MP News Politics: ‘जनता को औकात याद दिलाने वाला सत्र’—उमंग सिंघार का भाजपा पर तीखा हमला
MP Assembly: मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र आज अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। करीब दो सप्ताह तक चले इस सत्र में जहां सरकार ने इसे "फलदायी" बताया, वहीं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यह सत्र भाजपा सरकार द्वारा जनता को उसकी "औकात" याद दिलाने के लिए याद रखा जाएगा।
सत्र के समापन पर उन्होंने आरोप लगाया कि जब-जब कांग्रेस ने जनहित के गंभीर मुद्दे उठाए, तब-तब सरकार ने जवाब देने के बजाय विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश की।

इंदौर में जहरीले पानी से 35 लोगों की मौत का मामला
उमंग सिंघार ने कहा कि कांग्रेस विधायक दल ने इंदौर में जहरीले पानी से 35 लोगों की मौत, स्वच्छ पेयजल संकट, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में उजागर कथित अनियमितताओं, सिंगरौली के धिरौली कोल ब्लॉक में आदिवासियों के विस्थापन, लाड़ली बहना योजना में नाम कटने की शिकायतें, भोपाल नगर निगम में गौहत्या के आरोप और इन्वेस्टर समिट के नाम पर विदेश दौरों जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
उनका आरोप था कि सरकार ने इन सवालों पर पारदर्शी जवाब देने के बजाय टालमटोल का रवैया अपनाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश पर करीब 6 लाख करोड़ रुपये का कर्ज हो चुका है, लेकिन सरकार कर्ज लेकर "घी पी रही है" और अंततः इसका बोझ आम नागरिकों पर टैक्स के रूप में डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि सदन के भीतर और बाहर आम प्रदेशवासियों को हर दिन उनकी "औकात" याद दिलाई जा रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने विधानसभा को लोकतंत्र का "मंदिर" बताते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि का धर्म केवल जनता की सेवा है, चाहे वह किसी भी दल, वर्ग या क्षेत्र से आता हो। उन्होंने कांग्रेस विधायक दल के सभी सदस्यों का आभार जताया, जिन्होंने उनके अनुसार जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाया। साथ ही उन्होंने पक्ष के विधायकों का भी धन्यवाद दिया और उम्मीद जताई कि भविष्य में सभी दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर प्रदेश की जनता के हित में काम करेंगे। उनका कहना था कि दल कोई भी हो, लक्ष्य और प्रतिबद्धता सदैव जनहित ही रहनी चाहिए।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बड़ा बयान
दूसरी ओर, संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सत्र के समापन पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि कार्यमंत्रणा समिति में जो एजेंडा तय किया गया था, वह पूरी तरह से संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि विपक्ष का भी भरपूर सहयोग मिला और लगभग 100 प्रतिशत निर्धारित कार्य पर चर्चा हुई। मंत्री के अनुसार इस सत्र में 7000 से अधिक प्रश्न पूछे गए और अधिकतम विधायकों को अपने सवाल रखने का अवसर मिला। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि मध्य प्रदेश में होली लंबे समय तक मनाई जाती है, इसलिए होली के बाद सत्र को जारी रखना व्यावहारिक नहीं था। प्रमुख विषयों पर चर्चा पूरी कर ली गई है और सत्र "बहुत फ्रूटफुल" रहा।
यह बजट सत्र राजनीतिक रूप से काफी चर्चित रहा। विपक्ष ने कर्ज के बढ़ते बोझ, कथित भ्रष्टाचार, किसान और आदिवासी मुद्दों, धिरौली कोल ब्लॉक विवाद तथा लाड़ली बहना योजना में कथित गड़बड़ियों को लेकर सरकार को घेरा। वहीं सरकार ने अपने बजट प्रावधानों, विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का बचाव किया। सत्र के दौरान कई बार हंगामा, वॉकआउट और कार्यवाही स्थगन की नौबत भी आई, लेकिन अंत में दोनों पक्षों ने अपने-अपने तरीके से इसे सफल बताया।
अब विधानसभा की अगली बैठक होली के बाद होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जिन मुद्दों पर इस सत्र में तीखी बहस हुई, वे आने वाले समय में भी प्रदेश की राजनीति के केंद्र में बने रहेंगे। बजट सत्र भले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया हो, लेकिन सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर थमने वाला नहीं दिख रहा।












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