूबर को 24°C का दिन का तापमान 25 सालों का सबसे ठंडा रिकॉर्ड बन गया। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस सर्दी 2010 के बाद सबसे कठोर होगी, जो जनवरी-फरवरी तक लंबी खिंच सकती है।

अक्टूबर का अप्रत्याशित रिकॉर्ड: मानसून की विदाई के बाद भी बरसात का दौर

आमतौर पर अक्टूबर में मानसून विदाई के बाद गर्मी और हल्की ठंड का मिश्रण रहता है, लेकिन 2025 में ऐसा कुछ नहीं हुआ। 16 जून को प्रवेश करने वाला मानसून 13 अक्टूबर को पूरे प्रदेश से विदा हुआ-3 महीने 28 दिन सक्रिय रहने के बाद। इसके बावजूद चक्रवाती परिसंचरण, निम्न दबाव क्षेत्र और डिप्रेशन के कारण बरसात रुकी नहीं। पूरे महीने बादल छाए रहे और सभी 55 जिलों में पानी गिरा। औसत वर्षा 2.8 इंच रही, जो सामान्य 1.3 इंच से 121% ज्यादा है। इंदौर संभाग में लक्ष्य पूरा, सागर-रीवा-जबलपुर-शहडोल में जोरदार असर, जबकि ग्वालियर-चंबल में औसत से दोगुना पानी।

तापमान में भी गिरावट आई। भोपाल में 30 अक्टूबर को अधिकतम 24°C दर्ज हुआ-पिछले 25 सालों का सबसे कम। उज्जैन, छतरपुर, नरसिंहपुर समेत कई शहरों में पारा 24°C से नीचे रहा। न्यूनतम तापमान 15-19°C के बीच लुढ़का, जैसे शिवपुरी में 15°C, खरगोन में 17°C। यह बदलाव अरब सागर के डिप्रेशन और बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से आया, जिसने किसानों को राहत तो दी लेकिन फसलों (सोयाबीन-धान) को नुकसान भी पहुंचाया। कुल मानसूनी सीजन में 48 इंच बारिश-सामान्य 37.2 इंच से 15% ज्यादा।

नवंबर का पूर्वानुमान: पहले हफ्ते बरसात, दूसरे हफ्ते ठंड का तांडव

IMD के अनुसार, नवंबर में तीन मौसमी सिस्टम (अरब सागर डिप्रेशन, बंगाल खाड़ी का चक्रवातीय परिसंचरण, उत्तर भारत का पश्चिमी विक्षोभ) सक्रिय हैं। 1-4 नवंबर तक बारिश का दौर चलेगा, 3 नवंबर के बाद साफ मौसम, लेकिन 5-6 नवंबर से तापमान गिरावट शुरू। पहले हफ्ते में नमी से ठंडक महसूस होगी, दूसरे हफ्ते उत्तरी-उत्तर-पूर्वी हवाओं से रातें ठिठुरन भरी। अधिकतम तापमान 24-28°C, न्यूनतम 15-20°C रह सकता है। ला नीना प्रभाव से सर्दी कठोर-सामान्य से कम तापमान, ज्यादा बरसात। दक्षिण-पश्चिम MP में 1 नवंबर को गरज-चमक संग छींटे पड़ने की संभावना।

जिलेवार अलर्ट: कौन से इलाकों में भारी बारिश, कहां हल्की बूंदाबांदी?

IMD ने अगले 24-72 घंटों के लिए अलर्ट जारी किए। रेड अलर्ट वाले जिलों में बाढ़-भूस्खलन का खतरा, येलो में सतर्कता बरतें।

जिला/संभाग,अलर्ट प्रकार,वर्षा की मात्रा (अगले 24 घंटे),अन्य प्रभाव

  • "रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी (इंदौर संभाग)",रेड (भारी वर्षा),4.5 इंच तक,"तेज हवा (30-40 km/h), बाढ़ का खतरा"
  • "नीमच, मंदसौर, उज्जैन, इंदौर, खरगोन, बुरहानपुर (इंदौर-उज्जैन संभाग)",येलो (हल्की-मध्यम),1-2 इंच,"बादल छाए, हल्की ठंडक"
  • "श्योपुर, मुरैना (ग्वालियर-चंबल)",येलो,1-2 इंच,गरज-चमक संग बूंदाबांदी
  • "छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, मंडला, बालाघाट (जबलपुर संभाग)",येलो,1-3 इंच,पूर्वी MP में सबसे ज्यादा असर
  • "सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी (रीवा-शहडोल)",ऑरेंज (भारी),3-4 इंच,"तूफान, फसल नुकसान संभावित"
  • "भोपाल, विदिशा, राजगढ़, गुना (भोपाल संभाग)",येलो,हल्की (0.5-1 इंच),"शाम को बूंदाबांदी, बादल"
  • पूर्वी MP (जबलपुर-रीवा): सबसे सक्रिय, 30 अक्टूबर सबसे भारी दिन। 2 नवंबर तक जारी।
  • पश्चिमी MP (इंदौर-उज्जैन): हल्की बरसात, लेकिन तापमान 23-25°C तक गिरा।
  • उत्तरी MP (ग्वालियर): हल्की वर्षा, लेकिन ठंड पहले से महसूस।
  • दक्षिणी MP: बूंदाबांदी, लेकिन 5 नवंबर से ठंड बढ़ेगी।

ठंड कितनी पड़ेगी? IMD का लंबा पूर्वानुमान

  • पहला हफ्ता (1-7 नवंबर): बारिश से न्यूनतम 18-22°C, अधिकतम 26-30°C। नमी से उमस भरी ठंडक।
  • दूसरा हफ्ता (8-15 नवंबर): उत्तरी हवाओं से न्यूनतम 12-16°C (भोपाल-इंदौर में), अधिकतम 22-26°C। कोहरा संभव।
  • पूरे महीना: सामान्य से कम तापमान, 2010 जैसी कठोर सर्दी। जनवरी-फरवरी तक लंबी, ला नीना से प्रभावित।
  • कृषि प्रभाव: रबी फसल (गेहूं-चना) को फायदा, लेकिन खरीफ अवशेष नष्ट हो सकते। किसानों को सतर्क रहने की सलाह।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ? 'मोंथा' का असर और सावधानियां

चक्रवात 'मोंथा' के अवशेष पूर्वी विदर्भ-छत्तीसगढ़ से MP में नमी ला रहे। 3 नवंबर तक सक्रिय, उसके बाद शुष्क। IMD डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय मोहपात्रा ने कहा, "नवंबर में मिश्रित मौसम-पूर्वी भारत में ज्यादा बरसात, उत्तर में ठंड।"

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