त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को नई ताकत: 24 नवंबर से तीन दिवसीय महासंवाद, पंचायतें बना सकेंगी आवासीय प्रोजेक्ट
MP panchayat News: मध्य प्रदेश की पंचायतें अब सिर्फ ग्राम सभा और स्वच्छता अभियान तक सीमित नहीं रहेंगी। भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर जैसे बड़े शहरों से सटी ग्राम पंचायतें जल्द ही आवासीय प्रोजेक्ट, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और सेमी-अर्बन सिटी विकसित कर सकेंगी।
इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और 24 नवंबर से कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन हॉल में तीन दिवसीय 'पंचायत संवाद' कार्यक्रम शुरू हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसका उद्घाटन करेंगे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत सभी संबंधित मंत्री मौजूद रहेंगे।

पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल ने बताया कि यह कार्यक्रम पिछले साल के सफल संवाद का दूसरा चरण है। इस बार फोकस त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था (ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत) को मजबूत करना और पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाना है।
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था क्या है और कैसे होगा फायदा?
- ग्राम पंचायत - गांव स्तर पर विकास योजनाएं बनाना, स्वच्छता, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट। अब शहर से सटी पंचायतें आवासीय और कमर्शियल प्रोजेक्ट बना सकेंगी।
- जनपद पंचायत - ब्लॉक स्तर पर समन्वय और मॉनिटरिंग।
- जिला पंचायत - जिला स्तर पर डेवलपमेंट प्लान बनाना, फंड का आवंटन और निगरानी।
मंत्री पटेल ने कहा, "जिला पंचायत में समितियां तो हैं, लेकिन बैठकें नहीं होतीं। हम पहली बार डेवलपमेंट प्लान का फॉर्मेट सौंपेंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष-सीईओ को मॉनिटरिंग की जिम्मेदारी दी जाएगी।"
तीन दिन का पूरा एजेंडा
- 24 नवंबर (पहला दिन) - उद्घाटन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
- फोकस: सेमी-अर्बन पंचायतों का विकास
- भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर से सटी 37 पंचायतों के सरपंच
- जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सीईओ
- कैलाश विजयवर्गीय की समिति की रिपोर्ट पर चर्चा
- शहर से सटी पंचायतों को आवासीय प्रोजेक्ट बनाने की अनुमति का ड्राफ्ट
25 नवंबर (दूसरा दिन) - मुख्य अतिथि: उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल
फोकस: जल संरक्षण, स्वच्छता, आदिवासी क्षेत्र
- वॉटरशेड प्रोजेक्ट
- पेयजल योजनाएं
- स्वच्छ भारत मिशन
- प्रधानमंत्री जनमन योजना
- पेसा एक्ट का प्रभावी क्रियान्वयन
- प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना
26 नवंबर (तीसरा दिन)
- आत्मनिर्भर पंचायत मॉडल
- पंचायती राज नियमों में बदलाव (मंत्री स्तर पर ही संभव)
- मनरेगा को "आखिरी कदम" बनाने की रणनीति
- वित्तीय प्रबंधन और लोगों को जागरूक करना
मनरेगा पर मंत्री की बड़ी बात
प्रहलाद पटेल ने सरपंचों में जोश भरते हुए कहा, "मनरेगा को हम आखिरी कदम बनाएंगे। यानी जो व्यक्ति मनरेगा पर निर्भर है, उसे स्थायी रोजगार से जोड़ेंगे। पंचायतें खुद कमाई करेंगी, मनरेगा पर निर्भरता खत्म होगी।"
पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के गुर
- पुराने नियम जो अब बेमानी हो गए, उन्हें हटाया जाएगा
- पंचायतें अपनी जमीन पर कमर्शियल प्रोजेक्ट बना सकेंगी
- स्वयं की आय बढ़ाने के नए स्रोत (मार्केट, दुकानें, गोदाम)
- डिजिटल मॉनिटरिंग और पारदर्शिता
शहरों से सटी पंचायतों को बड़ा फायदा
भोपाल की कोलार, गांधी नगर, बैरागढ़, इंदौर की राऊ, महू, ग्वालियर की मुरार, जबलपुर की तिलवाराघाट जैसी पंचायतें अब बिल्डरों के साथ मिलकर आवासीय कॉलोनी बना सकेंगी। इससे पंचायत को करोड़ों का राजस्व मिलेगा और गांव शहर बन जाएगा।
पहली बार हो रहा ऐसा संवाद
मंत्री पटेल ने कहा, "हर दिन प्रश्न-उत्तर सत्र होगा। सरपंच, जनपद अध्यक्ष, जिला पंचायत सदस्य - सब सीधे मंत्री और अधिकारियों से सवाल पूछ सकेंगे। यह लोकतंत्र की सबसे बड़ी प्रयोगशाला है।" 24 नवंबर से शुरू हो रहा यह तीन दिवसीय महासंवाद मध्य प्रदेश की 23,000 ग्राम पंचायतों, 313 जनपद पंचायतों और 52 जिला पंचायतों के लिए नया सवेरा लेकर आने वाला है।
पंचायतें अब सिर्फ योजना लागू करने वाली नहीं, खुद विकास करने वाली इकाई बनने जा रही हैं। मंत्री प्रहलाद पटेल का संकल्प है - "2028 तक मध्य प्रदेश की हर पंचायत आत्मनिर्भर होगी।"
अब देखना यह है कि भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे हॉल से निकला यह संवाद गांव-गांव तक कितनी तेजी से पहुंचता है।












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