जीएसटी के कलेक्शन में देश के टॉप-5 राज्यों में से एक हैं मध्य प्रदेश: CM शिवराज
सीएम शिवराज ने कहा कि बजट बनाने के लिए हमने जनता से सहयोग की अपील की और मुझे खुशी है है कि लगभग 4 हजार से अधिक सुझाव जनता के बीच से निकलकर हमारे पास आए। हमने इन सुझावों में से अधिकांश को क्रियान्वित करने का प्रयास किया।

राजधानी भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में "आर्थिक सर्वेक्षण एवं बजट 2023-24" पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए। सीएम ने कहा कि मुझे बताते हुए खुशी है कि सकल घरेलू उत्पाद 2002-03 में जो केवल 71 हजार करोड़ के आसपास था, वह 2022-23 में बढ़कर 13 लाख 22 हजार 821 करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने कहा कि कोविड की कठिनाइयों के बावजूद राज्य का रेवेन्यू लगातार बड़ा है। राजस्व में वृद्धि दर 7.94% रही। जीएसटी के संग्रहण में हम देश के टॉप-5 राज्यों में से एक हैं।

मध्यप्रदेश तेजी से प्रगतिपथ पर गतिमान: CM
सीएम शिवराज ने कहा कि आमतौर पर बजट रूखा-सूखा और जनता की अरुचि का विषय होता है। लेकिन हम आप तैयार है कि बजट बनाने में जनता की सहभागिता हो। इसके लिए हमने पिछले वर्षों से इसके लिए कोशिश करना प्रारंभ की और जनता के सुझाव मांगे। बजट बनाने के लिए हमने जनता से सहयोग की अपील की और मुझे प्रसन्नता है कि लगभग 4 हजार से अधिक सुझाव हमारे पास आए। हमने इन सुझावों में से अधिकांश को क्रियान्वित करने का प्रयास किया। मध्यप्रदेश तेजी से प्रगतिपथ पर गतिमान है। सकल घरेलू उत्पाद की दृष्टि से देखें, तो 2002-03 में यह केवल 71 हजार करोड़ के आसपास था, जो 2022-23 में बढ़कर 13 लाख 22 हजार 821 करोड़ रुपये हो गया है। प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय 2002-03 में 11,718 रुपए थी, जो 2022-23 में बढ़कर 1,40,500 रुपए हो गई। मैं अभी संतुष्ट नहीं हूं। हमें अभी और आगे जाना है, लेकिन हम जिस गति से आगे बढ़ रहे हैं, वह अपने आप में एक रिकॉर्ड है।

ऋण लेने के कई मापदण्ड होते हैं: CM
सीएम शिवराज ने कहा कि युवाओं को स्वरोजगार के प्रति बढ़ावा देने के लिए हम मुख्यमंत्री युवा अप्रेंटिसशिप योजना शुरू कर रहे हैं, जो 'करो और कमाओ' या कहें कि Learn and Earn पर आधारित है, यानी 'सीखो और कमाओ' इसमें प्रतिवर्ष युवा को ₹1 लाख दिए जाएंगे। आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 में तेजी से आगे बढ़ते हुए मध्यप्रदेश की तस्वीर दिखाई देती है। आर्थिक सर्वेक्षण के आँकड़े बताते हैं कि सही दिशा में दूरदर्शी सोच के साथ अगर प्रयास किए जाएं तो कठिनाइयों को भी कामयाबी में बदला जा सकता है। मध्यप्रदेश ने यह करके दिखाया है। कृषि, ग्रामीण विकास, उद्योग-व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, कौशल विकास, सुशासन, विज्ञान-प्रौद्योगिकी, गरीब कल्याण और सार्वजनिक वित्त जैसे अनेकों विषय हैं, जिनमें मध्यप्रदेश ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। कई बार विपक्षियों द्वारा कर्ज लेने का आरोप लगाया जाता है। ऋण लेने के कई मापदण्ड होते हैं। यदि आप ऋण जीएसडीपी का अनुपात देखेंगे, तो 2005 में यह 39.5 प्रतिशत था, लेकिन 2020-21 में यह घटकर 22.6 प्रतिशत हो गया।

एमपी में राजस्व में वृद्धि की दर 7.94% रही: CM
सीएम शिवराज ने कहा कि मध्यप्रदेश में 2001-02 में औद्योगिक विकास दर -0.61 थी, जो 2022-23 में बढ़कर 22 प्रतिशत हो गई। पिछली बार के बजट का आकार था, 2 लाख 79 हजार 237 करोड़ और इस साल का हमारा बजट 3 लाख 14 हजार 25 करोड़ रुपये का है। कोविड की कठिनाइयों के बावजूद भी राज्य का रेवेन्यू लगातार बड़ा है। राजस्व में वृद्धि की दर 7.94% रही। जीएसटी के संग्रहण में हम देश के टॉप-5 राज्यों में से एक हैं। भौतिक और आर्थिक प्रगति के साथ ही मध्यप्रदेश आध्यात्मिक प्रगति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए महाकाल महालोक बन रहा है। भारत को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने वाले आचार्य शंकर का एकात्म धाम हम बना रहे हैं। रामराजा लोक, देवी लोक, यहाँ बन रहे हैं। सड़कों पर ट्रैफिक के बोझ को कम करने के लिए हमारी कोशिश है कि रोप वे, केबल कार आदि का भी उपयोग करें।
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कर्जमाफी के कारण डिफॉल्टर हुए किसानों का ऋण भरने के लिए ₹2,500 करोड़ का प्रावधान: CM
सीएम शिवराज ने कहा कि मैं चाहता हूं कि भोपाल में बड़े तालाब के एक सिरे से केबल कार चले और एयरपोर्ट पर उतार दे। भौतिक और आर्थिक प्रगति के साथ ही मध्यप्रदेश आध्यात्मिक प्रगति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। इसलिए महाकाल महालोक बन रहा है। भारत को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने वाले आचार्य शंकर का एकात्म धाम हम बना रहे हैं। रामराजा लोक, देवी लोक, यहां बन रहे हैं। किसानों के लिए ₹53,964 करोड़ का प्रावधान हमने किया है। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के लिए ₹3,200 करोड़ का प्रावधान, कर्जमाफी के कारण डिफॉल्टर हुए किसानों का ऋण भरने के लिए ₹2,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। गरीबों के मकान बन सकें, इसके लिए ₹8,000 करोड़ का प्रावधान हमने किया है। अनुसूचित जनजाति के लिए ₹36,950 करोड़ तथा अनुसूचित जाति के लिए ₹26,087 करोड़ का प्रावधान हमने किया है।












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