MP News: जानिए नरसिंहपुर के होटल 80 लाख लूट ड्रामे का कैसे हुआ पर्दाफाश, नकली पिस्तौल और जेल गए सभी आरोपी
नरसिंहपुर जिले में 3 फरवरी को होटल में हुई 80 लाख रुपए की कथित लूट अब पूरी तरह एक स्क्रिप्टेड ड्रामा साबित हो चुकी है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने महज 40 रुपए की नकली पिस्टल दिखाकर लूट की कहानी रची थी। सभी आरोपी इस वक्त जेल में हैं।
पूछताछ में सामने आया कि आरोपी जल्द अमीर बनकर लग्जरी लाइफ जीना चाहते थे और गर्लफ्रेंड पर पैसा उड़ाने के सपने देख रहे थे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस पूरे नाटक की परत-दर-परत सच्चाई उजागर कर दी।

होटल मैनेजर ही निकला मास्टरमाइंड
इस हाई-प्रोफाइल लूट कांड का मुख्य आरोपी होटल कुसुम वैली का मैनेजर चंद्रेश रजक है। उसके साथ राकेश शुक्ला, अखिलेश महदेले, अनुज वाल्मीकि और मोनू उर्फ टुईया वंशकार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसके अलावा दो नाबालिग भी इस साजिश में शामिल पाए गए हैं, जिनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।
वारदात से 10 दिन पहले शुरू हुई कहानी
मामले को समझने के लिए 10 दिन पीछे जाना जरूरी है। नरसिंहपुर में तत्कालीन वित्त मंत्री अजय नारायण मुश्रान के नाम पर बने पार्क के पास स्थित होटल कुसुम वैली में 24 जनवरी की शाम करीब सात बजे एक अहम दृश्य देखने को मिला। कॉलोनाइजर और होटल मालिक नवीन अग्रवाल अपने कैबिन में मौजूद थे। टेबल पर 500-500 रुपए के नोटों की गड्डियों का ढेर लगा था। चार से पांच लोग नोटों की गिनती में लगे थे। गिनती पूरी होते ही एक कर्मचारी ने कहा-"सर, पूरे 80 लाख रुपए हैं।"
फोन पर हुई बातचीत बनी साजिश की कड़ी
नोटों की गड्डियों के बीच खड़े नवीन अग्रवाल ने इसी दौरान किसी को फोन लगाया और कहा-"व्यवस्था हो गई है, जब चाहें रजिस्ट्री करा लेंगे।" इसके बाद उन्होंने होटल कर्मचारियों से कहा-"रकम लॉकर में रख दो।" यह कहकर वे बाहर खड़ी अपनी फॉर्च्यूनर गाड़ी से निकल गए। यही बातचीत और रकम की जानकारी बाद में लूट की साजिश की सबसे बड़ी वजह बनी।
नकाबपोश लुटेरों की झूठी कहानी
ठीक 10 दिन बाद, 3 फरवरी की रात नवीन अग्रवाल परिवार के साथ डिनर कर सो चुके थे। आधी रात के बाद करीब तीन बजे अचानक फोन आया कि होटल में नकाबपोश लुटेरे घुस आए हैं और तिजोरी में रखे 80 लाख रुपए लूट ले गए हैं। यह सुनते ही उनकी नींद उड़ गई। उन्होंने तुरंत कोतवाली थाना प्रभारी गौरव चाटे को फोन किया और करीब 20 मिनट के भीतर खुद भी होटल पहुंच गए।
पुलिस अलर्ट मोड पर, एसपी खुद पहुंचे
वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई। थाना प्रभारी गौरव चाटे ने एसपी डॉ. ऋषिकेश मीणा को घटना की जानकारी दी। कुछ ही देर में एसपी समेत करीब 100 पुलिसकर्मी मौके पर पहुंच गए। फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए और होटल के हर कोने की बारीकी से जांच की गई।
पांच मिनट के CCTV फुटेज ने खोल दी पोल
एसपी डॉ ऋषिकेश मीणा ने होटल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी। नाइट मैनेजर चंद्रेश रजक को भी वहीं बुलाया गया। करीब पांच मिनट की फुटेज को पांच बार देखा गया और क्राइम सीन को दो-तीन बार रिपीट कराया गया। फुटेज देखते समय एसपी की नजर बार-बार चंद्रेश के हाव-भाव पर गई। तभी उन्होंने टीवी स्क्रीन से नजर हटाकर पीछे खड़े थानेदार से कुछ कहा। इशारा मिलते ही थाना प्रभारी ने होटल का गेट बंद करवा दिया।
गेट बंद होते ही टूट गया ड्रामा
गेट बंद होते ही नाइट मैनेजर समेत पूरे स्टाफ को पुलिस कवर में लेकर एक लाइन में खड़ा कर दिया गया। किसी को बाहर जाने की इजाजत नहीं दी गई। करीब साढ़े चार बजे पुलिस सभी कर्मचारियों को थाने ले आई और अलग-अलग पूछताछ शुरू कर दी। यहीं से लूट की कहानी बिखरने लगी।
पहले हुडी, फिर बोरी में भरे नोट
सीसीटीवी फुटेज में साफ नजर आया कि रिसेप्शन पर नाइट मैनेजर चंद्रेश रजक बिल्कुल सामान्य मुद्रा में बैठा है। तभी एक नकाबपोश बदमाश आता है और उसकी कनपटी पर पिस्टल अड़ा देता है। थोड़ी देर बाद दो और नकाबपोश पहुंचते हैं। वे मैनेजर और अन्य स्टाफ से मारपीट का नाटक करते हैं। इसके बाद मैनेजर खुद उन्हें लॉकर की ओर इशारा करता है। बदमाश लॉकर तोड़कर पहले अपनी हुडी में नोट भरते हैं, फिर एक बोरी लाकर बाकी रकम उसमें डालते हैं।
लात, मॉनिटर और ओवरएक्टिंग
फुटेज में यह भी दिखा कि बदमाश जाते-जाते कर्मचारियों को लात मारने के लिए वापस आते हैं। इसके बाद दोबारा लौटकर मॉनिटर को टेबल से गिराते हैं, ताकि वारदात असली लगे। इन्हीं हरकतों को देखकर एसपी ने थानेदार से धीमे स्वर में कहा-"स्क्रिप्ट अच्छी है, लेकिन एक्टिंग कमजोर है।"
जल्द अमीर बनने का लालच बना वजह
पूछताछ में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने महज 40 रुपए की नकली पिस्टल खरीदी थी। उनका सपना था कि लूट के पैसों से वे लग्जरी लाइफ जिएंगे, महंगी बाइक खरीदेंगे और गर्लफ्रेंड पर खुलकर पैसा उड़ाएंगे। लेकिन उनका यह सपना पुलिस की सूझबूझ और सीसीटीवी फुटेज के आगे ज्यादा देर टिक नहीं सका।
पुलिस की मुस्तैदी से सुलझा मामला
पुलिस का कहना है कि सभी आरोपी जेल में हैं और मामला पूरी तरह सुलझ चुका है। यह घटना एक बार फिर यह सबक देती है कि लालच और दिखावे की जिंदगी के सपने इंसान को सीधे अपराध और जेल की राह पर ले जाते हैं। साथ ही होटल और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की विश्वसनीयता और निगरानी की जरूरत को भी यह मामला उजागर करता है।
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