MP News: भोपाल में लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई, जानिए कैसे पटवारी 15,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ाया
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। बैरसिया तहसील के ग्राम दामखेड़ा में पदस्थ पटवारी अविनाश सिंह को ₹15,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह कार्रवाई 11 जून को लोकायुक्त पुलिस की विशेष टीम द्वारा की गई।
यह कार्रवाई ग्राम दामखेड़ा में 11 जून 2025 को की गई, जब शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त कार्यालय में पटवारी द्वारा रिश्वत मांगने की शिकायत दर्ज की थी।

शिकायत का सिलसिला और ऑपरेशन की तैयारी
32 वर्षीय शिकायतकर्ता इंसाफ खान, निवासी झीलकारीया खुर्द, ने 10 जून को लोकायुक्त कार्यालय में एक लिखित शिकायत दी थी। उनके अनुसार, दामखेड़ा गांव की पैतृक भूमि के सीमांकन कार्य के एवज में पटवारी अविनाश सिंह ने प्रति एकड़ ₹2000 के हिसाब से ₹30,000 की रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत को गंभीर मानते हुए पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र सिंह के निर्देश पर उप पुलिस अधीक्षक मंजू सिंह पटेल ने तत्काल सत्यापन अभियान चलाया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद ट्रैप ऑपरेशन की रूपरेखा तैयार की गई।
ट्रैप ऑपरेशन, रंगे हाथों गिरफ्तारी
11 जून 2025 को लोकायुक्त की टीम ने ग्राम दामखेड़ा में एक सुनियोजित ट्रैप ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन का नेतृत्व उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती मंजू सिंह पटेल ने किया, जिसमें उप पुलिस अधीक्षक श्री दिलीप झरबड़े और लोकायुक्त भोपाल के विशेष पुलिस स्थापना के अन्य स्टाफ शामिल थे।
शिकायतकर्ता इंसाफ खान को 15,000 रुपये की रिश्वत राशि के साथ पटवारी अविनाश सिंह के पास भेजा गया। जैसे ही अविनाश सिंह ने इंसाफ से 15,000 रुपये की रिश्वत ली, लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। रिश्वत की राशि को जब्त कर लिया गया, और आरोपी को हिरासत में ले लिया गया।
कानूनी कार्रवाई
लोकायुक्त पुलिस ने अविनाश सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(1)(d) के तहत मामला दर्ज किया है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने रिश्वत लेने की बात स्वीकार की है। लोकायुक्त पुलिस अब यह जांच कर रही है कि क्या अविनाश सिंह ने पहले भी इस तरह की रिश्वतखोरी की घटनाओं को अंजाम दिया है।
आरोपी को भोपाल की स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। लोकायुक्त पुलिस ने मामले में आगे की जांच शुरू कर दी है, जिसमें पटवारी के बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य गतिविधियों की भी छानबीन की जाएगी।
शिकायतकर्ता का बयान
इंसाफ खान ने लोकायुक्त की कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा, "मेरे पिता ने अपनी जमीन का बंटवारा मेरे और मेरे भाइयों के बीच किया था, लेकिन सीमांकन के लिए पटवारी बार-बार रिश्वत की मांग कर रहा था। हम जैसे आम लोग अपनी मेहनत की कमाई से रिश्वत नहीं दे सकते। मैंने लोकायुक्त से संपर्क किया, और उनकी त्वरित कार्रवाई से आज न्याय हुआ है।"
लोकायुक्त की प्रतिक्रिया
उप पुलिस अधीक्षक मंजू सिंह पटेल ने कहा, "यह एक सुनियोजित ऑपरेशन था। हमारी टीम ने शिकायत के सत्यापन से लेकर ट्रैप तक पूरी सावधानी और गोपनीयता बरती। भ्रष्टाचार के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी, और हम आम जनता से अपील करते हैं कि वे ऐसी घटनाओं की जानकारी लोकायुक्त को जरूर दें।"
पुलिस अधीक्षक श्री वीरेंद्र सिंह ने कहा, "भ्रष्टाचार समाज के लिए एक अभिशाप है। हमारी प्राथमिकता है कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता बनी रहे। इस तरह की कार्रवाइयां भ्रष्टाचारियों के लिए चेतावनी हैं कि वे कानून के शिकंजे से नहीं बच सकते।"
सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
यह घटना एक बार फिर सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार की गंभीर समस्या को उजागर करती है। पटवारी जैसे निचले स्तर के कर्मचारी, जो आम लोगों के दैनिक कार्यों से सीधे जुड़े होते हैं, अक्सर रिश्वतखोरी में लिप्त पाए जाते हैं। इस कार्रवाई ने ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों में एक उम्मीद जगाई है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने से न्याय मिल सकता है।
स्थानीय निवासियों ने लोकायुक्त की इस कार्रवाई का स्वागत किया है। दामखेड़ा के निवासी रमेश पाटीदार ने कहा, "पटवारी अक्सर जमीन के मामलों में रिश्वत मांगते हैं। यह कार्रवाई एक मिसाल है। हम चाहते हैं कि सरकार ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ और सख्त कदम उठाए।"
भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त की सक्रियता
मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन पिछले कुछ वर्षों से भ्रष्टाचार के खिलाफ सक्रियता से काम कर रहा है। वर्ष 2024-25 में लोकायुक्त ने कई बड़ी कार्रवाइयां की हैं, जिनमें सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। इस तरह की कार्रवाइयां न केवल भ्रष्टाचारियों में खौफ पैदा करती हैं, बल्कि आम जनता का भरोसा भी बढ़ाती हैं।












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