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MP IPS Abhishek Tiwari Resignation: दो बार राष्ट्रपति पदक विजेता ने क्यों दिया इस्तीफा, जानिए पूरी प्रोफाइल

मध्य प्रदेश पुलिस कैडर के चर्चित और साहसी आईपीएस अधिकारी अभिषेक तिवारी (2013 बैच) ने हाल ही में अपनी सेवा से इस्तीफा देकर प्रशासनिक और पुलिस गलियारों में हलचल मचा दी है।

दो-दो बार राष्ट्रपति पुलिस गैलेंट्री मेडल से सम्मानित इस अधिकारी का अचानक लिया गया फैसला कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर क्या वजह रही कि एक बहादुर और सफल अधिकारी ने वर्दी छोड़ने का मन बना लिया?

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मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर तक का सफर

अभिषेक तिवारी मूल रूप से मध्य प्रदेश के निवासी हैं। उनका जन्म 6 अप्रैल 1984 को हुआ। उन्होंने जबलपुर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और इसके बाद आईआईएम इंदौर से एमबीए किया। तकनीकी और प्रबंधन की मजबूत शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बावजूद उन्होंने कॉरपोरेट दुनिया के बजाय सिविल सेवा को चुना और कड़ी मेहनत के बाद आईपीएस बने।

नक्सल मोर्चे पर दिखाई बहादुरी, मिला राष्ट्रपति गैलेंट्री मेडल

अभिषेक तिवारी का सबसे चर्चित कार्यकाल नक्सल प्रभावित बालाघाट जिले में रहा। जनवरी 2019 से जनवरी 2022 तक एसपी रहते हुए उन्होंने कई बड़े नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। दुर्गम जंगलों और जोखिम भरे इलाकों में खुद मोर्चा संभालने वाले अभिषेक तिवारी को उनकी बहादुरी के लिए दो बार राष्ट्रपति पुलिस पदक (President's Police Medal for Gallantry) से सम्मानित किया गया।

सागर और रतलाम में सख्त अफसर की छवि

बालाघाट के बाद अभिषेक तिवारी की पोस्टिंग सागर और फिर रतलाम में एसपी के रूप में हुई। रतलाम में फरवरी 2022 से हाल तक उनके कार्यकाल को अपराध नियंत्रण और कानून व्यवस्था के लिए जाना जाता है। आम जनता के बीच वे एक सख्त लेकिन निष्पक्ष अधिकारी के रूप में पहचाने गए। हालांकि सागर में दीवार गिरने की घटना के बाद, जब वे अवकाश पर थे, तब उन्हें हटाया गया, जिसे लेकर काफी विवाद भी हुआ।

NTRO में अहम जिम्मेदारी, फिर अचानक इस्तीफा

इस्तीफा देने से पहले अभिषेक तिवारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली स्थित नेशनल टेक्निकल रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (NTRO) में तैनात थे। यह देश की प्रमुख तकनीकी और खुफिया एजेंसियों में से एक है। ऐसे संवेदनशील पद पर रहते हुए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और फिर इस्तीफे का फैसला सभी को चौंकाने वाला रहा।

इस्तीफे की वजह: निजी कारण या करियर में नया मोड़?

अभिषेक तिवारी ने अपने इस्तीफे के पीछे आधिकारिक रूप से व्यक्तिगत कारण बताए हैं। हालांकि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि वे अब आईटी सेक्टर में करियर बनाना चाहते हैं, जहां उनकी इंजीनियरिंग और एमबीए की पृष्ठभूमि काम आ सकती है। वहीं कुछ लोग उनके इस्तीफे को पूर्व की विवादित घटनाओं से जोड़कर भी देख रहे हैं।

सोशल मीडिया पर सक्रिय, युवाओं के रोल मॉडल

अभिषेक तिवारी सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहे हैं। उनके काम करने के तरीके और जमीनी नेतृत्व से कई युवा पुलिसकर्मी प्रेरणा लेते हैं। पुलिस महकमे में उन्हें एक प्रोफेशनल और फील्ड-ओरिएंटेड अफसर के रूप में देखा जाता रहा है।

पुलिस महकमे के लिए बड़ा संदेश

जनवरी 2026 तक उनका इस्तीफा स्वीकार किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। नक्सल विरोधी अभियानों में बहादुरी दिखाने वाले और सम्मानित अधिकारी का सिस्टम से बाहर जाना पुलिस महकमे के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। अभिषेक तिवारी का यह फैसला आने वाले समय में प्रशासनिक सेवा और युवाओं की सोच पर गहरा प्रभाव डाल सकता है।

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