Bhopal News: मुस्लिम समाज ने आतंक के खिलाफ दिखाई एकजुटता, काली पट्टी बांधकर बोले- हम भारत के वफादार

Bhopal News: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद मध्य प्रदेश में सन्नाटा नहीं, बल्कि सड़कों पर सुलगता आक्रोश दिखा। आतंकवाद के खिलाफ लोगों की भावनाएं उफान पर थीं - नारे थे, आंसू थे, काली पट्टियां थीं और सबसे अहम, एक साझा आवाज थी: "आतंकवाद का कोई मज़हब नहीं होता!"

भोपाल, निवाड़ी, और शाजापुर समेत मध्य प्रदेश के कई शहरों में शुक्रवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने आतंक के खिलाफ शांति से, लेकिन दमदार तरीके से विरोध दर्ज कराया। महिलाओं, बुज़ुर्गों और बच्चों तक ने हाथों में तख्तियां लेकर यह साफ किया कि आतंक के खिलाफ लड़ाई मज़हब की नहीं, इंसानियत की है।

Muslim community showed solidarity against terrorism protested by wearing black bands

काली पट्टियों से जताया दुख, जुबां से निकला लहू का दर्द

भोपाल के इमामी गेट चौराहे पर शुक्रवार को दोपहर एक दृश्य ऐसा था, जिसने हर आते-जाते को ठहरने पर मजबूर कर दिया। सैकड़ों लोग - जिनमें महिलाएं, पुरुष और छोटे बच्चे तक शामिल थे - काली पट्टियां बांधकर आतंकवाद के खिलाफ खामोश लेकिन सशक्त विरोध कर रहे थे।

Bhopal News: "हिंदुस्तान के मुसलमान को बॉर्डर पर छोड़ दो..."

प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता मुस्तकीम कुरैशी का बयान सुर्खियों में रहा। उन्होंने कहा, "यह हमला इंसानियत का कत्ल है। हम प्रधानमंत्री से अपील करते हैं - पाकिस्तान की बॉर्डर खोल दो और हमें बॉर्डर पर भेज दो। हम साबित कर देंगे कि हम इस देश के वफादार मुसलमान हैं।" उनकी इस बात पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजी। उनके चेहरे पर जुनून था, लेकिन लहजे में गहरी पीड़ा भी थी।

Bhopal News: धर्मगुरु बोले: "जिसने एक इंसान को मारा, उसने पूरी इंसानियत को मारा"

भोपाल के ही धर्मगुरु मौलाना सय्यद अनस अली ने कुरान की आयत का हवाला देते हुए कहा: "अल्लाह ने फरमाया है कि जिसने एक इंसान को मारा, उसने पूरी इंसानियत को मारा।" "हमारे देशवासियों का खून बहाया गया है। यह दुख की बात नहीं, शर्म की बात है। धर्म का नाम लेकर की जा रही हिंसा को हम हरगिज़ बर्दाश्त नहीं करेंगे।"

Muslim community showed solidarity against terrorism protested by wearing black bands

महिलाओं की आवाज: "हम अपने बच्चों के लिए एक सुरक्षित भारत चाहते हैं"

प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने सादे लिबास में, बिना शोर-शराबे के, बेहद स्पष्ट शब्दों में अपने डर और उम्मीद दोनों को बयान किया। "हम अपने बच्चों को सिर्फ तालीम नहीं, अमन भी देना चाहते हैं। आतंकवाद हमारी रोज़ की दुआओं में खलल डालता है। ये हमला सिर्फ पहलगाम पर नहीं, हमारे घरों की शांति पर है।" - यह कहना था शाहीन नाम की एक महिला का, जिनकी आंखें नम थीं।

निवाड़ी:नमाज के बाद सड़कों पर उतरे लोग, नारे लगे - 'पाकिस्तान मुर्दाबाद'

निवाड़ी में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद, मस्जिद से निकलते ही लोगों ने एकजुटता दिखाई। 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' और 'आतंकवाद मुर्दाबाद' के नारों से आसमान गूंज उठा। लोगों ने आतंकवाद का पुतला जूते-चप्पलों से मारते हुए घसीटा और अंत में अंबेडकर तिराहे पर आग के हवाले कर दिया। फिजा में नारे थे - लेकिन उनमें नफरत नहीं, न्याय की मांग थी। प्रदर्शनकारियों ने हाथ उठाकर देश के लिए दुआ की और पहलगाम के शहीद पर्यटकों को मौन श्रद्धांजलि दी।

शाजापुर: दो संप्रदाय, एक आवाज

शाजापुर में शुक्रवार की शाम एक ऐतिहासिक क्षण लेकर आई, जब विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, और मुस्लिम समाज के संगठनों ने एक साथ आतंकवाद का पुतला दहन किया। छोटे चौक पर दोनों समुदायों के लोग एकत्र हुए। न कोई घृणा थी, न आरोप-प्रत्यारोप - सिर्फ़ एक साझा पीड़ा थी और एक संकल्प: "हम न हिंदू हैं, न मुसलमान जब बात आतंक की हो - हम सिर्फ भारतीय हैं।" शाम 6 बजे, मोहर्रम कमेटी और सीरत कमेटी के नेतृत्व में मुस्लिम समाज ने अलग से भी प्रदर्शन किया। 'आतंकवाद मुर्दाबाद' की तख्तियों और मुट्ठियों में एक स्वर था - 'अब और नहीं!'

सिर्फ विरोध नहीं, एकजुटता की तस्वीर

इन प्रदर्शनों की खास बात ये थी कि इनमें न सिर्फ गुस्सा था, बल्कि संवेदनशीलता भी थी। नफरत की जगह नफरत को हराने का तरीका था। हाथों में पत्थर नहीं, तख्तियां थीं। मुंह से नफ़रत नहीं, शांति और बदले की वाजिब मांग थी।

ये सिर्फ विरोध नहीं, भरोसे का प्रदर्शन था

मध्य प्रदेश की सड़कों पर शुक्रवार को जो दिखा, वह केवल एक आतंकी हमले का विरोध नहीं था, वह भारत के भीतर बसे भारत की आवाज थी। जहां एक धर्म, एक भाषा, एक रंग नहीं, पर एक जज़्बा था - देश की हिफाज़त, हर हाल में।आतंकवाद ने फिर एक बार ज़ख्म दिया है - लेकिन इस बार देश के हर कोने से आवाज उठ रही है:"हम टूटेंगे नहीं, हम साथ हैं। और हम लड़ेंगे - अपने देश के लिए, अपनी इंसानियत के लिए।"

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