MP: बिजली गिरने और बादल गरजने से उड़े दर्जनों सेटअप बॉक्स, जानें कैसे करें बचाव

भोपाल के नोट टीटी नगर इलाके में बिजली और बादल के गरजने से दर्जनों सेटअप बॉक्स उड़ गए और कई घरों की टीवी में शॉर्ट सर्किट हो गया। इस घटना को लेकर वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक ने चेतावनी जारी की है।

भोपाल,16 जुलाई। मध्य प्रदेश में बारिश शुरू होते ही वज्रपात की घटनाएं बढ़ गई है। आसमान से आफत के रूप में गिरने वाली बिजली के कारण अब तक एमपी में 90 से ज्यादा लोग जान गवा चुके हैं। सबसे ज्यादा छतरपुर में 9 और छिंदवाड़ा में अब तक 6 लोगों की बिजली गिरने से मौत हो चुकी है। शुक्रवार की रात में 12 से रात को 1 बजे के बीच करीब 6557 स्थानों पर बिजली चमकी और रात में तेज हवा भी चली। जिससे भोपाल के कई स्थानों पर बिजली गोल रही। इस बीच भोपाल में सेटअप बॉक्स, टीवी के शॉर्ट सर्किट और बिजली मीटर के उड़ने की खबरें सामने आ रही है।

बिजली और बादल के गरजने से उड़े सेटअप बॉक्स

बिजली और बादल के गरजने से उड़े सेटअप बॉक्स

बिजली और बादल के गरजने से उड़े सेटअप बॉक्स

राजधानी भोपाल में तेज बारिश और बिजली व बादल के गरजने से नार्थ टीटी नगर के बाणगंगा इलाके में करीब 20 सेटअप बॉक्स और कुछ लोगों की टीवी यहां शॉर्ट सर्किट का शिकार हो गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि तेज बारिश के साथ अचानक से बिजली कड़कने की आवाज आई। उसके बाद एक धमाका हुआ और सभी के सेटअप बॉक्स उड़ गए। बता दे इससे पहले राजधानी भोपाल के पुरानी जेल में सीसीटीवी के कैमरों में शॉर्ट सर्किट हो गया था। जहां नगर निगम के चुनाव की मतदान पेटी रखी हुई है।

मौसम वैज्ञानिक वेद प्रकाश सिंह की मानें तो जब बिजली और बादल गरजते हैं तो इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस का उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि डिवाइस में कंडक्टर लगे होते हैं जो बिजली से सीधा संपर्क साध लेते हैं।

आइए जानते हैं बादलों के बीच कैसे बनती है बिजली

आइए जानते हैं बादलों के बीच कैसे बनती है बिजली

मौसम वैज्ञानिक के अनुसार सामान्य रूप से बादल जमीन से 1 किलोमीटर की ऊंचाई पर बनना शुरू होते हैं। गर्मी बढ़ने से इनकी मोटाई 3 किलोमीटर तक बढ़ जाती है। बादल बनने की प्रक्रिया में बादलों की मोटाई 6 किलोमीटर तक हो जाती है। इन्हीं बादलों में जलवाष्प धीरे-धीरे ऊपर जाती है तो वैसे-वैसे गिरते हुए तापमान की वजह से पानी की छोटी छोटी बूंदे बड़ी बूंदों में बदलने लगती है। धीरे-धीरे तापमान सुननी हो जाता है यहां से पानी की बूंदे बारिक बर्फ में बदलने लगती है। नीचे से गर्म हवाओं के आसमान की ओर जाने से और ऊपर से ठंडी हवा की जमीन की तरफ आने से इनमें घर्षण पैदा होने लगता है और इसी वजह से बिजली पैदा होती है।

क्यों गिरती है बिजली

क्यों गिरती है बिजली

मानसून में अधिक गर्मी का बढ़ना बिजली गिरने का प्रमुख कारण होता है। दिन में गर्मी बढ़ने से गर्म भाप तेजी से ऊपर उठती है। इससे करीब 6 किलोमीटर की ऊंचाई तक बादल बनते जाते हैं। इसी दौरान टॉपस्लाइन के गिरने से बिजली ज्यादा तेज गति से बनती है। खास है कि ड्रॉपलाइन के नॉर्थ की तरफ बिजली गिरती है जबकि साउथ की तरफ उसका प्रभाव कम होता है। जहां बिजली गिरती है वहां का तापमान 38 से 45 के बीच रहता है। मौसम वैज्ञानिक की माने तो बिजली गिरने का प्रमुख कारण तापमान ही होता है।

जमीन पर गिरकर डिस्चार्ज होती है बिजली

जमीन पर गिरकर डिस्चार्ज होती है बिजली

आसमानी बिजली बहुत पॉवरफुल होती है। चार्ज होने के बाद यह जमीन पर गिर कर डिस्चार्ज हो जाती है। इसका पॉजिटिव चार्ज बादल के ऊपरी की तरफ चला जाता है। नेगेटिव चार्ज नीचे साइड बन जाता है। नेगेटिव चार्ज पॉजिटिव चार्ज की तरफ बढ़ता है। धरती पर हवा के चलने से पेड़-पौधों और उचित स्थानों पर पॉजिटिव चार्ज जमा हो जाता है। इससे जमीन पर मौजूद पॉजिटिव चार्ज के बादल नेगेटिव चार्ज के बादल को अपनी और आकर्षित करते हैं।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+