Ram Mandir Donation Scam: 'चंपत राय ने पीएम को हिसाब देने से मना किया', केजरीवाल ने उठाए सवाल

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह ने श्री राम मंदिर जमीन खरीद में हुए करोड़ों रुपए के घोटाले के सबूत एसआईटी को सौंप दिए। गुरुवार को एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने संजय सिंह को लखनऊ स्थित कार्यालय में आकर सारे सबूत देने के लिए बुलाया था। संजय सिंह ने जमीन खरीद से संबंधित कुल 11 दस्ताजे सौंपे हैं, जिसमें राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत अन्य कई बड़े नाम इस घोटाले में शामिल हैं।

उधर, आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि श्री राम मंदिर के चढ़ावे में हुई गड़बड़ियों की जांच कर रही एसआईटी को "आप" के सांसद संजय सिंह ने पेश होकर जमीनों के घोटाले के सबूत सौंप दिए हैं।

Ram Mandir Donation Scam

अरविंद केजरीवाल ने देशवासियों से कहा कि सोचिए, चंपत राय ने प्रधानमंत्री को हिसाब देने से मना कर दिया। चंपत राय की इतनी हिम्मत कैसे हो गई? चंपत राय ऐसे क्या राज जानते हैं कि प्रधानमंत्री भी उनके सामने मजबूर हैं? और दूसरी ओर एसआईटी छोटे-छोटे कर्मचारियों को बुला कर सबकी आँखों में धूल झोंक रही है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अयोध्या में श्री रामचंद्र जी के मंदिर से मीडिया और सोशल मीडिया में जिस तरह की खबरें आ रही हैं, उससे दिल बहुत आहत है। इन लोगों ने भगवान जी का चढ़ावा, उनकी माला और उनकी पादुका तक चोरी कर ली। लोगों ने बहुत भावना के साथ भगवान को जो हीरे-जवाहरात चढ़ाए थे, वे भी चोरी कर लिए। बताया जा रहा है कि लगभग 200 करोड़ रुपए का कैश और किसी श्रद्धालु द्वारा दी गई 200 किलो चांदी भी चोरी कर ली गई है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर से जिस तरह की खबरें आ रही हैं, उससे मेरा और मुझ जैसे करोड़ों लोगों का मन बहुत व्यथित है। इसीलिए मैं अभी अयोध्या के लिए निकल रहा हूं। मैं शुक्रवार को राम मंदिर जाकर भगवान के दर्शन करूंगा। दर्शन करने के बाद हम हनुमानगढ़ी भी जाएंगे और वहां कुछ संतों से भी मुलाकात करेंगे।

एक सवाल के जवाब में अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अगर किसी के 100 रुपए भी चोरी हो जाएं, तो थाने में उसकी एफआईआर दर्ज होती है। इस मामले में अरबों रुपए चोरी हो गए, कुछ पैसा रिकवर भी हो गया, लेकिन अभी तक एफआईआर तक दर्ज नहीं हुई। मैं तो कानून समझता हूं। मैंने कानून पढ़ा है। बिना एफआईआर के एसआईटी नहीं बन सकती। सीआरपीसी में लिखा है कि एफआईआर के बाद ही एसआईटी बनेगी।

अरविंद केजरीवाल ने एसआईटी पर सवाल उठाते पूछा कहा कि यह एसआईटी किस कानून की किस धारा के तहत बनी है? इसके पास जांच करने की कोई पावर ही नहीं है। यह एसआईटी लोगों की आंखों में केवल धोखा है। यह पूरे मामले में लीपापोती करने के लिए है। इसका काम केवल बड़े-बड़े लोगों को बचाना है। मीडिया में है कि एसआईटी छोटे-छोटे कर्मचारियों को बुलाकर जांच कर रही है, जबकि इतने महीनों और सालों से बड़े स्तर पर चल रही यह चोरी बड़े लोगों की शह के बिना तो नहीं हो सकती।

अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि चंदे, हीरे-जवाहरात और भगवान की पादुका की चोरी कोई मामूली मामला नहीं है, यह एक बहुत संगीन मामला है जिससे करोड़ों हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है। इसमें बहुत बड़े-बड़े लोग शामिल हैं। इस एसआईटी का काम केवल मामले की लीपापोती करना है। इसमें केवल एक नहीं, बल्कि कई सारे मामले हैं, जिनके बारे में शुक्रवार को मैं विस्तार से बताऊंगा।

वहीं, एसआईटी को जमीन खरीद घोटाले के दस्तावेज सौंपने की जानकारी एक्स पर देते हुए संजय सिंह ने कहा कि ज़मीन ख़रीद के नाम पर ट्रस्ट ने करोड़ों रुपए का घोटाला किया। मैंने सारे दस्तावेज़ एसआईटी को सौंप दिए हैं। आगे क्या कार्यवाही होगी प्रभु श्री राम ही जानें? उन्होंने कहा कि प्रभु श्री राम के मंदिर में हुए घोटाले से देश के लोगों के मन में काफी आक्रोश और गुस्सा है। चढ़ावे और चंदे की चोरी के कारण करोड़ों हिंदुओं की आस्था को चोट पहुंची है। इस पूरे मामले की जांच करने के लिए उत्तर प्रदेश में एक एसआईटी बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। एसआईटी अध्यक्ष ने मुझे बुलाया था और 11 बजे का समय दिया गया था। मैंने मुलाकात करके सारे दस्तावेज एसआईटी अध्यक्ष को सौंप दिए हैं।

संजय सिंह ने बताया कि मेरे पास कुल 13 दस्तावेज थे, लेकिन दो मामले आपस में जुड़े हुए थे। इसलिए मैंने 11 सेट कागज एसआईटी अध्यक्ष और एक अन्य सदस्य को सौंप दिए हैं। इन दस्तावेजों की जानकारी हैरान करने वाली है। दान की जमीन 1 करोड़ रुपए में खरीदी गई, 9 करोड़ रुपए की जमीन 55 करोड़ 47 लाख रुपए में और 3 करोड़ रुपए की जमीन 24 करोड़ रुपए में खरीदी गई। 3 करोड़ रुपए की जो जमीन 24 करोड़ रुपए में खरीदी गई, वह नजूल की जमीन है, जिसे न खरीदा जा सकता है और न बेचा जा सकता है। ट्रस्ट ने चंदे का 24 करोड़ रुपए लगाकर उस जमीन को कैसे खरीद लिया?

संजय सिंह ने आगे कहा कि इसके अलावा उस समय के ईडी पार्टी के मेयर के भतीजे दीप नारायण से संबंधित कई कागजात भी मैंने एसआईटी अध्यक्ष को सौंपे हैं, जिसमें बताया गया है कि उसने कैसे चंपत राय को जमीन बेचकर ट्रस्ट को चूना लगाने का काम किया। मैंने वह पुराना खुलासा भी सौंपा जिसमें 2021 में सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने कुसुम पाठक और हरीश पाठक से 2 करोड़ रुपए में जमीन खरीदी और महज 5 मिनट के बाद उसे 18.5 करोड़ रुपए में ट्रस्ट को बेच दिया।

संजय सिंह ने मीडिया को दस्तावेजों का ब्यौरा देते हुए बताया कि 18 मार्च 2021 को कुसुम पाठक और हरीश पाठक से 4 करोड़ 97 लाख रुपए की जमीन ट्रस्ट ने 8 करोड़ रुपए में खरीदी। इसमें गवाह ट्रस्ट के सदस्य अनिल कुमार मिश्रा और उस समय के ईडी पार्टी के मेयर ऋषिकेश उपाध्याय थे। दूसरे और तीसरे दस्तावेज में उसी जमीन का जिक्र है जो सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने 2 करोड़ रुपए में खरीदी और 5 मिनट बाद 18.5 करोड़ रुपए में ट्रस्ट को बेच दी। इन दोनों खरीद में भी ऋषिकेश उपाध्याय और अनिल मिश्रा ही गवाह थे।

संजय सिंह ने बताया कि चौथे दस्तावेज के अनुसार 20 फरवरी को 41,60,000 रुपए की जमीन 2 करोड़ रुपए में बेची गई। 5वें और 5-ए दस्तावेज के अनुसार, 21 फरवरी को ईडी पार्टी के तत्कालीन मेयर ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे ने देवेंद्र प्रसाद आचार्य से 20 लाख रुपए में एक जमीन खरीदी और 7 महीने बाद वही जमीन 2.5 करोड़ रुपए में चंपत राय को बेच दी।

संजय सिंह ने कहा कि दस्तावेज 6 और 6-ए के अनुसार, 14 मई 2020 को ऋषिकेश उपाध्याय के भतीजे दीप नारायण को दान में एक जमीन मिली और उसने वह जमीन चंपत राय को 1 करोड़ रुपए में बेच दी। 7वें दस्तावेज के मुताबिक, 20 मई 2021 को चंपत राय ने बृजमोहन दास से 92,50,000 रुपए की जमीन 5 करोड़ 60 लाख रुपए में खरीदी। 8वें दस्तावेज के अनुसार, चंपत राय द्वारा खरीदी गई 51 लाख 80 हजार रुपए की जमीन कितने में बेची गई, इसका कोई अता-पता नहीं है। 9वें दस्तावेज के अनुसार, गाटा संख्या 153 और 82 वाली 45 लाख 24 हजार रुपए की जमीन कितने में बेची गई, यह जांच का विषय है और इसके कागजात गायब हैं।

संजय सिंह ने बताया कि 10वें दस्तावेज के मुताबिक, 2 अप्रैल 2024 को गाटा संख्या 247 वाली 2 करोड़ 92 लाख रुपए की जमीन ट्रस्ट को 24 करोड़ रुपए में बेची गई। संजय सिंह ने मीडिया को उस जमीन का मूल कागज दिखाते हुए बताया कि एसडीएम अयोध्या ने लिखकर दिया है कि यह नजूल की जमीन है। चंपत राय द्वारा नजूल की जमीन 24 करोड़ रुपए में खरीदा जाना सीधे-सीधे चंदा चोरी और ट्रस्ट के पैसों पर डकैती है।

संजय सिंह ने बताया कि अंतिम दस्तावेज 16 नवंबर 2023 का है, जब 9 करोड़ रुपए की जमीन 55 करोड़ 47 लाख रुपए में ट्रस्ट द्वारा खरीदी गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस जमीन से अधिक उपयोगी जमीन किसानों से मात्र 4 लाख 40 हजार रुपए प्रति बिस्वा में खरीदी थी, जबकि चंपत राय ने आलोक बंसल से जमीन 47 लाख रुपए प्रति बिस्वा में खरीदी। धार्मिक कार्यों के लिए लोग जमीन दान देते हैं या सस्ते में देते हैं, लेकिन यहां ट्रस्ट द्वारा हजारों गुना महंगी जमीन खरीदी गई है। यह बहुत बड़ा भ्रष्टाचार और महा घोटाला है। मैंने इसके सारे सबूत एसआईटी के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत को सौंप दिए हैं, जिन्होंने कार्रवाई का विश्वास दिलाया है।

संजय सिंह ने आगे कहा कि मैं चाहता हूं कि इसकी सारी डिटेल जनता के सामने रखी जाए। मीडिया अपना कैमरा लेकर प्रभु श्री राम के मंदिर और तीर्थ क्षेत्र के आसपास जाए और देखे कि ये जमीनें होटल के पास खरीदी गई हैं या किसी अन्य जगह पर। दो-चार किमी कैमरा लेकर टहलने पर मीडिया को खुद सच्चाई का पता चल जाएगा।

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