MP News Bhopal: आउटसोर्स कर्मचारियों का आक्रोश: अंबेडकर पार्क में हजारों ने घेरा, समान वेतन-सुविधाओं की मांग
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के अंबेडकर पार्क में आज एक बड़ा आंदोलन देखने को मिला। मध्य प्रदेश आउटसोर्स कर्मचारी संघ के बैनर तले हजारों की संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के प्रांतीय संयोजक मनोज भार्गव ने वन इंडिया हिंदी को दिए इंटरव्यू में कहा, "अगर मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा शोषण किसी का हो रहा है, तो वह आउटसोर्स कर्मचारी हैं।
न समान वेतन, न सुविधाएं, और बिचौलियों के कारण हर महीने नौकरी का संकट। हम रेगुलर कर्मचारियों से ज्यादा मेहनत करते हैं, लेकिन दिहाड़ी मजदूरों जैसा वेतन पाते हैं।" भार्गव ने श्रम कानूनों के उल्लंघन पर सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी, जिससे प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा सकती है।

यह प्रदर्शन मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों - स्वास्थ्य, शिक्षा, पंचायत, बिजली और जल जीवन मिशन - में कार्यरत करीब 2.75 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही पीड़ा का प्रतीक है। हाल ही में हाईकोर्ट के आदेशों की अवहेलना और एरियर भुगतान में देरी ने आक्रोश को चरम पर पहुंचा दिया है। कर्मचारियों ने नारे लगाए - "समान काम, समान वेतन!", "बिचौलियों का अंत!" - और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपने की योजना बनाई। विपक्ष ने इसे "मोहन सरकार की विफलता" बताते हुए समर्थन का ऐलान किया, जबकि सरकार ने "वार्ता का आश्वासन" दिया है। यह आंदोलन प्रदेश की आर्थिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर गहरा असर डाल सकता है, खासकर स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में।
सुबह से शाम तक का हंगामा
प्रदर्शन सुबह 10 बजे अंबेडकर पार्क में शुरू हुआ। भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर और अन्य जिलों से सैकड़ों बसों में भरकर कर्मचारी पहुंचे। आउटसोर्स कर्मचारी संघ के बैनर, प्लेकार्ड और नारों के साथ मार्च निकाला गया। मनोज भार्गव ने मंच से कहा, "हम दिन-रात मेहनत करते हैं - सफाई से लेकर डेटा एंट्री, स्वास्थ्य सहायता से लेकर पंचायत कार्य तक - लेकिन वेतन रेगुलर कर्मचारियों का आधा भी नहीं। बिचौलियों के कारण हर महीने नौकरी खतरे में पड़ जाती है।"
दोपहर में सभा हुई, जहां कर्मचारियों ने अपनी कहानियां साझा की। एक स्वास्थ्यकर्मी ने बताया, "हम टेलीमेडिसिन में काम करते हैं, लेकिन 9 महीने का एरियर अटका है। हाईकोर्ट ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने का आदेश दिया, लेकिन सरकार स्टे हटाने के बाद भी छंटनी कर रही है।" प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन पुलिस ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की। शाम को भार्गव ने कहा, "श्रम कानूनों का उल्लंघन हो रहा है। केंद्र सरकार के नियमों को भी नजरअंदाज किया जा रहा। अगर 15 दिनों में मांगे न मानीं, तो अनिश्चितकालीन हड़ताल।"

उटसोर्स कर्मचारियों की प्रमुख मांगें: समानता और सुरक्षा की पुकार
मध्य प्रदेश में आउटसोर्स सिस्टम 2015 से चला आ रहा है, जब वित्त विभाग ने चतुर्थ श्रेणी पदों पर एजेंसियों से कर्मचारी लेने की नीति बनाई। आज 3 लाख से अधिक कर्मचारी प्रभावित हैं, जिनमें सफाईकर्मी, डाटा एंट्री ऑपरेटर, स्वास्थ्य सहायक और ड्राइवर शामिल हैं।
हाल की घटनाएं:
- मई 2025: 11 महीने का एरियर अटका; हाईकोर्ट ने भुगतान का आदेश दिया, लेकिन अनदेखी।
- फरवरी 2025: शिक्षा, स्वास्थ्य, पंचायत कर्मचारियों ने बजट सत्र में धरना की योजना बनाई।
- जनवरी 2025: हमीदिया अस्पताल से 400 टेलीमेडिसिन कर्मियों की छंटनी; वेतन बढ़ोतरी से बचने की कवायद।
- सितंबर 2024: नीलम पार्क में 21,000 वेतन की मांग पर प्रदर्शन।
- अगस्त 2024: श्रम विभाग ने ग्रेच्युटी-बीमा लाभ का आदेश दिया, लेकिन अमल में कमी।
कर्मचारी संगठनों ने आरोप लगाया कि सरकार नियमित पद समाप्त कर आउटसोर्स पर निर्भर हो रही है, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ा। अप्रैल 2025 में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर हुई।
विपक्ष का समर्थन, सरकार की सफाई
कांग्रेस ने प्रदर्शन का समर्थन किया। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "आउटसोर्स कर्मचारी प्रदेश की रीढ़ हैं। मोहन सरकार उनका शोषण बंद करे। हम उनके साथ सड़क पर उतरेंगे।" पूर्व CM कमलनाथ ने ट्वीट किया, "श्रम कानूनों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं। हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हो।"
वहीं, BJP सरकार ने वार्ता का आश्वासन दिया। मुख्य सचिव को ज्ञापन सौंपने पर वित्त विभाग ने कहा, "मांगों पर विचार जारी है। एरियर जल्द भुगतान होगा।" लेकिन कर्मचारी नेता वासुदेव शर्मा ने तंज कसा, "वार्ता तो 11 महीने से चल रही है, एक्शन कहां?" यह मुद्दा आगामी बजट सत्र में गरमा सकता है।
प्रभाव: हड़ताल से व्यवस्था चरमरा सकती है
प्रदेश के 70% स्वास्थ्य केंद्र, 50% पंचायत कार्यालय और बिजली वितरण में आउटसोर्स कर्मचारी हैं। हड़ताल से सेवाएं ठप हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समान वेतन लागू करने से 5,000 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, लेकिन शोषण रोकने से सामाजिक न्याय मिलेगा।
मनोज भार्गव की चेतावनी गंभीर है: "हमारा धैर्य खत्म हो रहा। अनिश्चितकालीन हड़ताल से प्रदेश ठप हो जाएगा।" यह आंदोलन मध्य प्रदेश के श्रमिक आंदोलन को नई दिशा दे सकता है। क्या सरकार मांगे मानेगी, या सड़कें फिर गरमाएंगी? सभी की नजरें भोपाल पर।
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