MP News: प्रदेश के कर्मचारियों को अब इस दिन नहीं मिलेगी छुट्टी, जल्द होने वाला है सरकार का बड़ा फैसला
MP News: मध्य प्रदेश के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ा बदलाव आने वाला है, जो उनकी छुट्टियों और कामकाज के तरीके को पूरी तरह से प्रभावित करेगा। राज्य सरकार हफ्ते में एक दिन के अवकाश पर विचार कर रही है, और सालाना छुट्टियों में कटौती का प्रस्ताव भी मेज पर है।
सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 सितंबर 2025 को गठित समिति ने 10 से अधिक राज्यों की छुट्टी व्यवस्था का अध्ययन किया है, और जल्द एक बड़ी बैठक में सहमति बनेगी। इसके बाद प्रस्ताव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पास जाएगा, और स्वीकृति मिलते ही 2026 से लागू हो जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार, सरकारी दफ्तर अब केवल दूसरे और तीसरे शनिवार को बंद रहेंगे, जबकि बाकी शनिवार सामान्य कार्य दिवस होंगे।

साथ ही, सार्वजनिक, सामान्य और ऐच्छिक अवकाशों में भी कटौती संभव है। दो मॉडल पर चर्चा चल रही है - 6-दिन कार्य सप्ताह या केंद्र सरकार की तर्ज पर 5-दिन वीकिंग के साथ एक घंटे बढ़ा समय। यह फैसला कर्मचारियों के कामकाज को दक्ष बनाने का प्रयास है, लेकिन संगठनों ने विरोध की चेतावनी दी है। आइए, जानते हैं इस प्रस्ताव की पूरी डिटेल - समिति की रिपोर्ट से लेकर मॉडल, प्रभाव और कर्मचारी संगठनों की प्रतिक्रिया तक।
छुट्टियों में कटौती का प्रस्ताव: शनिवार पर ब्रेक, सालाना अवकाश कम - क्यों उठा मुद्दा?
मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों को वर्तमान में हफ्ते में दो अवकाश (शनिवार-रविवार) मिलते हैं, और सालाना 22 सामान्य, 17 सार्वजनिक और 68 ऐच्छिक छुट्टियां (जिनमें से 3 ले सकते हैं)। 2025 कैलेंडर में 90 अवकाश घोषित हैं, लेकिन कई त्योहार शनिवार-रविवार पर पड़ने से 8 छुट्टियां 'नुकसान' हुईं। सामान्य प्रशासन विभाग ने पाया कि 365 दिनों में 196 अवकाश (54%) हो जाते हैं, जो उत्पादकता पर असर डालते हैं। केंद्र सरकार के 5-दिन वीकिंग (सोमवार-शुक्रवार, 9 AM-5:30 PM) से प्रेरित होकर MP सरकार ने समिति गठित की।
समिति (अतिरिक्त मुख्य सचिवों की अगुवाई में) ने 10 राज्यों (कर्नाटक, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश) का अध्ययन किया। रिपोर्ट में सिफारिश: छुट्टियां कम, कार्य दिवस बढ़ाएं। जल्द बैठक होगी, फिर CMO को प्रस्ताव। सीएम मोहन यादव ने कहा, "कर्मचारियों की दक्षता बढ़ेगी, विकास तेज होगा।" लेकिन कर्मचारी संगठनों ने विरोध किया। मध्य प्रदेश कर्मचारी संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक ने कहा, "छुट्टियां राजनीतिक लाभ के लिए हैं। कटौती से कार्यभार बढ़ेगा, परिवार प्रभावित।"
दो मॉडल पर मंथन: 6-दिन कार्य सप्ताह या 5-दिन वीकिंग + 1 घंटा बढ़ा समय - कौन सा लागू?
सरकार दो विकल्पों पर विचार कर रही है, जो 2026 से लागू हो सकते हैं:
मॉडल 1: 6-दिन कार्य सप्ताह: सोमवार-शनिवार काम, रविवार अवकाश। केवल दूसरे और तीसरे शनिवार को छुट्टी। सालाना छुट्टियां 20% कम (सामान्य 22 से 18, ऐच्छिक 68 से 50)। लाभ: कार्य दिवस 260 से 300, उत्पादकता बढ़ेगी। लेकिन कर्मचारी संघ ने विरोध किया, "परिवार समय कम होगा।"
मॉडल 2: केंद्र सरकार की तर्ज पर 5-दिन वीकिंग: सोमवार-शुक्रवार काम, शनिवार-रविवार अवकाश। लेकिन समय बढ़ाकर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक (1 घंटा अतिरिक्त)। छुट्टियां 15% कम। केंद्र में 2024 से लागू, MP में 2023 से विचाराधीन।
समिति ने मॉडल 1 को प्राथमिकता दी, लेकिन कर्मचारी संगठनों की राय ली जाएगी। बैठक 15 नवंबर को, फिर CM को प्रस्ताव। यदि स्वीकृति मिली, तो 1 जनवरी 2026 से लागू।
कर्मचारियों पर प्रभाव: कार्यभार बढ़ेगा, परिवार समय कम - संगठनों का विरोध
MP में 7.5 लाख सरकारी कर्मचारी (राज्य + केंद्र) प्रभावित होंगे। प्रभाव:
- उत्पादकता: कार्य दिवस 20% बढ़ेंगे, लेकिन थकान।
- परिवार: शनिवार छुट्टियां कम, बच्चों-परिवार पर असर।
- वेतन: कोई बदलाव नहीं, लेकिन अवकाश कम से प्रोमोशन प्रभावित।
कर्मचारी संगठनों ने विरोध जताया। इंजीनियर सुधीर नायक ने कहा, "छुट्टियां कभी मांगी नहीं। जयंतियों पर कटौती गलत।" मप्र कर्मचारी महासंघ ने धरना की चेतावनी दी। लेकिन सरकार ने कहा, "दक्षता के लिए जरूरी।"
अन्य राज्यों का उदाहरण: कटौती से उत्पादकता बढ़ी, लेकिन कर्मचारी असंतुष्ट
समिति ने 10 राज्यों का अध्ययन किया:
- कर्नाटक: 2024 में शनिवार आधा अवकाश, उत्पादकता 15% बढ़ी।
- गुजरात: 5-दिन वीकिंग, छुट्टियां 10% कम।
- महाराष्ट्र: 6-दिन मॉडल, लेकिन संघर्ष।
- उत्तर प्रदेश: छुट्टियां 20% कट, विरोध।
- MP में 2025 कैलेंडर में 90 अवकाश, लेकिन कटौती से 70 रह जाएंगे।
छुट्टियों का नया दौर, कर्मचारियों की चुनौती
मध्य प्रदेश में छुट्टियों में कटौती का प्रस्ताव कर्मचारियों के लिए तापमान बढ़ा रहा है। 6-दिन सप्ताह या 5-दिन +1 घंटा - सीएम का फैसला तय करेगा। उत्पादकता बढ़ेगी, लेकिन परिवार समय कम। संगठनों का विरोध - क्या बदले












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