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MP Rewa: डभौरा नगर परिषद भर्ती घोटाला, कांग्रेस का आरोप– व्यापम जैसी साजिश, हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार का दावा

Rewa News: मध्य प्रदेश के रीवा जिले की डभौरा नगर परिषद में भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा और गंभीर घोटाला सामने आया है। कांग्रेस ने इसे सीधे तौर पर "व्यापम जैसी भर्ती साजिश" करार देते हुए भाजपा विधायक-अधिकारी गठजोड़ पर हजारों करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है।

इस पूरे मामले को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश महासचिव अमित शर्मा ने पत्रकार वार्ता कर भाजपा सरकार और स्थानीय प्रशासन पर तीखा हमला बोला।

MP Rewa Dabhora Municipal Council recruitment scam Congress alleges Vyapam-like conspiracy

"20 साल का स्वर्णिम विकास, भ्रष्टाचार में तब्दील" - अमित शर्मा

पत्रकार वार्ता में अमित शर्मा ने कहा कि भाजपा पिछले 20 वर्षों से "स्वर्णिम" और "विकसित मध्य प्रदेश" के दावे करती आ रही है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश आज भ्रष्टाचार, घोटालों और कागजी विकास का प्रतीक बन चुका है। डभौरा नगर परिषद में सामने आया भर्ती घोटाला इसी सच्चाई को उजागर करता है।

डभौरा नगर परिषद में व्यापम जैसी भर्ती साजिश

अमित शर्मा ने बताया कि रीवा जिले की डभौरा नगर परिषद का गठन वर्ष 2020 में 7 ग्राम पंचायतों को मिलाकर किया गया था। नियमों के मुताबिक, नगर परिषद बनने पर पहले से कार्यरत कर्मचारियों का समायोजन और नियमितीकरण किया जाना चाहिए था। लेकिन आरोप है कि इन कर्मचारियों को दरकिनार कर भाजपा विधायक के निजी सहायक (पीए), उनके रिश्तेदारों, तत्कालीन सीएमओ, जेडी और अन्य अधिकारियों के बेटे-बेटियों व परिजनों को अवैध रूप से नौकरी दे दी गई।

21 पद स्वीकृत, करीब 50 की फर्जी भर्ती

कांग्रेस का आरोप है कि जहां नियम अनुसार केवल 21 पद स्वीकृत थे, वहां बिना किसी विज्ञापन, बिना आरक्षण रोस्टर और बिना शासन की स्वीकृति के लगभग 50 लोगों की भर्ती कर दी गई। इसके लिए ग्राम पंचायतों से फर्जी प्रस्ताव बुलवाए गए, कागजी समितियां बनाई गईं और पीआईसी व सामान्य सभा की बैठकों में नियमों को ताक पर रखकर प्रस्ताव पारित कराए गए।

फर्जी पे-स्लिप और करोड़ों की निकासी

अमित शर्मा ने दावा किया कि इस भर्ती घोटाले के दौरान फर्जी वेतन पर्चियां (पे-स्लिप) तैयार की गईं। कलेक्टर दर से अधिक वेतन दर्शाकर 2 से 5 करोड़ रुपये तक की राशि तनख्वाह के नाम पर निकाल ली गई। उन्होंने बताया कि एक-एक खाते से 50 से अधिक संदिग्ध लेन-देन किए गए, जो सीधे तौर पर बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करते हैं।

कांग्रेस नेता ने जांच प्रक्रिया पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि जिन अधिकारियों पर भर्ती घोटाले के आरोप हैं, उन्हीं को जांच समिति में शामिल कर दिया गया। इससे यह साफ होता है कि "घोटालेबाजों को ही अपनी जांच सौंप दी गई"। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक के दबाव में नगरीय प्रशासन मंत्री द्वारा अब तक किसी भी दोषी पर कार्रवाई नहीं होने दी गई।

"एक नगर परिषद नहीं, पूरे प्रदेश का घोटाला"

अमित शर्मा ने कहा कि यह मामला सिर्फ डभौरा नगर परिषद तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश में करीब 350 नगर पंचायतें हैं। यदि एक नगर परिषद में 2 से 5 करोड़ रुपये का घोटाला हो सकता है, तो पूरे प्रदेश में यह आंकड़ा हजारों करोड़ रुपये तक पहुंचता है। उन्होंने इसे प्रदेशव्यापी संगठित भ्रष्टाचार बताया।

कांग्रेस की मांगें

  • अंत में कांग्रेस नेता अमित शर्मा ने सरकार से मांग की कि-
  • डभौरा नगर परिषद भर्ती घोटाले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराई जाए।
  • सभी अवैध नियुक्तियों को तत्काल निरस्त किया जाए।
  • दोषी विधायक, अधिकारियों और कर्मचारियों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
  • कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को लोकायुक्त और न्यायालय तक ले जाएगी।

डभौरा नगर परिषद में सामने आए इस कथित भर्ती घोटाले ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या कदम उठाती है या यह मामला भी अन्य घोटालों की तरह फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।

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