लोकसभा में हंगामे पर मंत्री विश्वास कैलाश सारंग का बयान, “राहुल गांधी ने लोकतंत्र को बदनाम करने की मुहिम चलाई”
लोकसभा अध्यक्ष के चेंबर में विपक्ष द्वारा किए गए हंगामे को लेकर प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा कि राहुल गांधी देश के मान-सम्मान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं को तार-तार करने की मुहिम चला रहे हैं। मंत्री सारंग ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह लगाकर विपक्ष ने देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नुकसान पहुंचाया है।

उन्होंने कहा कि देश की जनता द्वारा चुनी गई भाजपा सरकार के प्रति विपक्ष का इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। "सदन की गरिमा का पालन करना हर राजनीतिक कार्यकर्ता और सांसद की नैतिक जिम्मेदारी है, लेकिन जिस तरह से राष्ट्रपति के अभिभाषण से लेकर लोकसभा की कार्यवाही तक विपक्ष ने व्यवहार किया, वह निंदनीय है," सारंग ने कहा।
मंत्री ने आगे कहा कि लोकसभा अध्यक्ष का पद अत्यंत सम्मानित और संवैधानिक है, लेकिन विपक्ष ने उस गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के सांसदों का आचरण ऐसा था, जो दुनिया के किसी भी लोकतांत्रिक देश में देखने को नहीं मिलता। सारंग ने राहुल गांधी की कार्यशैली और बॉडी लैंग्वेज पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका व्यवहार अत्यधिक कैजुअल और गैर-जिम्मेदाराना है। उनके मुताबिक विपक्ष की राजनीति केवल ऐशो-आराम और सत्ता की लालसा तक सीमित रह गई है।
"राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए बच्चों का उपयोग"
शहडोल मामले को लेकर कांग्रेस द्वारा किए गए प्रदर्शन पर भी मंत्री सारंग ने निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए बच्चों का उपयोग कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस बच्चे की परीक्षा थी, उसे प्रदर्शन में लाना अत्यंत गैर-जिम्मेदाराना कदम है और इस मामले में संबंधित लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।
सारंग ने कहा कि नाबालिग बच्चों को राजनीतिक प्रदर्शनों में शामिल करना कांग्रेस की अनर्गल और अवसरवादी नीति को दर्शाता है। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि जो लोग बच्चों को इस प्रकार के प्रदर्शनों में लेकर आए, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं।
"हिंदुस्तान में रहना है तो वंदे मातरम गाना ही होगा"
वंदे मातरम को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा जताई गई आपत्ति पर मंत्री सारंग ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वंदे मातरम देश का मान और सम्मान है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम के माध्यम से हम देश की एकता और अखंडता को मजबूत करते हैं और वीर बलिदानियों के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं।
सारंग ने कहा कि जिसे वंदे मातरम गाने में आपत्ति है, उसे हिंदुस्तान में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे राष्ट्रभक्ति और संवैधानिक मूल्यों से जुड़ा विषय बताया।
आरिफ मसूद के बयान पर पलटवार
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के वंदे मातरम को लेकर दिए गए बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री सारंग ने कहा कि जो लोग फिरकापरस्ती की राजनीति करते हैं, उन्हें ही वंदे मातरम गाने में आपत्ति होती है। उन्होंने कहा कि देश में रहना है तो संविधान का पालन करना होगा और राष्ट्रीय प्रतीकों का सम्मान करना होगा।
मंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि जिन्हें वंदे मातरम गाने में दिक्कत है, वे भारत की भावना को समझें, अन्यथा उन्हें अपने विचारों पर पुनर्विचार करना चाहिए।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। एक ओर विपक्ष सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों के हनन का आरोप लगा रहा है, वहीं सरकार विपक्ष के व्यवहार को गैर-जिम्मेदाराना और देशहित के खिलाफ बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और तूल पकड़ सकता है।












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