MP News: स्वच्छ शहर में मौत का पानी! 12 की जान, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का वीडियो क्यों मचा रहा सियासी भूचाल?
MP News: देश के सबसे स्वच्छ शहर का तमगा पाए इंदौर में ऐसा मंजर सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से अब तक 12 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 162 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। उल्टी-दस्त, बुखार और गंभीर संक्रमण से जूझ रहे मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है।
जिस शहर को विकास और स्वच्छता का मॉडल बताया जाता रहा, वहीं अब लोग पूछ रहे हैं-
"अगर यह स्वच्छ शहर है, तो मौत का पानी कहां से आया?"

हाईकोर्ट सख्त: सरकार से मांगी स्टेटस रिपोर्ट
भागीरथपुरा जल त्रासदी ने अब कानूनी रूप ले लिया है। मामले में हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में दो जनहित याचिकाएं दायर की गई हैं।
- पहली याचिका: इंदौर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश इंसानी
- दूसरी याचिका: भागीरथपुरा निवासी राहुल गायकवाड
बुधवार को दोनों याचिकाओं पर संयुक्त सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिनव धनोत्कर और ऋषि कुमार चौकसे ने कोर्ट को बताया कि- "स्थिति बेहद गंभीर है। लगातार मरीज सामने आ रहे हैं। मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है और प्रशासन अब तक ठोस जवाब नहीं दे पाया है।"
सरकार का पक्ष: 10 अस्पतालों में मुफ्त इलाज
शासन की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि- "भागीरथपुरा क्षेत्र के सभी मरीजों का इंदौर के 10 अस्पतालों में निशुल्क इलाज किया जा रहा है।" इस पर हाईकोर्ट ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा- "यह तो करना ही पड़ेगा।"
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि 2 जनवरी तक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाए, जिसमें यह साफ बताया जाए-
- कितने मरीजों का इलाज चल रहा है
- अब तक कितनी मौतें हुई हैं
- दूषित पानी की जिम्मेदारी किसकी है
सीएम मोहन यादव इंदौर पहुंचे, अफसरों को सख्त निर्देश
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार शाम इंदौर पहुंचे। उन्होंने अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात की। परिजनों का हाल जाना। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ आपात बैठक ली
बैठक में सीएम ने साफ शब्दों में कहा- "ऐसी कष्टदायक स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए व्यापक और स्थायी प्रबंध किए जाएं। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।"
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का वीडियो क्यों हो रहा वायरल?
सीएम की बैठक के बाद जब कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बाहर निकले, तो मीडिया ने सवाल पूछे।
एक रिपोर्टर ने पूछा-
"अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजनों को इलाज में हुए खर्च का रिफंड अभी तक नहीं मिला है।" इस सवाल पर मंत्री विजयवर्गीय ने कथित तौर पर कहा- "अरे छोड़ो यार, फोकट के सवाल मत पूछो।"
रिपोर्टर ने जवाब दिया- "यह फोकट सवाल नहीं है, हम ग्राउंड से होकर आए हैं।"
इसके बाद मंत्री झल्लाते हुए अभद्र शब्दों का इस्तेमाल करते नजर आए। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में कैद हो गया और कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
वीडियो वायरल होते ही विपक्ष ने सरकार को घेर लिया।
सवाल उठे-
- क्या मौतों के बीच सवाल पूछना "फोकट" है?
- क्या जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही खत्म हो चुकी है?
- क्या स्वच्छता के दावों की सच्चाई यही है?
- हालांकि, विवाद बढ़ने के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने X (ट्विटर) पर पोस्ट कर अपने शब्दों पर खेद भी जताया।
भागीरथपुरा में दहशत, भरोसा टूटा
इलाके में अभी भी डर का माहौल है। लोग कह रहे हैं- नलों से बदबूदार पानी आया। शिकायतों के बावजूद सप्लाई नहीं रोकी गई। देर से चेतना, जान पर भारी पड़ी। एक स्थानीय निवासी ने कहा- "हमने भरोसा किया, वही भरोसा हमारी जान ले गया।"
स्वच्छता मॉडल पर सवाल
इंदौर की यह जल त्रासदी सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, सिस्टम फेल्योर और जवाबदेही की परीक्षा है। अब सबकी निगाहें हाईकोर्ट की रिपोर्ट, सरकार की कार्रवाई और दोषियों पर होने वाले एक्शन पर टिकी हैं।
सवाल यही है- क्या स्वच्छ शहर की चमक के पीछे छुपी सच्चाई अब सामने आएगी? वनइंडिया हिंदी इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।












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