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MP News: दिग्विजय सिंह का उमर खालिद को समर्थन, दुर्गेश केसवानी बोले- सुधर जाओ वरना इतिहास की वस्तु बन जाओगे

मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर विवादास्पद बयानबाजी ने आग लगा दी है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने दिल्ली दंगों के आरोपी और जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद का खुलकर समर्थन किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए दिग्विजय ने खालिद को 'बेकसूर' बताते हुए उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। यह बयान आते ही भाजपा ने जोरदार हमला बोला।

प्रदेश भाजपा प्रवक्ता डॉ दुर्गेश केसवानी ने दिग्विजय पर तंज कसते हुए कहा कि वे भगवे में आतंकवाद और जाकिर नाइक में शांति देखते हैं।

MP Congress Digvijay Singh support for Umar Khalid Durgesh Keswani BJP sharp retort

केसवानी ने चेतावनी भी दी कि यदि कांग्रेस और दिग्विजय जल्द सुधरे नहीं, तो इतिहास की वस्तु बन जाएंगे। यह विवाद न केवल मध्य प्रदेश तक सीमित रहा, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ दी। आइए, जानते हैं इस पूरे घटनाक्रम की पूरी दास्तां - दिग्विजय का बयान, भाजपा का पलटवार, उमर खालिद पर आरोप और राजनीतिक संदर्भ।

दिग्विजय सिंह का विवादित बयान: 'उमर खालिद बेकसूर, पीएचडी स्कॉलर और राष्ट्रद्रोही नहीं'

दिग्विजय सिंह ने 2 नवंबर 2025 को एक्स पर एक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने उमर खालिद के समर्थन में लिखा: "उमर खालिद बेकसूर है। उसके साथ बहुत अन्याय हो रहा है। पीएचडी स्कॉलर है और किसी भी मापदंड में राष्ट्रद्रोही नहीं है। उसे तत्काल रिहा किया जाना चाहिए।" यह बयान दिल्ली कोर्ट में खालिद की जमानत याचिका की सुनवाई से ठीक पहले आया, जिसने सियासी हलचल मचा दी। दिग्विजय ने आगे कहा कि खालिद को 'परेशान' किया जा रहा है, और यह न्यायपालिका पर सवाल उठाने जैसा है।

यह दिग्विजय का पहला ऐसा बयान नहीं है। 2020 में दिल्ली दंगों के बाद भी उन्होंने खालिद का समर्थन किया था, जब उन्होंने हर्ष मंदर जैसे कार्यकर्ताओं का हवाला देकर कहा था, "गांधीवादी कभी हिंसक नहीं हो सकते।" जून 2025 में भी उन्होंने पीएम मोदी और सुप्रीम कोर्ट से सवाल किया था, "उमर खालिद का क्या कसूर था?" दिग्विजय का यह रुख हमेशा से विवादों का कारण बना रहा है, खासकर जब बात देशद्रोह या दंगों से जुड़ी हो। कांग्रेस के अंदर भी इस बयान पर कुछ असहजता दिखी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा, "यह दिग्विजय जी का व्यक्तिगत विचार है। पार्टी न्यायपालिका पर भरोसा रखती है।"

भाजपा का तीखा पलटवार: 'भगवे में आतंकवाद, जाकिर नाइक में शांति देखते हैं दिग्विजय'

दिग्विजय के बयान पर भाजपा ने तुरंत प्रतिक्रिया दी। प्रदेश प्रवक्ता डॉ दुर्गेश केसवानी ने एक्स पर पोस्ट कर हमला बोला: "भगवे में आतंकवाद और जाकिर नाइक में शांति देखते हैं दिग्विजय। कांग्रेस और दिग्विजय सिंह एक विशेष वर्ग की राजनीति करते हैं। इन्हें भगवे में आतंकवाद और जाकिर नायक में शांति का दूत नजर आता है।" केसवानी ने दिग्विजय के पुराने बयानों का जिक्र किया - जैसे ओसामा बिन लादेन को 'ओसामा जी' कहना - और पूछा, "क्या दिग्विजय सिंह न्यायालय से ऊपर हैं?"

केसवानी यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, "उज्जैन में जब पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे थे, तब दिग्विजय सिंह को 'काजी साहब जिंदाबाद' सुनाई दिया था। और अब उमर खालिद जैसे देशद्रोही के पक्ष में बयान दे रहे हैं। राम मंदिर पर सवाल उठाते हैं, भगवान में आतंकवाद देखते हैं - इसलिए जनता इन्हें नापसंद करती है।" उन्होंने गणेश उत्सव और माता के चल समारोह पर पत्थरबाजी के मामलों में दिग्विजय की 'चुप्पी' पर भी तंज कसा। "लैंड जिहाद, लव जिहाद और थूक जिहाद पर दिग्विजय सिंह मौन रहते हैं।"

केसवानी ने चेतावनी देते हुए कहा, "दिग्विजय सिंह और कांग्रेस जल्द सुधर जाएं, वरना इतिहास की वस्तु बनकर रह जाएंगे। ऐसे बयान देकर ये सिर्फ केस को अटकाने और देश के खिलाफ बयानबाजी को बढ़ावा देने का काम कर रहे हैं।"

भाजपा के अन्य नेता भी मैदान में उतरे। विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, "दिग्विजय सिंह की आतंकवाद और उग्रवाद के प्रति सहानुभूति रहती है। कांग्रेस को दिग्विजय यहां रहने देंगे तो बर्बाद हो जाएगी।" राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा, "कांग्रेस का हाथ हमेशा दंगाइयों के साथ रहा है। न्यायपालिका ने खालिद की जमानत खारिज की, लेकिन दिग्विजय को न्यायपालिका पर भरोसा नहीं।"

उमर खालिद पर गंभीर आरोप: दिल्ली दंगों का 'मास्टरमाइंड', 5 साल से जेल में

उमर खालिद (उम्र 37 वर्ष) जेएनयू के पूर्व छात्र और छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों में उन्हें मुख्य आरोपी बनाया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, खालिद ने दंगों की साजिश रची, जिसमें सीएए-एनआरसी विरोध प्रदर्शनों को हिंसक रूप देने का आरोप है। यूएपीए (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत गिरफ्तार, खालिद पर हत्या, दंगा भड़काना, गैरकानूनी सभा और अभद्र भाषा के आरोप हैं।

13 सितंबर 2020 से खालिद तिहाड़ जेल में बंद हैं। उनकी जमानत याचिकाएं कई बार खारिज हो चुकी हैं। नवंबर 2020 में चार्जशीट दाखिल की गई, जिसमें इशरत जहां, सफूरा जरगर, ताहिर हुसैन जैसे अन्य आरोपी भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा कि सबूत पर्याप्त हैं। खालिद के समर्थक मानते हैं कि यह राजनीतिक साजिश है, लेकिन भाजपा इसे 'देशद्रोह' करार देती है।

दिग्विजय का पुराना इतिहास, कांग्रेस की दुविधा

दिग्विजय सिंह का यह बयान उनके विवादित बयानों की कड़ी का हिस्सा है। 2008 मुंबई हमलों के बाद उन्होंने कहा था, "भगवा आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा है।" जाकिर नाइक पर भी उनका नरम रुख रहा। 2024 में सीएए-एनआरसी विरोध में खालिद-सैफी का समर्थन किया। भाजपा इन्हें 'वोटबैंक पॉलिटिक्स' बताती है।

कांग्रेस में असहजता साफ दिखी। जयवर्धन सिंह ने कहा, "मामला कोर्ट में है, न्याय होगा।" लेकिन भाजपा ने कांग्रेस को निशाने पर लिया, "दिग्विजय यहां रहेंगे तो पार्टी बर्बाद हो जाएगी।"

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