MP News : पुलिस ने एक हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारी शिक्षकों को भोपाल शहर की सीमा के बाहर रोका
भोपाल में पुरानी पेंशन बहाली की मांग और अन्य मांगों को लेकर प्रदर्शन करने आ रहे 1000 से ज्यादा शिक्षकों को पुलिस ने शहर के बाहर रोक दिया और हिरासत में ले लिया।
भोपाल,13 सितंबर। राजधानी में काफी लंबे समय बाद शिक्षकों का एक बड़ा आंदोलन होने जा रहा था, लेकिन पुलिस ने इस बड़े आंदोलन को शहर के बाहर ही रोक दिया। बता दे इस आंदोलन में शामिल होने करीब 10 हजार ज्यादा शिक्षक अलग-अलग क्षेत्रों से आ रहे थे। लेकिन पुलिस ने उन्हें भोपाल शहर के बाहर ही रोक लिया और हवाला दिया कि अभी राजधानी में विधानसभा का मानसून सत्र चल रहा है, जिसकी वजह से शहर में धारा 144 लागू है। जिसके बाद नाराज शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी और पुरानी पेंशन बहाली को लेकर नारेबाजी की।
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शिक्षकों के जोश में नहीं दिखी कमी
सड़क पर प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का जोश देखते ही बनता था। दरअसल प्रदर्शन के दौरान बारिश शुरू हो गई, लेकिन शिक्षकों का जोश ठंडा नहीं हुआ। वे लगातार पुरानी पेंशन योजना को दोबारा शुरू करने के लिए नारे लगाते रहे। सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे शिक्षक अपनी मांगों को लेकर जोर-जोर से नारे लगा रहे थे। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ की प्रांतीय प्रवक्ता शांति ताम्रकार ने बताया कि शासन ने संगठन को भोपाल में किसी भी तरह के प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी। करीब 7 साल पहले 2015 में संगठन ने भोपाल में प्रदर्शन किया था। जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक लालघाटी तक पहुंच गए थे और ट्रैफिक जाम जैसे हालात बन गए थे।

शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भरत पटेल को प्रशासन ने किया नजर बंद
आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष भरत पटेल को प्रशासन ने नजर बंद कर दिया था। संगठन ने भोपाल के शाहजहानी पार्क भेल दशहरा मैदान और जम्मू जी मैदान में भरने की अनुमति मांगी थी लेकिन शासन ने उन्हें अनुमति नहीं दी। संगठन के जिलाध्यक्ष संतोष सोनी ने बताया कि सरकार की भूमिका देखिए सरकार की हिटलर शाही देखिए आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष भरत पटेल ने तीन जगह की अनुमति मांगी। सरकार ने तीनों जगह की अनुमति कैंसिल कर दी। आप बताएं कि हम कैसे अपनी मांगों के समर्थन में सरकार से बातचीत करें।

शिक्षकों की प्रमुख मांगे
सामान्य प्रशासन विभाग,वित्त विभाग, जनजाति कार्य विभाग व स्कूल शिक्षा के बीच तालमेल नहीं होने के कारण करीब 4 सालों से क्रमोन्नति यानी समयमान वेतनमान नहीं मिल पा रहा है। इसके अलावा पुरानी पेंशन योजना के दोबारा शुरू नहीं होने से शिक्षकों के परिवारों को आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है उन्हें रिटायरमेंट के बाद 700 से ₹2000 तक की पेंशन मिल पा रही है।
वहीं अनुकंपा के लंबित मामले भी नहीं निपट पा रहे हैं जिससे मृत्यु शिक्षकों के परिवार वाले परेशान हैं। शिक्षकों की मांग है कि अतिथि शिक्षक कैडर खत्म करके उन्हें नए कैडर में शामिल किया जाए।

पूरे प्रदेश से 10 हजार ज्यादा शिक्षक होने वाले थे शामिल
बता दे कि प्रदर्शन के लिए भोपाल के अलावा महाकौशल बुंदेलखंड मालवा निमाड़, बघेलखंड और ग्वालियर से भी बड़ी संख्या में शिक्षकों की आने की खबर थी लेकिन भरत पटेल रैली में कहीं भी नजर नहीं आए। प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस ने शहर के बाहर ही स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को रोक लिया।












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